फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   CDLU will have a building in the name of Mata Amrita Devi Bishnoi

Sirsa News: सीडीएलयू में माता अमृता देवी बिश्नोई के नाम पर होगा भवन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 21 May 2025 11:45 PM IST
विज्ञापन
CDLU will have a building in the name of Mata Amrita Devi Bishnoi
माता अमृता देवी बिश्नोई। 
सिरसा। चौधरी देवी लाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने विश्वविद्यालय के आईटी डाटा एंड कंप्यूटर सेंटर भवन का नाम ''माता अमृता देवी बिश्नोई भवन'' रखने की घोषणा की है। यह निर्णय विश्वविद्यालय के अधोसंरचनात्मक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों को संजोने की दिशा में एक प्रेरणादायक पहल के रूप में देखा जा रहा है।
विज्ञापन


विश्वविद्यालय के कार्यकारी अभियंता राकेश गोदारा ने बताया कि इससे पूर्व 26 अप्रैल को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विश्वविद्यालय के टीचिंग ब्लॉक-5 का नाम ''माता अहिल्याबाई होल्कर भवन'' के रूप में उद्घाटन कर समाज को एक सशक्त संदेश दिया था। हाल ही में आयोजित कोर्ट की बैठक के निर्णयों के अनुसार कंस्ट्रक्शन ब्रांच ने अन्य भवनों के नामकरण के लिए विस्तृत प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को प्रेषित किया था।
विज्ञापन


प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान करते हुए कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि माता अमृता देवी बिश्नोई पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक चेतना की प्रतीक रही हैं। उन्होंने पेड़ों की रक्षा के लिए अपने प्राण तक न्योछावर कर दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन

प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने कहा कि गुरु जम्भेश्वर महाराज ने आज से 540 वर्ष पहले प्रकृति व पर्यावरण संरक्षण की शिक्षाओं देकर समाज के अंदर एक नई अलख जगाई थी। ऐसे महान व्यक्तित्वों के नाम पर भवनों का नामकरण कर हम न केवल उनके योगदान को स्मरण में लाते हैं, बल्कि विद्यार्थियों को उनके आदर्शों से जुड़ने की प्रेरणा भी प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय परिसर को केवल शैक्षणिक गतिविधियों का केंद्र न बनाकर उसे सांस्कृतिक, सामाजिक और नैतिक मूल्यों का संवाहक भी बनाया जा रहा है, जिससे विद्यार्थी समग्र रूप से विकसित हो सकें।



कुलपति प्रो. नरसी राम बिश्नोई ने बताया कि भारत के इतिहास में राजस्थान के जोधपुर जिले के गांव खेजड़ली में घटित एक ऐसी घटना दर्ज है, जिसने न केवल बलिदान की परिभाषा को नया आयाम दिया, बल्कि संगठित पर्यावरण संरक्षण आंदोलन की नींव भी रखी। यह घटना सन 1730 में (लगभग 300 वर्ष पूर्व) जोधपुर के महाराज अभय सिंह के शासनकाल की है।

महाराज ने अपने नये महल के निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में लकड़ी एकत्र करने का आदेश दिया। स्थानीय बिश्नोई जनों ने इस कार्य का विरोध किया। जब सैनिकों ने उनकी बात नहीं मानी और जबरन वृक्षों की कटाई शुरू की, तब एक साहसी बिश्नोई महिला माता अमृता देवी आगे आईं। उन्होंने खेजड़ी वृक्ष से लिपटकर यह ऐतिहासिक आह्वान किया की यदि सिर कट जाए पर वृक्ष बच जाए, तो यह सौदा सस्ता है।


इस दौरान माता अमृता देवी के साथ उनकी तीन बेटियों सहित 363 बिश्नोई वीरों और वीरांगनाओं ने खेजड़ी वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed