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संस्कृतियों का अद्भुत संगम बना खंडहर
sirsa
Updated Wed, 30 Jul 2014 12:38 AM IST
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तीज का जिक्र आते ही भाखड़ा तथा राजस्थान कैनाल के संगम पर बने पर्यटन स्थल काला तीतर की याद ताजा हो जाती है। 37 साल पहले इस पर्यटन स्थल पर मेला लगता था। हरियाणा के साथ-साथ पंजाब और राजस्थान की संस्कृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता था। राजनीतिक कारणों के चलते आज यह पर्यटन स्थल खंडहर में बदल चुका है। देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री स्व. देवीलाल ने 1977-78 में गांव अबूबशहर के निकट भाखड़ा-राजस्थान कैनाल के संगम पर पर्यटन स्थल काला तीतर की स्थापना करवाई थी।
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पर्यटकों के लिए हर वो चीज मौजूद थी, जिसे वह देखना या पाना चाहते हैं। इस पर्यटन स्थल में आठ कमरे बने हुए थे, जिसमें दो कमरे वीआईपी के ठहरने के लिए थे। इसके अतिरिक्त रेस्टोरेंट, बार, चिड़ियाघर तथा बच्चों के लिए तरह-तरह के झूले लगाए गए थे। ग्रामीण क्षेत्र में दो नहरों के किनारे बने इसे पर्यटन स्थल का प्रत्येक सैलानी महबूब था। अपनी स्थापना के कई वर्ष तक चलने के बाद राजनेताओं की अनदेखी इस पर्यटन स्थल को ले बैठी।
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1987-88 में देवीलाल ने इस पर्यटन स्थल को पुन: जिंदा करने का बीड़ा उठाया। इस पर्यटन स्थल में तीज पर ऐसा मेला भरा, जिसका हर कोई मुरीद था। मेले के बहाने पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह और पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी सहित केंद्र के कई आला नेता काला तीतर का दीदार करने पहुंचे थे।
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ऐसी मार पड़ी, फिर कभी नहीं उठा
साल 2001-02 में इस पर्यटन स्थल पर प्रकृति की मार पड़ी। तेज तूफान में भाखड़ा में गिरे वृक्षों के कारण पानी का दबाव बढ़ गया। नींव में पानी जाने के कारण पर्यटन स्थल बैठ गया। सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र मगरमच्छ तक बह गए। रही सही कसर सरकार ने पूरी कर दी। पर्यटन स्थल की बिगड़ी दशा को सुधारने के लिए कोई प्रयास नहीं किए गए, जिसके चलते अब यह खंडहर में बदल चुका है। चिड़ियाघर का स्थान जंगल ने ले लिया है।
तीज पर लगता था मेला
साल 1995 से 1997 तक काला तीतर पर्यटन स्थल के इंचार्ज रहे धर्मवीर सिंह ने बताया कि यह पर्यटन स्थल प्रदेश ही नहीं देश के चुनिंदा पर्यटन स्थलों में से एक था। इस पर्यटन स्थल पर तीज के मौके पर मेला भरता था। चिड़ियाघर, मोटर कश्ती, बार तथा रेस्टोरेंट सहित नहरों का कल-कल करता पानी वातावरण में संजीदगी भरने के लिए काफी था। इन सुविधाओं तथा प्राकृतिक कारणों के कारण यह स्थल सैलानियों को अपनी तरफ खींचता था।
वेबसाइट पर आज भी चहक रहा है
37 साल पहले बना काला तीतर बेशक खंडहर बन चुका है लेकिन जिला प्रशासन की वेबसाइट पर टूरिस्ट पैलेस की सूची में यह पर्यटन स्थल आज भी चहक रहा है। वेबसाइट पर यकीन किया जाए तो आज भी प्रशासन खंडहर काला तीतर में ठहरने के नाम पर कमरे बुक कर रहा है।
अब नहरी विभाग की है संपत्ति
काला तीतर जैसे पर्यटन स्थल को खंडहर में बदलने के पीछे राजनीतिक कारण रहे। खंडहर होने के बाद भी यह पर्यटन स्थल हरियाणा टूरिज्म तथा नहरी विभाग में आफत बना रहा। आखिरकार 2009-10 में नहरी विभाग ने इसे अपने अधीन कर लिया। अब खंडहर पर्यटन स्थल नहरी विभाग की संपत्ति है। काला तीतर पूरी तरह से खंडहर में बदल चुका है। साल 2009-10 में हरियाणा टूरिज्म ने इसे नहरी विभाग को दे दिया था। नहरी विभाग इसकी संभाल पर पैसा खर्च नहीं कर सकता है।
-वीके जग्गा, कार्यकारी अभियंता, नहरी विभाग, सिरसा
सरकार पर निर्भर है अब तो
काला तीतर पर्यटन स्थल काफी वर्षों से बंद है। इसे विकसित करना या न करना सरकार की पॉलिसी है। सरकार ही सब कुछ तय करती है। यह मामला निचले स्तर से बाहर है।
-सुनील भाटिया, जिला विकास अधिकारी, हरियाणा टूरिज्म, सिरसा
फोटो विवरण :29एसआईआरपी21:22: डबवाली क्षेत्र में विरान पड़ा काला तीतर पर्यटन केंद्र।
फोटो विवरण :29एसआईआरपी23:: जिला प्रशासन की वैबसाइट दे रही गलत जानकारी।