{"_id":"571934f94f1c1ba06e8b4ebb","slug":"hindi-story-agriculture-grain-market-sirsa","type":"story","status":"publish","title_hn":"साढ़े 26 लाख कट्टे खुले आसमां नीचे उठान के इंतजार में","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
साढ़े 26 लाख कट्टे खुले आसमां नीचे उठान के इंतजार में
ब्यूरो/अमर उजाला/सिरसा
Updated Fri, 22 Apr 2016 01:46 AM IST
विज्ञापन
अनाजमंडी
- फोटो : Bureau
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि विभाग) वीएस कुंड के आदेशों के बावजूद उठान में सुधार नहीं हुआ है। हालात यह हैं कि डबवाली में सड़कों पर गेहूं का तोल हो रहा है। यहां तक कि रामबाग भी पीले सोने से घिर गया है। गलियां जाम हो गई हैं। मौसम वैज्ञानिकों की चेतावनी के बावजूद भी प्रशासन हरकत में नहीं आया है। करीब साढ़े छब्बीस लाख बैग खुले आसमां नीचे उठान के इंतजार में पड़े हैं। सड़कों पर गेंहू पड़ा होने से रास्ते बंद हो गए है और लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस वर्ष डबवाली मार्केट कमेटी ने 27 लाख क्विंटल गेहूं की खरीद का लक्ष्य रखा है।
वीरवार शाम तक 19 लाख 49 हजार 190 क्विंटल गेहूं की खरीद रिकॉर्ड हो चुकी थी। इसमें से छह लाख 32 हजार 461 क्विंटल गेहूं का उठान हो पाया है। 26 लाख 33 हजार 418 बैग उठान के इंतजार में पड़े हैं। अनाजमंडी भरी पड़ी है। अब तक पहले दिन 13 अप्रैल को खरीद किए गए गेहूं का उठान नहीं हो सका है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अनाजमंडी से सटी सड़कों पर गेहूं का तोल हो रहा है। यहीं नहीं रामबाग भी गेहूं से घिर गया है। पब्लिक क्लब की ओर से रामबाग को आने वाली गलियों में गेहूं पहुंच चुका है। यहां तक हुडा के प्लॉटों में गेहूं के बैग उठान के इंतजार में पड़े हैं।
खरीद एजेंसी वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का कार्यालय भी गेहूं के बैग की वजह से ब्लॉक हो गया है। भारतीय खाद्य निगम कार्यालय तक किसान अपनी गेहूं लिए बोली का इंतजार कर रहे हैं। उठान की व्यवस्था न होने के कारण स्थिति इतनी जटिल हो चुकी है कि आढ़तियों के गोदाम भी फुल हो गए हैं। मजबूर होकर आढ़ती अपने किसान का गेहूं गंदगी या फिर कच्ची जगह पर उतारने को मजबूर हैे। आढ़ती गुरदीप कामरा ने बताया कि प्रशासन के पास उठान के प्रबंध नहीं है। उसकी खुद की दुकान से 13 अप्रैल का गेहूं नहीं उठा है। अनाजमंडी के दोनों ब्लॉक गेहूं से जाम हो चुके हैं। सड़कों पर अनाज मडी लग रही है।
विज्ञापन
तिरपाल की नहीं है व्यवस्था
मौसम विज्ञानी बारिश की संभावना जता चुके हैं। उनका कहना है कि शुक्रवार रात को बरसात आ सकती है। इसके बावजूद अनाजमंडी और खरीद केंद्रों पर लाखों बैग गेहूं खुले में पड़ा है। न तिरपाल की व्यवस्था और न ही कैरेट की। ऐसे में गेहूं का नुकसान होता है, तो कौन जिम्मेवार होगा? आदेश पर भी कार्रवाई नहीं कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वीएस कुंडू के आदेशों की भी जमकर धज्जियां उड़ रही हैं। कुंडू डबवाली दौर के दौरान अधिकारियों को उठान में तेजी लाने के आदेश दे चुके हैं, लेकिन आज तक उनके आदेश फलीभूत नहीं।
विज्ञापन
वीरवार शाम तक 19 लाख 49 हजार 190 क्विंटल गेहूं की खरीद रिकॉर्ड हो चुकी थी। इसमें से छह लाख 32 हजार 461 क्विंटल गेहूं का उठान हो पाया है। 26 लाख 33 हजार 418 बैग उठान के इंतजार में पड़े हैं। अनाजमंडी भरी पड़ी है। अब तक पहले दिन 13 अप्रैल को खरीद किए गए गेहूं का उठान नहीं हो सका है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि अनाजमंडी से सटी सड़कों पर गेहूं का तोल हो रहा है। यहीं नहीं रामबाग भी गेहूं से घिर गया है। पब्लिक क्लब की ओर से रामबाग को आने वाली गलियों में गेहूं पहुंच चुका है। यहां तक हुडा के प्लॉटों में गेहूं के बैग उठान के इंतजार में पड़े हैं।
विज्ञापन
खरीद एजेंसी वेयर हाउसिंग कार्पोरेशन, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का कार्यालय भी गेहूं के बैग की वजह से ब्लॉक हो गया है। भारतीय खाद्य निगम कार्यालय तक किसान अपनी गेहूं लिए बोली का इंतजार कर रहे हैं। उठान की व्यवस्था न होने के कारण स्थिति इतनी जटिल हो चुकी है कि आढ़तियों के गोदाम भी फुल हो गए हैं। मजबूर होकर आढ़ती अपने किसान का गेहूं गंदगी या फिर कच्ची जगह पर उतारने को मजबूर हैे। आढ़ती गुरदीप कामरा ने बताया कि प्रशासन के पास उठान के प्रबंध नहीं है। उसकी खुद की दुकान से 13 अप्रैल का गेहूं नहीं उठा है। अनाजमंडी के दोनों ब्लॉक गेहूं से जाम हो चुके हैं। सड़कों पर अनाज मडी लग रही है।
विज्ञापन
तिरपाल की नहीं है व्यवस्था
मौसम विज्ञानी बारिश की संभावना जता चुके हैं। उनका कहना है कि शुक्रवार रात को बरसात आ सकती है। इसके बावजूद अनाजमंडी और खरीद केंद्रों पर लाखों बैग गेहूं खुले में पड़ा है। न तिरपाल की व्यवस्था और न ही कैरेट की। ऐसे में गेहूं का नुकसान होता है, तो कौन जिम्मेवार होगा? आदेश पर भी कार्रवाई नहीं कृषि विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव वीएस कुंडू के आदेशों की भी जमकर धज्जियां उड़ रही हैं। कुंडू डबवाली दौर के दौरान अधिकारियों को उठान में तेजी लाने के आदेश दे चुके हैं, लेकिन आज तक उनके आदेश फलीभूत नहीं।
उठान में तेजी लाने के लिए खरीद एजेंसियों को कहा गया है। गेहूं कच्चे या फिर निचली जगहों पर ढेरी न हो, इसके लिए आढ़तियों को सख्त हिदायत दी हुई है। कैरेट या फिर तिरपाल की व्यवस्था भी आढ़तियों को करनी होती है। अगर नुकसान होता है तो उसके जिम्मेवार आढ़ती होंगे। -हेतराम, कार्यकारी सचिव मार्केट कमेटी, डबवाली