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Sirsa News: सियासी शब्दों की टीस...वरिष्ठ नेताओं के प्रति अमर्यादित भाषा स्वीकार्य नहीं, प्रदेश कांग्रेस कमेटी के डेलीगेट ने विधायक गोकुल सेतिया की टिप्पणी पर जताया रोष
Tue, 06 Oct 2026 11:38 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:38 PM IST
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सिरसा। विधायक गोकुल सेतिया की टिप्पणी पर कांग्रेस में विरोध के स्वर मुखर हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के डेलीगेट रतनलाल गेदर एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता तेजभान पटवारी ने टिप्पणी पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नेताओं के प्रति अमर्यादित भाषा स्वीकार्य नहीं है।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कुमारी सैलजा कई पीढ़ियों से कांग्रेस परिवार का हिस्सा हैं। उनके जीवन में पार्टी की विचारधारा गहराई से जुड़ी है। ऐसे वरिष्ठ नेता के प्रति टिप्पणी से कार्यकर्ताओं में रोष है। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में गोकुल सेतिया ने कुमारी सैलजा का विरोध करते हुए इनेलो उम्मीदवार का समर्थन किया था।
इसके बावजूद सैलजा ने सिरसा विधानसभा क्षेत्र से करीब 12,500 मतों की बढ़त हासिल की। बाद में कांग्रेस में शामिल होने पर पार्टी ने सेतिया को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया और कार्यकर्ताओं के सहयोग से वह विधायक बने।
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रतनलाल गेदर व तेजभान पटवारी ने आरोप लगाया कि विधायक बनने के बाद सेतिया पार्टी की परंपराओं के अनुरूप नहीं चल रहे। नगर परिषद चेयरमैन चुनाव में भी वरिष्ठ नेताओं से सलाह नहीं ली गई। उनके समर्थित उम्मीदवार को हार मिली। उन्होंने बताया कि चौधरी बीरेंद्र सिंह को पर्यवेक्षक बनाए जाने में कुमारी सैलजा की कोई भूमिका नहीं है।
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कांग्रेस नेताओं ने कहा कि कुमारी सैलजा कई पीढ़ियों से कांग्रेस परिवार का हिस्सा हैं। उनके जीवन में पार्टी की विचारधारा गहराई से जुड़ी है। ऐसे वरिष्ठ नेता के प्रति टिप्पणी से कार्यकर्ताओं में रोष है। उन्होंने कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में गोकुल सेतिया ने कुमारी सैलजा का विरोध करते हुए इनेलो उम्मीदवार का समर्थन किया था।
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इसके बावजूद सैलजा ने सिरसा विधानसभा क्षेत्र से करीब 12,500 मतों की बढ़त हासिल की। बाद में कांग्रेस में शामिल होने पर पार्टी ने सेतिया को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया और कार्यकर्ताओं के सहयोग से वह विधायक बने।
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रतनलाल गेदर व तेजभान पटवारी ने आरोप लगाया कि विधायक बनने के बाद सेतिया पार्टी की परंपराओं के अनुरूप नहीं चल रहे। नगर परिषद चेयरमैन चुनाव में भी वरिष्ठ नेताओं से सलाह नहीं ली गई। उनके समर्थित उम्मीदवार को हार मिली। उन्होंने बताया कि चौधरी बीरेंद्र सिंह को पर्यवेक्षक बनाए जाने में कुमारी सैलजा की कोई भूमिका नहीं है।