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Sirsa News: एक साल बाद नए नियमों के साथ शहर के पार्कों को गोद देने की तैयारी में प्रशासन
Mon, 04 Nov 2024 12:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 04 Nov 2024 12:23 AM IST
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सिरसा में एफ-ब्लॉक में बने पार्क में टूटे पड़े झूले। संवाद
संवाद न्यूज एजेंसी
सिरसा। नगर परिषद की ओर से पार्कों को गोद देने की प्रक्रिया में पाई गई अनियमितताओं के बाद जिला नगर आयुक्त ने बड़े स्तर पर नियमों में बदलाव करवाया है। इन बदलावों के साथ अब पार्क सोसायटियों को गोद दिए जाएंगे। किसी भी बाहरी एजेंसी या सोसायटी को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
जानकारी के अनुसार, नगर परिषद के अधीन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और नगर परिषद के 82 पार्क हैं। इन पार्कों को पिछले एक साल से गोद देने की मांग उठ रही थी। जिला नगर आयुक्त ने पार्कों को गोद देने की प्रक्रिया की जांच की तो कई प्रकार की कमियां सामने आईं। अधिकतर पार्कों को एजेंसियों और बाहरी सोसायटियों को गोद दिया गया था, जिनका उस क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं था। ऐसे में पार्कों को बेहतर बनाने में उन्होंने कोई रुचि नहीं दिखाई और पार्कों की हालत आज भी बदतर बनी हुई है। इसी कारण जिला नगर आयुक्त ने आने के बाद से ही पार्कों के नए नियम बनाने की प्रक्रिया पर काम करने के आदेश दिए थे। चुनाव के बाद अब नए नियमों के अनुसार पार्कों को गोद दिया जाएगा।
एजेंसियां और सोसायटियां कमा रही थीं पैसा
नगर परिषद 4 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से पार्कों के लिए पैसा जारी करती है। पूर्व में सफाई एजेंसियों से लेकर रानियां में काम करने वालीं एजेंसियों को पार्क गोद दिए गए थे। एजेंसियों और सोसायटियों के पास 10 से 12 तक पार्क गोद थे। इनको लेकर बड़े स्तर पर शिकायतें विभाग को प्राप्त हुई थीं। इतना ही नहीं, पूर्व निकाय मंत्री डाॅ. कमल गुप्ता के सामने भी यह मामला उठा था। इसके अतिरिक्त, जिला नगर आयुक्त को भी लोगों ने लिखित में शिकायत दी थी।
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यह है नये नियम
1 जिस क्षेत्र में पार्क है। वहां के लोगों की सोसायटी होना अनिवार्य है।
2 एक पार्क के लिए एक से अधिक सोसायटियों के आवेदन करने पर ड्राॅ निकाला जाएगा।
3 एजेंसियों को पार्क गोद नहीं दिए जाएंगे।
4 शहर से बाहर की सोसायटियों को पार्क गोद नहीं दिए जाएंगे।
5 पार्क जिस कॉलोनी में है, उस कॉलोनी से बाहर की सोसायटी को पार्क देना प्राथमिकता नहीं होगी।
6 पार्कों का प्रतिमाह निरीक्षण किया जाएगा।
यह है मौजूदा हालात
एक साल से शहर के पार्कों को गोद नहीं दिया गया है। सभी पार्कों की देखरेख की जिम्मेदारी नगर परिषद के पास थी। विभाग की ओर से अपने स्तर पर भरसक प्रयास पार्कों की देखरेख को लेकर किए गए। शहर के 70 प्रतिशत से ज्यादा पार्कों के हालात बदतर हैं। कहीं दीवारें टूटी हुई हैं तो कहीं झूले टूटे हुए हैं। लोगों ने पार्कों को कबाड़घर तक बना रखा है। पॉश एरिया में किसी ने पार्क की दीवार के साथ ओपन शौचालय तक का निर्माण किया हुआ है।
कोट्स
पार्कों को गोद देने को लेकर नए नियम बनाए गए हैं। पुरानी व्यवस्था में कई प्रकार की अनियमितताएं थीं। अब पार्कों को अपना समझकर देखरेख करने वाली सोसायटियों को ही पार्क गोद दिए जाएंगे। पार्क के आस-पास के लोग ही सोसायटी बनाकर पार्क संभालें। यही हमारी प्राथमिकता है।
- सुरेंद्र बैनीवाल, जिला नगर आयुक्त, सिरसा।
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सिरसा। नगर परिषद की ओर से पार्कों को गोद देने की प्रक्रिया में पाई गई अनियमितताओं के बाद जिला नगर आयुक्त ने बड़े स्तर पर नियमों में बदलाव करवाया है। इन बदलावों के साथ अब पार्क सोसायटियों को गोद दिए जाएंगे। किसी भी बाहरी एजेंसी या सोसायटी को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी।
जानकारी के अनुसार, नगर परिषद के अधीन हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण और नगर परिषद के 82 पार्क हैं। इन पार्कों को पिछले एक साल से गोद देने की मांग उठ रही थी। जिला नगर आयुक्त ने पार्कों को गोद देने की प्रक्रिया की जांच की तो कई प्रकार की कमियां सामने आईं। अधिकतर पार्कों को एजेंसियों और बाहरी सोसायटियों को गोद दिया गया था, जिनका उस क्षेत्र से कोई लेना-देना नहीं था। ऐसे में पार्कों को बेहतर बनाने में उन्होंने कोई रुचि नहीं दिखाई और पार्कों की हालत आज भी बदतर बनी हुई है। इसी कारण जिला नगर आयुक्त ने आने के बाद से ही पार्कों के नए नियम बनाने की प्रक्रिया पर काम करने के आदेश दिए थे। चुनाव के बाद अब नए नियमों के अनुसार पार्कों को गोद दिया जाएगा।
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एजेंसियां और सोसायटियां कमा रही थीं पैसा
नगर परिषद 4 रुपये प्रति स्क्वायर फीट के हिसाब से पार्कों के लिए पैसा जारी करती है। पूर्व में सफाई एजेंसियों से लेकर रानियां में काम करने वालीं एजेंसियों को पार्क गोद दिए गए थे। एजेंसियों और सोसायटियों के पास 10 से 12 तक पार्क गोद थे। इनको लेकर बड़े स्तर पर शिकायतें विभाग को प्राप्त हुई थीं। इतना ही नहीं, पूर्व निकाय मंत्री डाॅ. कमल गुप्ता के सामने भी यह मामला उठा था। इसके अतिरिक्त, जिला नगर आयुक्त को भी लोगों ने लिखित में शिकायत दी थी।
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यह है नये नियम
1 जिस क्षेत्र में पार्क है। वहां के लोगों की सोसायटी होना अनिवार्य है।
2 एक पार्क के लिए एक से अधिक सोसायटियों के आवेदन करने पर ड्राॅ निकाला जाएगा।
3 एजेंसियों को पार्क गोद नहीं दिए जाएंगे।
4 शहर से बाहर की सोसायटियों को पार्क गोद नहीं दिए जाएंगे।
5 पार्क जिस कॉलोनी में है, उस कॉलोनी से बाहर की सोसायटी को पार्क देना प्राथमिकता नहीं होगी।
6 पार्कों का प्रतिमाह निरीक्षण किया जाएगा।
यह है मौजूदा हालात
एक साल से शहर के पार्कों को गोद नहीं दिया गया है। सभी पार्कों की देखरेख की जिम्मेदारी नगर परिषद के पास थी। विभाग की ओर से अपने स्तर पर भरसक प्रयास पार्कों की देखरेख को लेकर किए गए। शहर के 70 प्रतिशत से ज्यादा पार्कों के हालात बदतर हैं। कहीं दीवारें टूटी हुई हैं तो कहीं झूले टूटे हुए हैं। लोगों ने पार्कों को कबाड़घर तक बना रखा है। पॉश एरिया में किसी ने पार्क की दीवार के साथ ओपन शौचालय तक का निर्माण किया हुआ है।
कोट्स
पार्कों को गोद देने को लेकर नए नियम बनाए गए हैं। पुरानी व्यवस्था में कई प्रकार की अनियमितताएं थीं। अब पार्कों को अपना समझकर देखरेख करने वाली सोसायटियों को ही पार्क गोद दिए जाएंगे। पार्क के आस-पास के लोग ही सोसायटी बनाकर पार्क संभालें। यही हमारी प्राथमिकता है।
- सुरेंद्र बैनीवाल, जिला नगर आयुक्त, सिरसा।