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Sirsa News: एशियन यूथ गेम्स में हर्षित को कांस्य पदक
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सिरसा।बहरीन में आयोजित प्रतियोगिता के दौरान मौजूद हर्षित। कोच
सिरसा। जिले के जूडो खिलाड़ी हर्षित ने बहरीन में आयोजित तीसरी एशियन यूथ गेम्स - 2025 में शानदार प्रदर्शन करते हुए वीरवार को 73 किलो भारवर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत को जूडो में पहला पदक दिलाया है। इस ऐतिहासिक उपलब्धि से न केवल सिरसा बल्कि पूरे प्रदेश और देश का नाम रोशन हुआ है।
हर्षित ने जॉर्डन के खिलाड़ी को हराकर यह पदक अपने नाम किया और साथ ही आगामी 2026 यूथ ओलंपिक के लिए क्वालीफाई भी कर लिया है। हर्षित की मां अर्चना खुद एक कुशल जूडो कोच हैं, जिन्होंने बचपन से ही बेटे को खेल के प्रति अनुशासन, मेहनत और समर्पण का पाठ पढ़ाया। अर्चना ने बताया कि हर्षित की यह उपलब्धि उसकी निरंतर लगन और कठिन प्रशिक्षण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बेटे ने सिरसा के साथ-साथ देश का नाम ऊंचा किया है और अब उसका अगला लक्ष्य यूथ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।
शहीद भगत सिंह स्टेडियम में खुशी का माहौल
हर्षित की इस सफलता पर साथी खिलाड़ियों ने मिठाइयां बांटकर उसकी जीत का जश्न मनाया। जूडो फेडरेशन ऑफ हरियाणा और जिला खेल अधिकारी ने भी हर्षित को बधाई दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। फेडरेशन के सदस्यों ने कहा कि यह पदक न केवल हर्षित की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि हरियाणा के खेल इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि हर्षित जैसे युवा खिलाड़ियों से प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी प्रेरणा लेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करेंगे।
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यूथ ओलंपिक के लिए क्वालीफाई
हर्षित की इस जीत का एक और बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने 2026 में होने वाले यूथ ओलंपिक के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली है। अब उनका लक्ष्य वहां भारत को स्वर्ण पदक दिलाना है। वह आने वाले समय में और मेहनत करेंगे ताकि देश का तिरंगा अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऊंचा लहरा सके। हर्षित की इस सफलता पर पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है। लोगों ने सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं दीं और कहा कि सिरसा का यह बेटा आने वाले वर्षों में भारत के लिए कई और पदक लेकर आएगा।
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मां ने ही दिया प्रशिक्षण
हर्षित ने अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उसके लिए एक सपने के सच होने जैसा है। उसने कहा मैंने इस जीत के लिए कई वर्षों तक कठोर परिश्रम किया है। मेरे इस सफर में मेरी मां, कोच अर्चना, सिरसा स्टेडियम के जूडो खिलाड़ियों, जूडो फेडरेशन ऑफ हरियाणा और इंडिया के सदस्यों, देशभर के जूडो जानकारों और स्कूल अध्यापकों का सहयोग और मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण रहा।
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हर्षित ने जॉर्डन के खिलाड़ी को हराकर यह पदक अपने नाम किया और साथ ही आगामी 2026 यूथ ओलंपिक के लिए क्वालीफाई भी कर लिया है। हर्षित की मां अर्चना खुद एक कुशल जूडो कोच हैं, जिन्होंने बचपन से ही बेटे को खेल के प्रति अनुशासन, मेहनत और समर्पण का पाठ पढ़ाया। अर्चना ने बताया कि हर्षित की यह उपलब्धि उसकी निरंतर लगन और कठिन प्रशिक्षण का परिणाम है। उन्होंने कहा कि बेटे ने सिरसा के साथ-साथ देश का नाम ऊंचा किया है और अब उसका अगला लक्ष्य यूथ ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतना है।
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शहीद भगत सिंह स्टेडियम में खुशी का माहौल
हर्षित की इस सफलता पर साथी खिलाड़ियों ने मिठाइयां बांटकर उसकी जीत का जश्न मनाया। जूडो फेडरेशन ऑफ हरियाणा और जिला खेल अधिकारी ने भी हर्षित को बधाई दी और भविष्य के लिए शुभकामनाएं दीं। फेडरेशन के सदस्यों ने कहा कि यह पदक न केवल हर्षित की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि हरियाणा के खेल इतिहास में एक प्रेरणादायक अध्याय जोड़ेगा। उन्होंने कहा कि हर्षित जैसे युवा खिलाड़ियों से प्रदेश के अन्य खिलाड़ी भी प्रेरणा लेंगे और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन करेंगे।
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यूथ ओलंपिक के लिए क्वालीफाई
हर्षित की इस जीत का एक और बड़ा पहलू यह है कि उन्होंने 2026 में होने वाले यूथ ओलंपिक के लिए भी अपनी जगह पक्की कर ली है। अब उनका लक्ष्य वहां भारत को स्वर्ण पदक दिलाना है। वह आने वाले समय में और मेहनत करेंगे ताकि देश का तिरंगा अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऊंचा लहरा सके। हर्षित की इस सफलता पर पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है। लोगों ने सोशल मीडिया पर शुभकामनाएं दीं और कहा कि सिरसा का यह बेटा आने वाले वर्षों में भारत के लिए कई और पदक लेकर आएगा।
मां ने ही दिया प्रशिक्षण
हर्षित ने अपनी सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उसके लिए एक सपने के सच होने जैसा है। उसने कहा मैंने इस जीत के लिए कई वर्षों तक कठोर परिश्रम किया है। मेरे इस सफर में मेरी मां, कोच अर्चना, सिरसा स्टेडियम के जूडो खिलाड़ियों, जूडो फेडरेशन ऑफ हरियाणा और इंडिया के सदस्यों, देशभर के जूडो जानकारों और स्कूल अध्यापकों का सहयोग और मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण रहा।

सिरसा।बहरीन में आयोजित प्रतियोगिता के दौरान मौजूद हर्षित। कोच