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Sirsa News: रैंबो और शेरू से नहीं बच पाएंगे मादक पदार्थों की तस्करी करने वाले
Thu, 06 Jun 2024 12:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Thu, 06 Jun 2024 12:39 AM IST
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रैंबो और शेरू के साथ पुलिसकर्मी।
डबवाली। पुलिस जिला डबवाली अब मादक पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए रैंबो और शेरू की मदद लेगी। रैंबो और शेरू यानि डॉग स्क्वायड। इन दोनों की मदद जिले के साथ लगते राजस्थान और पंजाब की सीमा पर मादक पदार्थ की तस्करी रोकने में की जाएगी। पुलिस प्रवक्ता डबवाली ने बताया कि यह पूरी कवायद पुलिस महानिदेशक के निर्देशों पर की जा रही है।
उन्होंने बताया कि डबवाली पुलिस में दो डॉग स्क्वायड (खोजी कुत्ता) जो कि लेब्राडोर नस्ल के हैं। दोनों को नारकोटिक्स (मादक पदार्थ) तस्करी करने वालों को काबू करने की ट्रेनिंग दी गई। इनकी ट्रैनिंग आईटीबीपी भानू पंचकूला (राष्ट्रीय स्वान प्रशिक्षण केंद्र) में हुई। इस ट्रैनिंग में शेरू और रैंबो को नारकोटिक्स (मादक पदार्थ) की पता लगाने का प्रशिक्षण दिया गया है।
वहीं पुलिस जिला डबवाली एसपी ने बताया कि दोनों कुत्तों को वाहनों, इमारत, सामान और जमीन के अंदर गड्ढे खोदकर छुपाए गए नशीले पदार्थों को खोजने की विशेष तरह की ट्रेनिंग दी गई है। बता दें कि आईटीबीपी भानू पंचकूला पूरे देश में पुलिस डॉग ट्रैनिंग सेंटर में से एक है। रैंबो और शेरू को को मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर के डाइट चार्ट के अनुसार फीड दिया जाता है। रैंबो और शेरू ऑल इंडिया डॉग यूनिट के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने बताया कि इनके नियंत्रण के लिए मुख्य सिपाही सतबीर, सिपाही दीपक तथा सहायक डॉग हैंडलर सिपाही जरनैल सिंह को नियुक्त किया गया है। तीनों कर्मियों को 6-6 महीने की स्पेशल ट्रैनिंग आईटीबीपी भानू में करवाई गई है।
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दो दिन पूर्व ही लाए गए डबवाली
दोनों कुत्तों को ट्रेनिंग के बाद सोमवार 3 जून को लाया गया है। डबवाली को पुलिस जिला नशे को जड़ से खत्म करने को लेकर बनाया था। क्योंकि पंजाब और राजस्थान दोनों के बॉर्डर पर होने के कारण बड़े स्तर पर नशीले पदार्थ की सप्लाई होती है। जिनमें मुख्य रूप से अफीम, डोडा पोस्त, हेरोइन, गांजा, चरस आदि शामिल हैं। इसलिए डबवाली पुलिस प्रशासन ने मुख्यालय से मांग की थी कि उन्हें डॉग टीम स्क्वायड की विशेष जरूरत है। ताकि नशे के कारोबार को पूरी तरह से जड़ से खत्म किया जा सके। बॉर्डर एरिया में नशा तस्करी को रोकने में इन डॉग का अहम रोल रहने वाला है।
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उन्होंने बताया कि डबवाली पुलिस में दो डॉग स्क्वायड (खोजी कुत्ता) जो कि लेब्राडोर नस्ल के हैं। दोनों को नारकोटिक्स (मादक पदार्थ) तस्करी करने वालों को काबू करने की ट्रेनिंग दी गई। इनकी ट्रैनिंग आईटीबीपी भानू पंचकूला (राष्ट्रीय स्वान प्रशिक्षण केंद्र) में हुई। इस ट्रैनिंग में शेरू और रैंबो को नारकोटिक्स (मादक पदार्थ) की पता लगाने का प्रशिक्षण दिया गया है।
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वहीं पुलिस जिला डबवाली एसपी ने बताया कि दोनों कुत्तों को वाहनों, इमारत, सामान और जमीन के अंदर गड्ढे खोदकर छुपाए गए नशीले पदार्थों को खोजने की विशेष तरह की ट्रेनिंग दी गई है। बता दें कि आईटीबीपी भानू पंचकूला पूरे देश में पुलिस डॉग ट्रैनिंग सेंटर में से एक है। रैंबो और शेरू को को मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर के डाइट चार्ट के अनुसार फीड दिया जाता है। रैंबो और शेरू ऑल इंडिया डॉग यूनिट के अंतर्गत आते हैं। उन्होंने बताया कि इनके नियंत्रण के लिए मुख्य सिपाही सतबीर, सिपाही दीपक तथा सहायक डॉग हैंडलर सिपाही जरनैल सिंह को नियुक्त किया गया है। तीनों कर्मियों को 6-6 महीने की स्पेशल ट्रैनिंग आईटीबीपी भानू में करवाई गई है।
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दो दिन पूर्व ही लाए गए डबवाली
दोनों कुत्तों को ट्रेनिंग के बाद सोमवार 3 जून को लाया गया है। डबवाली को पुलिस जिला नशे को जड़ से खत्म करने को लेकर बनाया था। क्योंकि पंजाब और राजस्थान दोनों के बॉर्डर पर होने के कारण बड़े स्तर पर नशीले पदार्थ की सप्लाई होती है। जिनमें मुख्य रूप से अफीम, डोडा पोस्त, हेरोइन, गांजा, चरस आदि शामिल हैं। इसलिए डबवाली पुलिस प्रशासन ने मुख्यालय से मांग की थी कि उन्हें डॉग टीम स्क्वायड की विशेष जरूरत है। ताकि नशे के कारोबार को पूरी तरह से जड़ से खत्म किया जा सके। बॉर्डर एरिया में नशा तस्करी को रोकने में इन डॉग का अहम रोल रहने वाला है।