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गांव कालांवाली को शहरी सीमा में शामिल करने से ग्रामीणों में नाराजगी
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गांव कालांवाली का दृश्य।
- फोटो : Sirsa
कालांवाली। प्रशासन की ओर से लगभग 19 वर्ष बाद दोबारा से उपमंडल के गांव कालांवाली को सीमा विस्तार को लेकर नगरपालिका कालांवाली में शामिल किया जा रहा है। उपमंडल प्रशासन की ओर से गांव कालांवाली को शहरी सीमा में शामिल करने के बाद शहर जैसी सुविधाएं देकर भरपूर विकास कार्य करने के दावे किए जा रहे है। जबकि गांव कालांवाली के ग्रामीणों में इस फैसले को लेकर सरकार व प्रशासन के प्रति नाराजगी है।
गांव कालांवाली को शहरी सीमा में शामिल करने को लेकर गांव कालांवाली के ग्रामीणों निवर्तमान सरपंच प्रतिनिधि अपजीत सिंह, हरियाणा डिपो एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी गुरतेज सिंह, एडवोकेट गुरमीत सिंह, जस्सा सिंह चहल, ज्योति सरां, बिंदर सिंह व अन्य ग्रामीणों ने इस फैसले पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से गांव कालांवाली को शहरी सीमा में शामिल करने के बाद भरपूर विकास कार्य करवाने को लेकर भ्रमित किया जा रहा है। शहर जैसी सुविधा मुहैया करवाने का दावा करने वाली नगरपालिका अपने शहर के अंतर्गत आने वाले सबसे पॉश एरिया मॉडल टॉउन में अभी तक टूटी सड़कों, बदहाल पार्क, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइटों की समस्या का समाधान नहीं करवा पाई है। साथ में शहर के वार्ड 1, 2, 3, 4 में नपा प्रशासन किसी प्रकार की बेहतर सुविधा मुहैया नहीं करवा पाई है। वहां पर आमजन का रहना भी दूभर हो गया है। गांव कालांवाली को शहर में शामिल करने से ग्रामीणों को ग्रामीण क्षेत्र की विकास योजनाओं से वंचित रहने के अलावा उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज, प्रॉपर्टी खरीदने व बेचने के लिए एनडीसी लेने की परेशानी, बढ़े क्लेक्टर रेट की मार सहित कई टैक्स बढ़ जाने से नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ में मनरेगा में मजदूरी कर रहे गांव के सैकड़ों मजदूरों को भी बेरोजगार रहना पड़ेगा।
उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार शहर की सीमा बढ़ाने को लेकर कार्य कर रहे हैं। गांव कालांवाली के शहरी सीमा में शामिल होने से काफी फायदा होगा और उस एरिया में शहर को मिलने वाली हर सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा।
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- विक्रमजीत सिंह, सचिव , नगरपालिका कालांवाली
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गांव कालांवाली को शहरी सीमा में शामिल करने को लेकर गांव कालांवाली के ग्रामीणों निवर्तमान सरपंच प्रतिनिधि अपजीत सिंह, हरियाणा डिपो एसोसिएशन के मीडिया प्रभारी गुरतेज सिंह, एडवोकेट गुरमीत सिंह, जस्सा सिंह चहल, ज्योति सरां, बिंदर सिंह व अन्य ग्रामीणों ने इस फैसले पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से गांव कालांवाली को शहरी सीमा में शामिल करने के बाद भरपूर विकास कार्य करवाने को लेकर भ्रमित किया जा रहा है। शहर जैसी सुविधा मुहैया करवाने का दावा करने वाली नगरपालिका अपने शहर के अंतर्गत आने वाले सबसे पॉश एरिया मॉडल टॉउन में अभी तक टूटी सड़कों, बदहाल पार्क, सफाई व्यवस्था, स्ट्रीट लाइटों की समस्या का समाधान नहीं करवा पाई है। साथ में शहर के वार्ड 1, 2, 3, 4 में नपा प्रशासन किसी प्रकार की बेहतर सुविधा मुहैया नहीं करवा पाई है। वहां पर आमजन का रहना भी दूभर हो गया है। गांव कालांवाली को शहर में शामिल करने से ग्रामीणों को ग्रामीण क्षेत्र की विकास योजनाओं से वंचित रहने के अलावा उन्हें प्रॉपर्टी टैक्स, सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट चार्ज, डेवलपमेंट चार्ज, प्रॉपर्टी खरीदने व बेचने के लिए एनडीसी लेने की परेशानी, बढ़े क्लेक्टर रेट की मार सहित कई टैक्स बढ़ जाने से नुकसान उठाना पड़ेगा। साथ में मनरेगा में मजदूरी कर रहे गांव के सैकड़ों मजदूरों को भी बेरोजगार रहना पड़ेगा।
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उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार शहर की सीमा बढ़ाने को लेकर कार्य कर रहे हैं। गांव कालांवाली के शहरी सीमा में शामिल होने से काफी फायदा होगा और उस एरिया में शहर को मिलने वाली हर सुविधाओं का लाभ पहुंचाया जाएगा।
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- विक्रमजीत सिंह, सचिव , नगरपालिका कालांवाली