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Sirsa News: लस्टर लॉस की शर्तों के विरोध में उतरे आढ़तियों ने गेहूं की खरीद की बंद, मंडी में बैठने को मजबूर किसान
Tue, 11 Apr 2023 11:47 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 11 Apr 2023 11:47 PM IST
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सिरसा की अनाज मंडी में गेहूं की जांच करते अधिकारी। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। ओलावृष्टि और बारिश के कारण जिले की गेहूं को काफी नुकसान पहुंचा है। बारिश के कारण अपनी चमक खो चुकी गेहूं की खरीद को लेकर किसानों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। सरकार ने लस्टर लॉस को लेकर छह स्लैब बनाई है। इसके तहत अलग-अलग सरकारी भाव भी तय गया है।
वहीं इसके विरोध में आढ़तियों ने मंगलवार को खरीद करने की प्रक्रिया बंद कर दी और शर्तें हटाने व गेहूं का नुकसान सरकार की ओर से खुद के स्तर पर वहन करने की मांग उठाई। इसके चलते तीसरे दिन भी किसानों की गेहूं की खरीद नहीं हो पाई।
मंडियों में तीन दिनों से गेहूं की आवक होना शुरू हो चुकी है। मंडियों में अब तक 50 हजार क्विंटल से अधिक आवक हो गई है। बीते दिन भी लस्टर लॉस को लेकर सरकार की ओर से पत्र जारी न किए जाने के चलते व्यापारियों ने नाम मात्र ही गेहूं की खरीद की है। इसके बाद मंगलवार सुबह 10 बजे सरकार ने लस्टर लॉस संबंधित पत्र जारी किया। इसमें गेहूं की चमक व बारिक हुए दाने के अनुसार अलग-अलग गेहूं के दाम तय किए गए हैं। अलग-अलग छह स्लैबों को लेकर आढ़तियों में रोष पनप गया। आढ़तियों मार्केट कमेटी सचिव के साथ बैठक की और दोपहर एक बजे के बाद खरीद न किए जाने का ऐलान कर दिया। आढ़तियों का कहना है पहले ही मौसम की मार के कारण किसानों काफी नुकसान उठाना पड़ा है और अब लस्टर लॉस, दाना बारिक होने सहित अन्य कारण बताकर सरकार गेहूं के दाम भी कम कर रही है। आढ़तियों ने मांग उठाते हुए कहा कि सरकार की ओर से लस्टर लॉस का नुकसान वहन किया जाए । अगर इस तरह की शर्तें आढ़तियों के सामने रखी जाती है, तो वह खरीद नहीं करेंगे। आढ़ती एसोसिएशन प्रधान मनोहर मेहता ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी और खरीद प्रक्रिया बंद रहेगी ।
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सोमवार को 20955 क्विंटल गेहूं की हो पाई खरीद
जिले में तीन दिनों से गेहूं की आवक हो रही है। बीते दिन कई मंडियों में गेहूं की खरीद प्रक्रिया की गई थी। बीते दिन जिले में 20 हजार 955 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई थी। मंडी में पहुंची गेहूं का गेट पास कटने के बाद आढ़तियों की ओर से उसका जे फार्म भी काट दिया गया है। लेकिन विभाग ने उसका डाटा भी पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है। मंगलवार को नया पत्र जारी होने से आढ़तियों की परेशानी बढ़ गई है। जिले में अब तक 50 हजार क्विंटल गेहूं मंडी में ही पड़ी है। हालांकि बीत दिन खरीदी गई 20 हजार क्विंटल गेहूं का भी अभी उठान नहीं हो पाया है।
नमी बताकर अधिकारी ने खरीद रहे गेहूं
किसान करतान सिंह, समंदर सिंह, बलदेव सिंह, जितेंद्र कुमार ने कहा कि सोमवार को मंडी में गेहूं लेकर आए थे। यहां पर अधिकारियों की तरफ से अधिक नमी बताकर गेहूं की खरीद नहीं की गई। इसके कारण उन्हें मंडी में ही रात गुजारनी पड़ी है। अब आढ़तियों ने खरीद करने की प्रक्रिया बंद कर दी है। इससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। अगर समय रहते गेहूं का तौल कर दिया जाता तो वह घर वापस लौट सकते थे।
38 रुपये से लेकर पांच रुपये तक का किया गया है भाव तय
आढ़ती एसोसिएशन प्रधान मनोहर मेहता ने बताया कि सरकार ने एमएसपी में 38 रुपये से लेकर पांच रुपये तक लस्टर लॉस के नाम पर कटौती की है। यह कटौती किसान को वहन करनी होगी। किसान पहले ही ओलावृष्टि और बारिश के कारण परेशान है और अब लस्टर लॉस के नाम पर किसान से ही नुकसान की भरपाई करवाई जा रही है। सरकार के गोदामों में ही गेहूं पहुंचना है और सरकार की तरफ से ही खरीदा जाना है। सरकार को चाहिए की वह खुद के स्तर पर ही नुकसान को वहन करे। अलग-अलग स्लैब के अनुसार ही उसका उठान और गोदाम में पहुंचाने का कार्य करने में काफी परेशानी होगी।
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सिरसा। ओलावृष्टि और बारिश के कारण जिले की गेहूं को काफी नुकसान पहुंचा है। बारिश के कारण अपनी चमक खो चुकी गेहूं की खरीद को लेकर किसानों के समक्ष समस्या खड़ी हो गई है। सरकार ने लस्टर लॉस को लेकर छह स्लैब बनाई है। इसके तहत अलग-अलग सरकारी भाव भी तय गया है।
वहीं इसके विरोध में आढ़तियों ने मंगलवार को खरीद करने की प्रक्रिया बंद कर दी और शर्तें हटाने व गेहूं का नुकसान सरकार की ओर से खुद के स्तर पर वहन करने की मांग उठाई। इसके चलते तीसरे दिन भी किसानों की गेहूं की खरीद नहीं हो पाई।
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मंडियों में तीन दिनों से गेहूं की आवक होना शुरू हो चुकी है। मंडियों में अब तक 50 हजार क्विंटल से अधिक आवक हो गई है। बीते दिन भी लस्टर लॉस को लेकर सरकार की ओर से पत्र जारी न किए जाने के चलते व्यापारियों ने नाम मात्र ही गेहूं की खरीद की है। इसके बाद मंगलवार सुबह 10 बजे सरकार ने लस्टर लॉस संबंधित पत्र जारी किया। इसमें गेहूं की चमक व बारिक हुए दाने के अनुसार अलग-अलग गेहूं के दाम तय किए गए हैं। अलग-अलग छह स्लैबों को लेकर आढ़तियों में रोष पनप गया। आढ़तियों मार्केट कमेटी सचिव के साथ बैठक की और दोपहर एक बजे के बाद खरीद न किए जाने का ऐलान कर दिया। आढ़तियों का कहना है पहले ही मौसम की मार के कारण किसानों काफी नुकसान उठाना पड़ा है और अब लस्टर लॉस, दाना बारिक होने सहित अन्य कारण बताकर सरकार गेहूं के दाम भी कम कर रही है। आढ़तियों ने मांग उठाते हुए कहा कि सरकार की ओर से लस्टर लॉस का नुकसान वहन किया जाए । अगर इस तरह की शर्तें आढ़तियों के सामने रखी जाती है, तो वह खरीद नहीं करेंगे। आढ़ती एसोसिएशन प्रधान मनोहर मेहता ने कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से जब तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया जाता तब तक उनकी हड़ताल जारी रहेगी और खरीद प्रक्रिया बंद रहेगी ।
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सोमवार को 20955 क्विंटल गेहूं की हो पाई खरीद
जिले में तीन दिनों से गेहूं की आवक हो रही है। बीते दिन कई मंडियों में गेहूं की खरीद प्रक्रिया की गई थी। बीते दिन जिले में 20 हजार 955 क्विंटल गेहूं की खरीद हो पाई थी। मंडी में पहुंची गेहूं का गेट पास कटने के बाद आढ़तियों की ओर से उसका जे फार्म भी काट दिया गया है। लेकिन विभाग ने उसका डाटा भी पोर्टल पर अपलोड नहीं किया है। मंगलवार को नया पत्र जारी होने से आढ़तियों की परेशानी बढ़ गई है। जिले में अब तक 50 हजार क्विंटल गेहूं मंडी में ही पड़ी है। हालांकि बीत दिन खरीदी गई 20 हजार क्विंटल गेहूं का भी अभी उठान नहीं हो पाया है।
नमी बताकर अधिकारी ने खरीद रहे गेहूं
किसान करतान सिंह, समंदर सिंह, बलदेव सिंह, जितेंद्र कुमार ने कहा कि सोमवार को मंडी में गेहूं लेकर आए थे। यहां पर अधिकारियों की तरफ से अधिक नमी बताकर गेहूं की खरीद नहीं की गई। इसके कारण उन्हें मंडी में ही रात गुजारनी पड़ी है। अब आढ़तियों ने खरीद करने की प्रक्रिया बंद कर दी है। इससे उनकी परेशानी बढ़ गई है। अगर समय रहते गेहूं का तौल कर दिया जाता तो वह घर वापस लौट सकते थे।
38 रुपये से लेकर पांच रुपये तक का किया गया है भाव तय
आढ़ती एसोसिएशन प्रधान मनोहर मेहता ने बताया कि सरकार ने एमएसपी में 38 रुपये से लेकर पांच रुपये तक लस्टर लॉस के नाम पर कटौती की है। यह कटौती किसान को वहन करनी होगी। किसान पहले ही ओलावृष्टि और बारिश के कारण परेशान है और अब लस्टर लॉस के नाम पर किसान से ही नुकसान की भरपाई करवाई जा रही है। सरकार के गोदामों में ही गेहूं पहुंचना है और सरकार की तरफ से ही खरीदा जाना है। सरकार को चाहिए की वह खुद के स्तर पर ही नुकसान को वहन करे। अलग-अलग स्लैब के अनुसार ही उसका उठान और गोदाम में पहुंचाने का कार्य करने में काफी परेशानी होगी।