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ज्यादा कीटनाशक के इस्तेमाल हरी सब्जियां हुईं जहरीली

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 Sep 2022 11:39 PM IST
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Green vegetables become poisonous after use of more pesticides
गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला में जांच अनाज व सब्जियों की जांच करते एक्सपर्ट। संवाद - फोटो : Sirsa
बलविंद्र स्वामी
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सिरसा। कहा जाता है कि हरी सब्जियां स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, लेकिन पेस्टीसाइड युक्त हरी सब्जियां हानिकारक सिद्ध हो सकती है। बागवानी विभाग की लैब में की गई जांच में खुलासा हुआ है कि हरी सब्जियों में जहर है। विभाग ने दो वर्ष 940 सैंपल लिए, जिनमें से 55 सैंपल की रिपोर्ट फेल आई है। इस बार प्याज के सैंपल फेल हुए, तो वहीं बीते वर्ष आलू, भिंडी व धान में रसायन की मात्रा पाई गई। वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि यदि लंबे समय तक खतरनाक रसायन युक्त सब्जियों का सेवन किया जाए तो इससे लीवर और किडनी डैमेज भी हो सकते हैं।
सिरसा में बागवानी विभाग में पिछले वर्ष सिरसा, फतेहाबाद और हिसार जिलों से लाए गए सब्जियों और फलों के 500 सैंपल की जांच की गई। इसमें दौरान 35 सैंपल फेल पाए गए। इस वर्ष भी छह जिलों की सब्जियों के 440 सैंपल की जांच की गई। इनमें अब तक 20 सैंपल की रिपोर्ट फेल है। इनमें से चरखी दादरी में सबसे अधिक पांच सैंपल फेल पाए हैं। इसी प्रकार भिवानी में दो, फतेहाबाद 2, हिसार 1, रोहतक 1 व सिरसा में 3 सैंपल फेल हुए हैं। लैब के पास 11 जिलों की जिम्मेदारी है। इस दौरान करीब 2700 सैंपल लिए जाने हैं, जिसकी प्रक्रिया अभी भी जारी है।
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जिला में हुए सैंपल फेल
सिरसा जिले से वर्ष 2021 में 14 सैंपल लिए गए, जिनमें से सिरसा ब्लाक के 4 सैंपल फेल पाए गए। इसी प्रकार नाथूसरी चोपटा में 4, ऐलनाबाद में 2, डबवाली 1, ओढ़ां 1 व रानियां में 2 सैंपल फेल हो गए।
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इन 11 जिलों से लिए जा रहे सैंपल
जिला गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला सिरसा की ओर से राज्य के 11 जिलों से फल व सब्जियों के सैंपल लिए जा रहे है। प्रत्येक जिले से 270 सैंपल एकत्रित होंगे। अगस्त से सैंपल प्रक्रिया शुरू कर दी गई जो आगामी वर्ष मार्च तक चलेगी। इनमें रेवाड़ी, रोहतक, भिवानी, चरखी दादरी, जींद, कैथल, महेंद्रगढ़, झज्जर, हिसार, फतेहाबाद व सिरसा शामिल है।
उपभोक्ता बोले : खुद के पैसे खर्च कर खरीद रहे बीमारी
जिस प्रकार से बाजार में सब्जियां व फल मिल रहे हैं ऐसे में यह अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता कि कौन सी सब्जी व फल खाने के लायक है। हम तो एक तरह से पैसे खर्च कर बीमारी खरीद रहे हैं। प्रशासन व सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए और जिन जगहों पर सब्जियां व फल जहरीले पाए जा रहे हैं उन पर बैन कर देना चाहिए। इसके अलावा उन उत्पादकों के नाम भी उजागर करना चाहिए, ताकि लोग सजग रहे। - संजू रानी, उपभोक्ता
आम लोगों को यह जानकारी नहीं होती कि कौन सी सब्जियां व फल जहरीले होंगे। न ही इन पर कोई निशान लगा होता जिससे पहचान की जा सके। बाजार में हर जगह पर सब्जियां व फल बिक रहे हैं। हरी सब्जियां व फल तो चिकित्सक भी स्वास्थ्य खराब होने व स्वस्थ रहने के लिए लोगों को सलाह देते हैं लेकिन इस प्रकार की जहरीली सब्जियां बाजार में बिक रही है तो लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। - कुसुम रानी, उपभोक्ता
पिछले वर्ष तीन जिलों से करीब 500 सैंपल लिए जिनमें से 35 सैंपल फेल हुए। इसी प्रकार इस बार 440 सैंपल 6 जिलों से लिए गए हैं। उनमें भी 20 सैंपल फेल हुए हैं। जांच के दौरान इनमें कीटनाशक की मात्रा अधिक पाई गई। इस बार प्याज के सैंपल फेल हुए, तो वहीं बीते वर्ष कुछ आलू, भिंडी व धान में रसायनिक की मात्रा पाई गई। अभी तक केवल हमारे विभाग की टीम खेतों में जाकर सैंपल लेती है लेकिन जब लोग खुद चलकर प्रयोगशाला में जांच के लिए आएंगे तब जागरूकता आएगी। किसानों को इसके लिए जागरूक होना पड़ेगा और अत्यधिक कीटनाशक का प्रयोग बंद करना होगा ताकि इस प्रकार की समस्या न आए। -डॉ. दीक्षा तिन्ना, गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला अधिकारी।
अमूमन सब्जियों व फलों में जहर की मात्रा केवल इनके छिलकों पर ही होती है। किसी भी कीटनाशक का इस्तेमाल करने के बाद उसके प्रभाव का एक निर्धारित समय होता है, जो एक सप्ताह या इससे अधिक समय बाद समाप्त हो जाता है। वैसे भी पौधे जड़ों के माध्यम से जरूरी उर्वरक ग्रहण करते हैं, लेकिन जड़ों से जहर उनमें प्रवेश नहीं कर पाते। ऐसे में उनका छिलका तथा साफ करने के बाद उपयोग में लाया जा सकता है। अगर किसी भी फल व सब्जी में रसायन की मात्रा पाई जाती है तो उसी किसी भी तरह से नहीं नष्ट किया जा सकता। गुणवत्ता जांच प्रयोगशाला में किस आधार पर सैंपल फेल दिखाए हैं यह तो उनकी रिपोर्ट के आधार पर ही बताया जा सकता है। - डॉ. विनिता राजपूत, जिला विस्तार विशेषज्ञ कृषि विभाग केंद्र सिरसा।

डॉक्टर बोले : लंबे समय तक सेवन कर सकता है नुकसान
यदि पेस्टीसाइड युक्त सब्जियों और फलों का सेवन लंबे समय तक किया जाए तो इसके स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ते हैं। करीब 20-20 वर्ष के बाद लगातार सेवन से किडनी और लीवर भी डैमेज होने का खतरा बना रहता है। लंबे समय तक जहर पेट में जमा होता रहता है और बाद में ये अपना प्रभाव दिखाना शुरू करता है। यदि भूख कम लगती हो, वजन बढ़ रहा हो और ब्लड प्रेशर ज्यादा हो तो सतर्क हो जाना चाहिए, तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। यदि इस स्थिति से बचना है तो इसका उपाय है। यदि फल-सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले गर्म पानी में 15 से 20 मिनट तक भिगोकर रख दें तो काफी मात्रा में पेस्टीसाइड का जहर निकलने की उम्मीद रहती है। - डॉ. भंवर लाल, सिरसा।
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