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Sirsa News: इंद्रजीत कौर के प्रयास से ऊंचाइयां छू रहीं बेटियां, कोई बैंककर्मी तो कोई सरकारी नौकरी में
Wed, 02 Apr 2025 11:45 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Wed, 02 Apr 2025 11:45 PM IST
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प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर सैनी
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रानियां की प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर सैनी बीते 12 वर्ष से जरूरतमंद विद्यार्थियों का सहयोग कर रहीं हैं। उनका प्रयास है कि पढ़ाई के दौरान जिन परिस्थितियों से वह खुद गुजरीं उनसे दूसरी बच्चियों को न गुजरना पड़े। इसलिए वह जरूरतमंद बच्चों की फीस भरने, किताबें देने, वर्दी, जर्सी, जूते, स्टेशनरी देकर हर प्रकार से सहयोग कर रहीं हैं। इसकी बदौलत उनकी एक छात्रा पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं तो दूसरी बैंक में ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में भर्ती हुई हैं।
प्रिंसिपल इंद्रजीत पहले लंबे समय तक इसी स्कूल में इतिहास प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रहीं। तब उन्होंने स्कूल के तीन-चार शिक्षकों के साथ मिलकर समूह बनाया। स्कूल में जो विद्यार्थी बिना वर्दी, बिना किताबों, जूतों के आते या फीस भरने में असमर्थ रहते उनसे वह अकेले में बातचीत कर उनकी समस्या जानतीं और फिर बिना किसी को सूचना दिए संबंधित विद्यार्थियों की सहायता करतीं। अगर किसी अन्य विद्यार्थी को पढ़ाई से संबंधित कोई भी परेशानी आने पर वह उनकी भी सहायता का प्रयास करतीं हैं।
इंद्रजीत ने बताया कि 12 वर्ष में वह 200 से अधिक विद्यार्थियों की सहायता कर चुकी हैं। उनसे पढ़े हुए विद्यार्थी सरकारी नौकरियां भी प्राप्त कर चुके हैं। चार माह पहले ही पदोन्नति के बाद वह स्कूल की प्रिंसिपल बनीं हैं।
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बेटियों को पढ़ाने के लिए करती हैं विशेष प्रयास
प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर सैनी ने बताया कि उनका मायका ऐलनाबाद के संतोखपुरा में है। उन्होंने अपनी प्राथमिक पढ़ाई धर्मपुरा गांव में की। तब रास्ता कच्चा था और वह साइकिल से पढ़ाई करने के लिए दूसरे गांव में अकेली जाती थी। उस समय कम लड़कियां पढ़तीं थीं। प्राथमिक शिक्षा पूरी होने के बाद परिजनों ने अगली कक्षा की पढ़ाई करवाने से इन्कार कर दिया। इस दौरान वह भी पढ़ाई छोड़ने की सोचने लगी थी। तब उनके शिक्षक राय सिंह ने उनका सहयोग किया और उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए परिजनों को मनाया। इसके बाद जीवननगर काॅलेज में पढ़ाई करनी थी। तब भी परिजनों ने उन्हें घर से दूर न भेजने की बात कही। इसके बाद इतिहास प्रवक्ता सरदार सूबे सिंह शर्मा ने उन्हें प्रेरित किया और उनके परिजनों से बात की तो वे मान गए। आने-जाने के लिए भी एक शिक्षिका ने परिजनों के समक्ष उनकी जिम्मेदारी उठाई। इसी कारण वह बच्चियों को पढ़ाने में विशेष ध्यान देती हैं ताकि किसी भी कारण से बच्चियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
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बच्चियों के दाखिले के लिए पहले ही बनाई शिक्षकों की टीमें
प्रिंसिपल बनने के बाद उन्होंने पहले ही शिक्षकों की टीमें बनाकर वार्डों में भेजा ताकि अभिभावक अपने बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाएं और बच्चियों को पढ़ा सके। बच्चों को किताबें मुहिया करवाने के लिए उन्होंने बुक बैंक बनाया है। जरूरतमंदों की सहायता करने के साथ ही वह रोज महिलाओं को रानियां के ऊधम सिंह पार्क में योगाभ्यास भी करवाती हैं ताकि लोगों को स्वस्थ रखा जा सके।
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सिरसा। राजकीय कन्या वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय रानियां की प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर सैनी बीते 12 वर्ष से जरूरतमंद विद्यार्थियों का सहयोग कर रहीं हैं। उनका प्रयास है कि पढ़ाई के दौरान जिन परिस्थितियों से वह खुद गुजरीं उनसे दूसरी बच्चियों को न गुजरना पड़े। इसलिए वह जरूरतमंद बच्चों की फीस भरने, किताबें देने, वर्दी, जर्सी, जूते, स्टेशनरी देकर हर प्रकार से सहयोग कर रहीं हैं। इसकी बदौलत उनकी एक छात्रा पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में लिपिक के पद पर कार्यरत हैं तो दूसरी बैंक में ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के रूप में भर्ती हुई हैं।
प्रिंसिपल इंद्रजीत पहले लंबे समय तक इसी स्कूल में इतिहास प्रवक्ता के पद पर कार्यरत रहीं। तब उन्होंने स्कूल के तीन-चार शिक्षकों के साथ मिलकर समूह बनाया। स्कूल में जो विद्यार्थी बिना वर्दी, बिना किताबों, जूतों के आते या फीस भरने में असमर्थ रहते उनसे वह अकेले में बातचीत कर उनकी समस्या जानतीं और फिर बिना किसी को सूचना दिए संबंधित विद्यार्थियों की सहायता करतीं। अगर किसी अन्य विद्यार्थी को पढ़ाई से संबंधित कोई भी परेशानी आने पर वह उनकी भी सहायता का प्रयास करतीं हैं।
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इंद्रजीत ने बताया कि 12 वर्ष में वह 200 से अधिक विद्यार्थियों की सहायता कर चुकी हैं। उनसे पढ़े हुए विद्यार्थी सरकारी नौकरियां भी प्राप्त कर चुके हैं। चार माह पहले ही पदोन्नति के बाद वह स्कूल की प्रिंसिपल बनीं हैं।
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बेटियों को पढ़ाने के लिए करती हैं विशेष प्रयास
प्रिंसिपल इंद्रजीत कौर सैनी ने बताया कि उनका मायका ऐलनाबाद के संतोखपुरा में है। उन्होंने अपनी प्राथमिक पढ़ाई धर्मपुरा गांव में की। तब रास्ता कच्चा था और वह साइकिल से पढ़ाई करने के लिए दूसरे गांव में अकेली जाती थी। उस समय कम लड़कियां पढ़तीं थीं। प्राथमिक शिक्षा पूरी होने के बाद परिजनों ने अगली कक्षा की पढ़ाई करवाने से इन्कार कर दिया। इस दौरान वह भी पढ़ाई छोड़ने की सोचने लगी थी। तब उनके शिक्षक राय सिंह ने उनका सहयोग किया और उनकी पढ़ाई जारी रखने के लिए परिजनों को मनाया। इसके बाद जीवननगर काॅलेज में पढ़ाई करनी थी। तब भी परिजनों ने उन्हें घर से दूर न भेजने की बात कही। इसके बाद इतिहास प्रवक्ता सरदार सूबे सिंह शर्मा ने उन्हें प्रेरित किया और उनके परिजनों से बात की तो वे मान गए। आने-जाने के लिए भी एक शिक्षिका ने परिजनों के समक्ष उनकी जिम्मेदारी उठाई। इसी कारण वह बच्चियों को पढ़ाने में विशेष ध्यान देती हैं ताकि किसी भी कारण से बच्चियों की पढ़ाई प्रभावित न हो।
बच्चियों के दाखिले के लिए पहले ही बनाई शिक्षकों की टीमें
प्रिंसिपल बनने के बाद उन्होंने पहले ही शिक्षकों की टीमें बनाकर वार्डों में भेजा ताकि अभिभावक अपने बच्चों का स्कूल में दाखिला करवाएं और बच्चियों को पढ़ा सके। बच्चों को किताबें मुहिया करवाने के लिए उन्होंने बुक बैंक बनाया है। जरूरतमंदों की सहायता करने के साथ ही वह रोज महिलाओं को रानियां के ऊधम सिंह पार्क में योगाभ्यास भी करवाती हैं ताकि लोगों को स्वस्थ रखा जा सके।