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15 अप्रैल से 25 मई तक नहरों में लगातार पानी छोड़ने की मांग, सौंपा मांगपत्र

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 05 Apr 2022 11:06 PM IST
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Demand for continuous release of water in canals from April 15 to May 25, indent submitted
सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता कार्यालय के धरनास्थल पर मौजूद किसान। - फोटो : Sirsa
सिरसा। नरमा बिजाई के लिए 15 अप्रैल से 25 मई तक रेगुलर नहरी पानी देने की मांग को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने नहर कॉलोनी में धरना देकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। वहीं किसानों ने एसई को मांग पत्र सौंपा और पानी छोड़ने के समय को बढ़ाने की बात कहीं। हालांकि अधिकारियों की ओर से 14 से 28 अप्रैल तक पानी छोड़ने की बात कहीं गई है और समय बढ़ाने को लेकर विचार करने का आश्वासन दिया है।
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मंगलवार सुबह 10 बजे संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले किसानों ने हिसार रोड स्थित नहर कॉलोनी में धरना दे दिया। वहीं किसान मैक्स साहुवाला ने कहा कि नरमा व कपास की बिजाई का ट्यूबवेल के पानी से बिजाई नहीं हो पाती है तथा न ही ट्यूबवेल के पानी से जरमीनेशन हो पाती है। ज्ञापन के जरिये संयुुुुक्त किसान मोर्चा ने मांग की कि नरमा-कपास की बिजाई के लिए नहरी पानी 15 अप्रैल से 25 मई तक नियमित रूप से दिया जाए, ताकि समय पर नरमा कपास की फलस बीमारियों व गुलाबी सूंडी जैसी बीमारियों से बच सके व अच्छी पैैदावार हो सके। इस दौरान संयुक्त किसान मोर्चा के गुरप्रीत जेलदार, भजनपाल, गुरदिता, रामप्रताप, प्रकाश ममेश, मैक्स साहुवाला, देवीलाल स्वामी, कुलवंत सिंह, अमृत सिंह, हर्षदीप सिद्धू आदि उपस्थित रहे।
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किसान बोले समस्या का नहीं हुआ समाधान तो करेंगे घेराव
अधीक्षण अभियंता को सौंपे ज्ञापन में संयुक्त किसान मोर्चा ने नरमा कपास बिजाई के लिए 15 अप्रैल से 25 मई तक नहरी पानी लगातार चलाने, नरमा-कपास की बिजाई ट्यूूबवेल के पानी से करे तो बीज की जरमीनेशन नहीं होती। जिसके चलते नहरी पानी, हरियाणा प्रदेश में पानी बेशक कम है, परंतु उसकी पानी की गलत तकनीक होने के कारण पानी की कमी ज्यादा हो जाती है, जिसके चलते नरमा-कपास बेल्ट को पानी की जरूरत है। परंतु पानी धान बेल्ट को दिया जा रहा है। जून-जुलाई माह में पानी की जरूरत धान बेल्ट को होगी, परंतु पानी नरमा बेल्ट को दिया जाएगा, 20 प्रतिशत पानी फैक्ट्रियों को दिया जाता है, जो बंद है। वहीं उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगों केे जल्द पूरा नहीं किया जाता तो वह आंदोलन करने को भी मजबूर होंगे।
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