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Sirsa News: सिरसा में वैध की आड़ में अवैध कॉलोनियां हो रहीं विकसित
Mon, 10 Jun 2024 12:42 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 10 Jun 2024 12:42 AM IST
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शाहपुर बेगू रोड पर काटी गई अवैध कॉलोनी। फाइल फोटो
सिरसा। शहर के चारों ओर अवैध कॉलोनियां तेजी से विकसित हो रहीं हैं। प्रदेश सरकार से शहर की 25 कॉलोनियां वैध होने के बाद इन कॉलोनियों के बीच या इनसे सटे खसरा नंबरों पर अब अवैध कॉलोनियां काटने और प्लाॅटिंग का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। इस कारण अवैध कॉलोनियों की संख्या बढ़ गई है। यह खेल नगर परिषद के आलाधिकारियों से छुपा नहीं है। कई बार शहर के जागरूक लोगों की ओर से अवैध निर्माण की शिकायत की जा चुकी है लेकिन नगर निगम प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
कॉलोनाइजर नई वैध हुईं कॉलोनियों से सटी जमीन पर धीरे-धीरे कॉलोनियां काट रहे है ताकि लोगों को यकीन दिलाया जा सके कि यह क्षेत्र भी वैध कॉलोनी में शामिल हैं। हालांकि इन खसरा नंबरों पर जिला नगर योजनाकार विभाग नजर रख रहा है। ताकि अवैध रूप से कॉलोनी काट कर लोगों को गुमराह न किया जा सके। संवाद
वैध और अवैध कॉलोनियों के खसरा नंबर
1. खैरपुर क्षेत्र में
वैध - खसरा नंबर -14, 19, 20, 24, 25, 23, 32, 34, 54, 65, 72, 73, 74, 82, 83, 84
97/4 मिन, 6, 7, 8, 13, 14, 16, 17, 18, 24, 25
102/10 मिन
103/3 मिन, 4, 5, 6, 7, 8, 13, 14, 15
106/9 मिन, 10, 11/1/2 , 12, 19, 20/1/2 , 21/1/2
107/2 मिन/2, 3, 4, 6/1/2, 7/1/2, 8, 12, 13, 16, 17/2, 18, 19, 22, 23, 24, 25
110/5 मिन/2, 6/1
111/1 मिन, 10
- अवैध- खसरा नंबर 106/8 मिन/2, 9 मिन
- कंगनपुर क्षेत्र में
- वैध खसरा नंबर - 9/15, 15, 16, 18/10 मिन/1/2, 34, 35, 36, 53, 55, 56
- अवैध खसरा नंबर - 55/23 मिन/2, 24/1, 24/2, 25, 71/3/1, 3/2, 4/1, 4/2, 5, 6, 7/1, 8/1, 8/2, 39/2, 3/2, 8, 9, 12/1, 13,
-गांव शाहपुर बेगू क्षेत्र में
- वैध खसरा नंबर - 10, 11, 13, 34, 35, 36, 37, 39, 40, 41, 67, 68
- अवैध खसरा नंबर - 78/8, 9, 12, 13
- गांव खाजा खेड़ा क्षेत्र में
- वैध खसरा नंबर - 17, 19, 20, 21, 24, 25, 29, 32, 36, 38, 48, 49, 50, 51, 52, 58, 59, 60, 63, 73, 74, 75, 76, 77, 81, 82, 83, 84, 85, 86, 95, 98
- अवैध खसरा नंबर - 11/2, 13, 18/1, 19, 20/1, 26/2/2, 54/12, 78/9/2
- गांव शमशाबाद क्षेत्र में
- वैध खसरा नंबर - 102, 103, 104, 119, 120, 122, 123, 124, 132, 133
- अवैध खसरा नंबर- 120/12, 13, 14, 17, 18, 19, 22, 23, 24, 122/3, 8/1,
सिरसा क्षेत्र में
वैध - 150, 151
अवैध खसरा नंबर-- 609,
नोट - यूएलबी से प्राप्त वैध कॉलोनियों की सूची के अनुसार खसरा नंबर प्रकाशित किए गए हैं। इसकी पूरी सूची वेबसाइट पर उपलब्ध है।
आमजन और सरकार के साथ होती है धोखाधड़ी
एक अवैध काॅलोनी काटने पर आम जनता के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी होती है। सरकारी फीस में लाखों रुपये की हेराफेरी की जाती है। अवैध कॉलोनियों में लोग भले ही गरीब और मध्यम वर्ग को प्लॉट बेच जाते हैं लेकिन प्लॉट खरीदने वाले कभी मालिक नहीं बन पाता। क्योंकि कॉलोनाइजर सोसायटी का कार्ड बनाकर देते हैं। यह नाममात्र का होता है। असल में इंतकाल और जमाबंदी कॉलोनाइजर के नाम ही रह जाती है। ऐसे में कार्ड से प्लॉट खरीदने वाले लोग कॉलोनी के वैध होने तक मालिक नहीं बन सकते। पहले कई शहरों में ऐसे मामले आए हैं जब जब प्लॉट बेचने के बाद कॉलोनाइजर पार्टनरशिप तोड़कर कॉलोनी के लोगों को नोटिस भिजवा चुके हैं। कई मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।
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यह है दीनदयाल उपाध्याय योजना का मकसद
सरकार ने कॉलोनाइजरों को अवैध कॉलोनी विकसित करने से रोकने के लिए दीन दयाल उपाध्याय योजना बनाई है। इसमें कई तरह की छूट दी गई थी और फीस भी ज्यादा नहीं है। ऐसे में शहर नगर परिषद और डीटीपी दोनों जोन में इस योजना का लाभ दिया जाता है। बड़े कॉलोनाइजर गरीब और मध्यम वर्ग के अपना घर के सपनों को साकार करने के लिए इस योजना के तहत कॉलोनी विकसित कर रहे हैं। सिरसा में दो कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। तीन और विकसित होने वाली हैं।
अवैध कॉलोनियों से यह होता है नुकसान
1. जन स्वास्थ्य विभाग का सीवरेज और पेयजल लाइन सिस्टम बुरी तरह से प्रभावित होता है। क्षमता से कई गुणा ज्यादा भार सीवरेज और पेजयल सिस्टम पर पड़ता है। इससे शहर की कई साल पुरानी कॉलोनियां प्रभावित होती हैं।
2. बिजली निगम पर अतिरिक्त भार बढ़ता है। बिजली निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत से ट्रांसफार्मर लगाकर कॉलोनाइजर कॉलोनी तक बिजली पहुंचा देते हैं, जिससे शहर में अतिरिक्त लोड बढ़ जाता है।
दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत पांच कॉलोनाइजर पंजीकृत किए गए हैं। जो अपनी कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं। एक कॉलोनाइजर का आवेदन मुख्यालय भेजा गया है। अवैध कॉलोनियों पर विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
- मनीष दहिया, जिला नगर योजनाकार (डीटीपी), सिरसा।
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कॉलोनाइजर नई वैध हुईं कॉलोनियों से सटी जमीन पर धीरे-धीरे कॉलोनियां काट रहे है ताकि लोगों को यकीन दिलाया जा सके कि यह क्षेत्र भी वैध कॉलोनी में शामिल हैं। हालांकि इन खसरा नंबरों पर जिला नगर योजनाकार विभाग नजर रख रहा है। ताकि अवैध रूप से कॉलोनी काट कर लोगों को गुमराह न किया जा सके। संवाद
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वैध और अवैध कॉलोनियों के खसरा नंबर
1. खैरपुर क्षेत्र में
वैध - खसरा नंबर -14, 19, 20, 24, 25, 23, 32, 34, 54, 65, 72, 73, 74, 82, 83, 84
97/4 मिन, 6, 7, 8, 13, 14, 16, 17, 18, 24, 25
102/10 मिन
103/3 मिन, 4, 5, 6, 7, 8, 13, 14, 15
106/9 मिन, 10, 11/1/2 , 12, 19, 20/1/2 , 21/1/2
107/2 मिन/2, 3, 4, 6/1/2, 7/1/2, 8, 12, 13, 16, 17/2, 18, 19, 22, 23, 24, 25
110/5 मिन/2, 6/1
111/1 मिन, 10
- अवैध- खसरा नंबर 106/8 मिन/2, 9 मिन
- कंगनपुर क्षेत्र में
- वैध खसरा नंबर - 9/15, 15, 16, 18/10 मिन/1/2, 34, 35, 36, 53, 55, 56
- अवैध खसरा नंबर - 55/23 मिन/2, 24/1, 24/2, 25, 71/3/1, 3/2, 4/1, 4/2, 5, 6, 7/1, 8/1, 8/2, 39/2, 3/2, 8, 9, 12/1, 13,
-गांव शाहपुर बेगू क्षेत्र में
- वैध खसरा नंबर - 10, 11, 13, 34, 35, 36, 37, 39, 40, 41, 67, 68
- अवैध खसरा नंबर - 78/8, 9, 12, 13
- गांव खाजा खेड़ा क्षेत्र में
- वैध खसरा नंबर - 17, 19, 20, 21, 24, 25, 29, 32, 36, 38, 48, 49, 50, 51, 52, 58, 59, 60, 63, 73, 74, 75, 76, 77, 81, 82, 83, 84, 85, 86, 95, 98
- अवैध खसरा नंबर - 11/2, 13, 18/1, 19, 20/1, 26/2/2, 54/12, 78/9/2
- गांव शमशाबाद क्षेत्र में
- वैध खसरा नंबर - 102, 103, 104, 119, 120, 122, 123, 124, 132, 133
- अवैध खसरा नंबर- 120/12, 13, 14, 17, 18, 19, 22, 23, 24, 122/3, 8/1,
सिरसा क्षेत्र में
वैध - 150, 151
अवैध खसरा नंबर
नोट - यूएलबी से प्राप्त वैध कॉलोनियों की सूची के अनुसार खसरा नंबर प्रकाशित किए गए हैं। इसकी पूरी सूची वेबसाइट पर उपलब्ध है।
आमजन और सरकार के साथ होती है धोखाधड़ी
एक अवैध काॅलोनी काटने पर आम जनता के साथ करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी होती है। सरकारी फीस में लाखों रुपये की हेराफेरी की जाती है। अवैध कॉलोनियों में लोग भले ही गरीब और मध्यम वर्ग को प्लॉट बेच जाते हैं लेकिन प्लॉट खरीदने वाले कभी मालिक नहीं बन पाता। क्योंकि कॉलोनाइजर सोसायटी का कार्ड बनाकर देते हैं। यह नाममात्र का होता है। असल में इंतकाल और जमाबंदी कॉलोनाइजर के नाम ही रह जाती है। ऐसे में कार्ड से प्लॉट खरीदने वाले लोग कॉलोनी के वैध होने तक मालिक नहीं बन सकते। पहले कई शहरों में ऐसे मामले आए हैं जब जब प्लॉट बेचने के बाद कॉलोनाइजर पार्टनरशिप तोड़कर कॉलोनी के लोगों को नोटिस भिजवा चुके हैं। कई मामले कोर्ट में विचाराधीन हैं।
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यह है दीनदयाल उपाध्याय योजना का मकसद
सरकार ने कॉलोनाइजरों को अवैध कॉलोनी विकसित करने से रोकने के लिए दीन दयाल उपाध्याय योजना बनाई है। इसमें कई तरह की छूट दी गई थी और फीस भी ज्यादा नहीं है। ऐसे में शहर नगर परिषद और डीटीपी दोनों जोन में इस योजना का लाभ दिया जाता है। बड़े कॉलोनाइजर गरीब और मध्यम वर्ग के अपना घर के सपनों को साकार करने के लिए इस योजना के तहत कॉलोनी विकसित कर रहे हैं। सिरसा में दो कॉलोनियां विकसित हो चुकी हैं। तीन और विकसित होने वाली हैं।
अवैध कॉलोनियों से यह होता है नुकसान
1. जन स्वास्थ्य विभाग का सीवरेज और पेयजल लाइन सिस्टम बुरी तरह से प्रभावित होता है। क्षमता से कई गुणा ज्यादा भार सीवरेज और पेजयल सिस्टम पर पड़ता है। इससे शहर की कई साल पुरानी कॉलोनियां प्रभावित होती हैं।
2. बिजली निगम पर अतिरिक्त भार बढ़ता है। बिजली निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों से मिलीभगत से ट्रांसफार्मर लगाकर कॉलोनाइजर कॉलोनी तक बिजली पहुंचा देते हैं, जिससे शहर में अतिरिक्त लोड बढ़ जाता है।
दीनदयाल उपाध्याय योजना के तहत पांच कॉलोनाइजर पंजीकृत किए गए हैं। जो अपनी कॉलोनियां विकसित कर रहे हैं। एक कॉलोनाइजर का आवेदन मुख्यालय भेजा गया है। अवैध कॉलोनियों पर विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
- मनीष दहिया, जिला नगर योजनाकार (डीटीपी), सिरसा।