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जज साहब, जेल में अधिकारी ने दी यातनाएं
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Fri, 29 Apr 2016 01:18 AM IST
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कैदी
- फोटो : Bureau
जेल प्रशासन पर कैदियों को यातनाएं दिए जाने के आरोप लगना आम होता जा रहा है। यातना का शिकार हुए एक बंदी ने बुधवार को जिला अदालत में पेशी की दौरान न्यायाधीश से कहा कि जज साहब, जेल में कैदियों के साथ अमानवीय बरताव होता है। देखिए मेरी हालत जेल अधिकारी ने चार वार्डनों के साथ मिलकर जमकर पिटाई की है। जेल वाले मेरा उपचार तक नहीं करवा रहे। बंदी के आंखों में आंसू व उसके शरीर पर निशान देखकर अदालत ने उसकी मेडिकल जांच कराकर रिपोर्ट पेश करके का आदेश दिया। अदालत के आदेश पर वीरवार को पीड़ित बंदी का सामान्य अस्पताल में मेडिकल करवाया गया। रिपोर्ट में बंदी की अंगुली टूटी हुई और पीठ पर मारपीट के निशान पाए गए हैं।
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जानकारी के अनुसार भावदीन निवासी हरविंद्र सिंह एक आपराधिक मामले में भगोड़ा घोषित हो गया था। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करके अदालत में पेश किया और यहां से उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। मामले के दोनों पक्ष जेल में होने के कारण इनके आपस में भिड़ने की संभावना थी। इस कारण जेल प्रशासन ने हरिवंद्र सिंह को अलग बंद कर दिया।
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जेल सूत्रों के अनुसार तीन दिन पहले हरिवंद्र सिंह मोबाइल पर बात कर रहा था। मुखबिर ने इसकी सूचना जेल उप अधीक्षक अमित भादू को दी। जेल अधिकारी ने दो हेड वार्डन व दो वार्डन को अपने साथ लिया और हरविंद्र सिंह के सामान की तलाशी ली। इसी दौरान उसके पास से मोबाइल बरामद हुआ। कैदी का आरोप है कि इसके बाद जेल अधिकारी ने हरविंद्र सिंह मारपीट शुरू कर दी। काफी देर मारपीट के बाद उठक-बैठक करवाने के बाद उन्होंने हरविंद्र सिंह को छोड़ दिया गया। जेल प्रशासन ने जेल में मोबाइल मिलने की बात को दबा लिया और पुलिस को इसकी सूचना नहीं दी।
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अगले दिन मुलाकात पर आए परिजनों को हरविंद्र सिंह ने खुद के साथ हुई मारपीट की बात बताई और अपना हाथ दिखाया। बुधवार को अदालत में पेशी के दौरान उसने खुद के पास मोबाइल फोन मिलने की बात न बताकर, केवल जेल अधिकारी द्वारा बेरहमी से मारपीट करने की बात बताई। शुक्रवार को मेडिकल रिपोर्ट अदालत समक्ष पेश की जाएगी।
जेल वैन में बैठकर मीडिया कर्मियों को लगाई आवाज
सुबह मेडिकल जांच करवाने सामान्य अस्पताल पहुंचे हरविंद्र सिंह जेल वैन में बैठा हुआ था। डीजी हेल्थ को कवर करने सामान्य अस्पताल पहुंचे मीडिया कर्मियों को देखते ही उसने जोर-जोर से आवाज लगानी शुरू कर दी। उसने कहा कि जेल में जो बंदी जेल अधिकारियों की पोल खोलने का प्रयास भी करता है तो उसके साथ बुरा व्यवहार किया जाता है। जेल के अंदर कुछ भी सामान्य नहीं, बंदियों व कैदियों को यातनाएं दी जाती हैं और उन्हें उपचार के लिए जेल से बाहर नहीं लाया जाता। दो बंदी यातआनों से भयभीत होकर सुसाइड कर चुके हैं।
बदनाम करने की साजिश है
मारपीट का आरोप झूठा और बेबुनियाद है। यह एक शातिर अपराधी है, जिसने झूठी कहानी बनाकर मुझे बदनाम करने के इरादे से आरोप लगाया है। मैं इस मामले में न्यायिक जांच के लिए भी तैयार हूं। बंदी ने स्वयं ही खुद को चोट मारी है। उसके साथी हवालातियों ने प्रशासन को यह बात बताई है। उक्त बंदी का जेल में नंबरदार से विवाद हुआ था और वार्डन उसे छुड़ाने गए थे।
-अमित भादू, जेल उपअधीक्षक सिरसा।