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Sirsa News: पराली जलाने के मामले में किसान नामजद, चार किसानों पर हो चुकी एफआईआर
Sat, 26 Oct 2024 01:59 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sat, 26 Oct 2024 01:59 AM IST
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सिरसा। रानियां के गांव बणी में शुक्रवार को पराली जलाने का मामला दर्ज हुआ है। पिछले वर्ष नवंबर में पराली जलाने के अधिक सामने आए थे। इस कारण जिला प्रशासन इस बार दिवाली से पहले ही सतर्क हो चुका है लेकिन पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल 50 आधी घटनाओं की सूचना मिली है। हालांकि इस बार दर्ज हो चुकी दो एफआईआर में चार किसानों के नामजद होने की कार्रवाई पिछले वर्ष से अधिक है।
कृषि अधिकारी पंकज कुमार, पटवारी सुनील कुमार और ग्राम सचिव भीम सैन ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 24 अक्तूबर की रात करीब 10:30 बजे राजेंद्र मील के खेत में रखे धान के भूसे में आग लगाई गई थी। जांच के दौरान मौके पर आगजनी के अवशेष मिलने पर मामला करीवाला पुलिस चौकी तक पहुंचा। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
तीन महिलाओं पर पहले भी दर्ज हो चुके मामले
पराली जलाने पर सरकार से प्रतिबंध लगने के बावजूद इस प्रकार के मामलों का लगातार सामने आना चिंता का विषय बना हुआ है। इससे पहले भी पराली जलाने का एक मामला सामने आया था, जिसमें एक एकड़ भूमि की हिस्सेदार तीन महिलाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
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पिछले साल भी नवंबर में बढ़े थे मामले
वर्ष 2023 के अक्तूबर में मिलीं 35 सूचनाओं में से 14 सूचनाएं सही मिली थीं।
वर्ष 2023 एफआईआर - 1
वर्ष 2024 में 25 अक्तूबर तक 16 सूचनाएं मिलीं। इनमें से सात सूचनाएं सही पाई गई हैं।
वर्ष 2024 एफआईआर - 2
मेरी फसल मेरा ब्योरा आधार पर मालिकों पर दर्ज हो रहे मामले
गांवों में पराली जलाने के मामले में पटवारी फर्द और इंतकाल के आधार पर खेत मालिक का पता लगाते है। कृषि विभाग संबंधित खसरा नंबर से मेरी फसल मेरा ब्योरा का डाटा उठाता है। इसके बाद ही संबंधित भूमि के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया जाता है। मेरी फसल मेराब्योरा मौजूदा समय में बेहद कारगर साबित हो रहा है। एफआईआर के साथ साथ दो साल के लिए लाल लकीर किसानों के लिए ज्यादा खतरनाक हो गई। इस कारण किसान दो साल तक एमएसपी पर कोई फसल नहीं बेच सकेगा।
बिना ठेके या पट्टे पर भूमि देने वाले मालिक डरे
बड़े भूमि मालिक या सरकार कर्मचारी अपनी भूमि को हिस्से, ठेके और पट्टे पर देते हैं। इस दौरान वह आयकर की बचत करने के कारण कोई अनुबंध नहीं करते। फसल बेचकर जे फार्म अपने दस्तावेजों में लगाते हैं। इन सभी भूमि मालिकों के लिए सरकार के नये कानून सरदर्द बन गए हैं। बिना अनुबंध पर भूमि पर बिजाई करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोई मामला सरकार दर्ज नहीं कर सकती। क्योंकि मेरी फसल मेरा ब्योरा और फर्द से डाटा उठाते है। इसमें असल मालिक पर ही एफआईआर दर्ज होती है। इसलिए किसान स्वयं भी निगरानी कर रहे है कि कोई शरारती तत्व पराली में आग न लगा दे।
ठेके और पट्टे पर भूमि लेने वाले किसानों को होगा फायदा
सरकार के सख्त कदम का फायदा ठेके या पट्टे पर भूमि लेने वाले किसानों को होगा। पराली जलाने पर बनाए नये नियम के बाद अब पट्टे या ठेके पर देने वाला किसान या व्यक्ति अपना सालाना अनुबंध करवाएगा। अभी बिना अनुबंध किसानों को फसल बीमा और सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था। वह लाभ मालिक लेता था। नुकसान खेतिहर किसान को भुगतना पड़ता था। अनुबंध होने पर ऐसा नहीं होगा और पट्टे पर लेने वाला किसान सुरक्षित हो जाएगा।
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कृषि अधिकारी पंकज कुमार, पटवारी सुनील कुमार और ग्राम सचिव भीम सैन ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 24 अक्तूबर की रात करीब 10:30 बजे राजेंद्र मील के खेत में रखे धान के भूसे में आग लगाई गई थी। जांच के दौरान मौके पर आगजनी के अवशेष मिलने पर मामला करीवाला पुलिस चौकी तक पहुंचा। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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तीन महिलाओं पर पहले भी दर्ज हो चुके मामले
पराली जलाने पर सरकार से प्रतिबंध लगने के बावजूद इस प्रकार के मामलों का लगातार सामने आना चिंता का विषय बना हुआ है। इससे पहले भी पराली जलाने का एक मामला सामने आया था, जिसमें एक एकड़ भूमि की हिस्सेदार तीन महिलाओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।
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पिछले साल भी नवंबर में बढ़े थे मामले
वर्ष 2023 के अक्तूबर में मिलीं 35 सूचनाओं में से 14 सूचनाएं सही मिली थीं।
वर्ष 2023 एफआईआर - 1
वर्ष 2024 में 25 अक्तूबर तक 16 सूचनाएं मिलीं। इनमें से सात सूचनाएं सही पाई गई हैं।
वर्ष 2024 एफआईआर - 2
मेरी फसल मेरा ब्योरा आधार पर मालिकों पर दर्ज हो रहे मामले
गांवों में पराली जलाने के मामले में पटवारी फर्द और इंतकाल के आधार पर खेत मालिक का पता लगाते है। कृषि विभाग संबंधित खसरा नंबर से मेरी फसल मेरा ब्योरा का डाटा उठाता है। इसके बाद ही संबंधित भूमि के मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया जाता है। मेरी फसल मेराब्योरा मौजूदा समय में बेहद कारगर साबित हो रहा है। एफआईआर के साथ साथ दो साल के लिए लाल लकीर किसानों के लिए ज्यादा खतरनाक हो गई। इस कारण किसान दो साल तक एमएसपी पर कोई फसल नहीं बेच सकेगा।
बिना ठेके या पट्टे पर भूमि देने वाले मालिक डरे
बड़े भूमि मालिक या सरकार कर्मचारी अपनी भूमि को हिस्से, ठेके और पट्टे पर देते हैं। इस दौरान वह आयकर की बचत करने के कारण कोई अनुबंध नहीं करते। फसल बेचकर जे फार्म अपने दस्तावेजों में लगाते हैं। इन सभी भूमि मालिकों के लिए सरकार के नये कानून सरदर्द बन गए हैं। बिना अनुबंध पर भूमि पर बिजाई करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कोई मामला सरकार दर्ज नहीं कर सकती। क्योंकि मेरी फसल मेरा ब्योरा और फर्द से डाटा उठाते है। इसमें असल मालिक पर ही एफआईआर दर्ज होती है। इसलिए किसान स्वयं भी निगरानी कर रहे है कि कोई शरारती तत्व पराली में आग न लगा दे।
ठेके और पट्टे पर भूमि लेने वाले किसानों को होगा फायदा
सरकार के सख्त कदम का फायदा ठेके या पट्टे पर भूमि लेने वाले किसानों को होगा। पराली जलाने पर बनाए नये नियम के बाद अब पट्टे या ठेके पर देने वाला किसान या व्यक्ति अपना सालाना अनुबंध करवाएगा। अभी बिना अनुबंध किसानों को फसल बीमा और सरकार की योजनाओं का लाभ नहीं मिलता था। वह लाभ मालिक लेता था। नुकसान खेतिहर किसान को भुगतना पड़ता था। अनुबंध होने पर ऐसा नहीं होगा और पट्टे पर लेने वाला किसान सुरक्षित हो जाएगा।