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जिले भर में चले मात्र 58 एटीएम
ब्यूरो/अमर उजाला सिरसा
Updated Thu, 15 Dec 2016 12:45 AM IST
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सिरसा। कैश की किल्लत खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। कैशलेस ट्रांजेक्शन लोगों को अभी राहत नहीं दे पा रही है क्योंकि अधिकतर लोग इस विधि से अनभिज्ञ हैं। बुधवार को सभी बैंकों में लंबी लाइनें दिन भर लगी रही पर लोगों को निर्धारित कैश नहीं मिला। यही स्थिति एटीएम में देखी गई। सुबह सवेरे से ही लोग बैंकों के समक्ष खड़े हो गए थे। जैसे ही बैंक खुले तो लोगों में कैश लेने के लिए होड़ सी मच गई पर अधिकतर बैंकों में दोपहर तक कैश मिलना शुरू हो पाया। बैंकों में आरबीआई द्वारा निर्धारित सीमा के अनुसार कैश नहीं मिल पा रहा है।
10 नवंबर से अब तक बैंकों में कैश को लेकर किल्लत जारी है। आज भी सभी बैंकों में यही स्थिति रही। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में कैश की अधिक अधिक रही। आरबीआई ने एक खाताधारक को सप्ताह में 24 हजार रुपये देने के निर्देश जारी किए हैं पर किसी भी बैंक में ऐसी व्यवस्था नहीं है। लोगों को चार हजार रुपये तक का कैश ही मिल पा रहा है। यह कैश भी उनको नसीब हो पाता है जिन्होंने एक दिन पूर्व बैंक से टोकन ले लिया हो। चार हजार रुपये लेेने के लिए चार घंटे से अधिक समय तक लाइन में लगना पड़ रहा है। आज सभी बैंकों में कैश के लिए मारामारी का माहौल देखा गया।
खास बात यह है कि नोट बंदी के बाद अब तक धन्ना सेठ अब तक लाइनों में नहीं दिखे हैं। हर दिन लगने वाली लाइनों में आम लोग ही हैं। ऐसे में अमीरों को कैश मिल रहा है इसको लेकर सभी के जहन में सवाल है। शहर का कोई भी बड़ा कारोबारी अब तक लाइन में नहीं दिखा और उनका काम भी चल रहा है। इससे संभावना जताई जा सकती है कि आम लोगों के माध्यम से करेंसी ट्रेवल करती हुई बड़े कारोबारियों के पास पहुंच रही है। इसी प्रकार एटीएम की लाइनें भी कम नहीं हो रही हैं। जिले में 181 एटीएम हैं जिनमें से आज 58 एटीएम ही चल पाए हैं।
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कारगर साबित नहीं हो पा रही कैशलेस ट्रांजेक्शन विधि
प्रशासनिक अमला इन दिनों कैशलेस ट्रांजेक्शन विधि को लेकर जगह-जगह ढिंढोरा पीटता दिखाई दे रहा है पर अब तक आम लोगों के लिए यह विधि कारगर साबित नहीं हो पाई है। इसका कारण है कि अभी तक 80 प्रतिशत से अधिक लोग इस विधि से अनभिज्ञ हैं। जो लोग पढ़े-लिखे हैं और मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं उनमें से भी अधिकतर कैशलेस ट्रांजेक्शन नहीं कर पा रहे हैं। आम लोगों को जहां राशि की जरूरत होती है वहां पर इस विधि से भुगतान करने की सुविधा भी नहीं है। इस लिए साधारण लोगों का काम कैश के बिना चलता दिखाई नहीं दे रहा।
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10 नवंबर से अब तक बैंकों में कैश को लेकर किल्लत जारी है। आज भी सभी बैंकों में यही स्थिति रही। खासकर ग्रामीण क्षेत्र में कैश की अधिक अधिक रही। आरबीआई ने एक खाताधारक को सप्ताह में 24 हजार रुपये देने के निर्देश जारी किए हैं पर किसी भी बैंक में ऐसी व्यवस्था नहीं है। लोगों को चार हजार रुपये तक का कैश ही मिल पा रहा है। यह कैश भी उनको नसीब हो पाता है जिन्होंने एक दिन पूर्व बैंक से टोकन ले लिया हो। चार हजार रुपये लेेने के लिए चार घंटे से अधिक समय तक लाइन में लगना पड़ रहा है। आज सभी बैंकों में कैश के लिए मारामारी का माहौल देखा गया।
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खास बात यह है कि नोट बंदी के बाद अब तक धन्ना सेठ अब तक लाइनों में नहीं दिखे हैं। हर दिन लगने वाली लाइनों में आम लोग ही हैं। ऐसे में अमीरों को कैश मिल रहा है इसको लेकर सभी के जहन में सवाल है। शहर का कोई भी बड़ा कारोबारी अब तक लाइन में नहीं दिखा और उनका काम भी चल रहा है। इससे संभावना जताई जा सकती है कि आम लोगों के माध्यम से करेंसी ट्रेवल करती हुई बड़े कारोबारियों के पास पहुंच रही है। इसी प्रकार एटीएम की लाइनें भी कम नहीं हो रही हैं। जिले में 181 एटीएम हैं जिनमें से आज 58 एटीएम ही चल पाए हैं।
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कारगर साबित नहीं हो पा रही कैशलेस ट्रांजेक्शन विधि
प्रशासनिक अमला इन दिनों कैशलेस ट्रांजेक्शन विधि को लेकर जगह-जगह ढिंढोरा पीटता दिखाई दे रहा है पर अब तक आम लोगों के लिए यह विधि कारगर साबित नहीं हो पाई है। इसका कारण है कि अभी तक 80 प्रतिशत से अधिक लोग इस विधि से अनभिज्ञ हैं। जो लोग पढ़े-लिखे हैं और मोबाइल पर इंटरनेट का इस्तेमाल करते हैं उनमें से भी अधिकतर कैशलेस ट्रांजेक्शन नहीं कर पा रहे हैं। आम लोगों को जहां राशि की जरूरत होती है वहां पर इस विधि से भुगतान करने की सुविधा भी नहीं है। इस लिए साधारण लोगों का काम कैश के बिना चलता दिखाई नहीं दे रहा।