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एसवाईएल पर बैठक को सकारात्मक बताना हास्यास्पद : सिहाग
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डबवाली। एसवाईएल नहर का पानी हरियाणा को देने के लिए केंद्रीय जल शक्ति मंत्री की मौजूदगी में हरियाणा और पंजाब के मुख्यमंत्रियों की बैठक के बाद डबवाली के पूर्व विधायक अमित सिहाग ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान स्पष्ट रूप से कहते हैं कि उनके पास हरियाणा को देने के लिए एक बूंद भी पानी नहीं है।
केंद्र सरकार को अन्य विकल्प देखने चाहिए। वहीं इस बैठक को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से सकारात्मक बताना हास्यास्पद है। पूर्व विधायक ने कहा कि समझौते के तहत पंजाब से हरियाणा को 12.55 एमएएफ पानी मिलना चाहिए, जबकि हमें केवल 10.67 एमएएफ पानी ही मिल रहा है। वहीं इसके विपरीत जहां पंजाब को आवंटित क्षमता का कुल 14.67 एमएएफ पानी मिलना चाहिए।
वह 17.15 एमएएफ पानी प्रयोग कर रहा है। सिहाग ने इस बात पर बल दिया कि हरियाणा को अपने हिस्से से 17 फीसदी कम पानी मिलने के बावजूद, मुख्यमंत्री सैनी किसानों के हितों की रक्षा करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने मांग की है कि हरियाणा के हितों के विरुद्ध पंजाब सरकार की ओर से दी जा रही बेबुनियाद दलीलों व प्रयासों का मुख्यमंत्री हरियाणा पुरजोर खंडन कर, सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए फैसले के तहत एसवाईएल से हरियाणा के हिस्से का पानी लेने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने का काम करें।
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पूर्व विधायक ने कहा कि केंद्र सरकार को भी चाहिए कि वो टालमटोल की नीति को छोड़, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सख्ती से लागू करवाते हुए एसवाईएल नहर का शीघ्र अति शीघ्र निर्माण करवाए और हरियाणा के हिस्से का 3.5 मिलियन एकड़ फीट पानी दिलवाने का काम करे।
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केंद्र सरकार को अन्य विकल्प देखने चाहिए। वहीं इस बैठक को मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से सकारात्मक बताना हास्यास्पद है। पूर्व विधायक ने कहा कि समझौते के तहत पंजाब से हरियाणा को 12.55 एमएएफ पानी मिलना चाहिए, जबकि हमें केवल 10.67 एमएएफ पानी ही मिल रहा है। वहीं इसके विपरीत जहां पंजाब को आवंटित क्षमता का कुल 14.67 एमएएफ पानी मिलना चाहिए।
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वह 17.15 एमएएफ पानी प्रयोग कर रहा है। सिहाग ने इस बात पर बल दिया कि हरियाणा को अपने हिस्से से 17 फीसदी कम पानी मिलने के बावजूद, मुख्यमंत्री सैनी किसानों के हितों की रक्षा करने के बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। उन्होंने मांग की है कि हरियाणा के हितों के विरुद्ध पंजाब सरकार की ओर से दी जा रही बेबुनियाद दलीलों व प्रयासों का मुख्यमंत्री हरियाणा पुरजोर खंडन कर, सुप्रीम कोर्ट की ओर से दिए गए फैसले के तहत एसवाईएल से हरियाणा के हिस्से का पानी लेने के लिए केंद्र पर दबाव बनाने का काम करें।
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पूर्व विधायक ने कहा कि केंद्र सरकार को भी चाहिए कि वो टालमटोल की नीति को छोड़, सुप्रीम कोर्ट के आदेश को सख्ती से लागू करवाते हुए एसवाईएल नहर का शीघ्र अति शीघ्र निर्माण करवाए और हरियाणा के हिस्से का 3.5 मिलियन एकड़ फीट पानी दिलवाने का काम करे।