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Sirsa News: मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद, लचीली सोच और सामाजिक जुड़ाव आवश्यक
Sun, 11 Oct 2026 01:56 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Sun, 11 Oct 2026 01:56 AM IST
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डॉ. रविंद्र पुरी।
सिरसा। बेहतर मानसिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त नींद, सकारात्मक और लचीली सोच, सामाजिक जुड़ाव तथा खुद के लिए समय निकालना बेहद जरूरी है। मनोवैज्ञानिक और राजकीय नेशनल महाविद्यालय सिरसा के पूर्व प्राचार्य रविंद्र पुरी ने यह जानकारी दी।
उन्होंने मनोवैज्ञानिक शोधों के आधार पर मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के कई उपाय बताए। रविंद्र पुरी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। इस विषय पर खुलकर बात करना भी जरूरी है, ताकि लोग बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
रविंद्र पुरी ने बताया कि सुबह की शुरुआत जल्दबाजी और तनाव के बजाय सुकून के साथ करनी चाहिए। सोने और जागने का समय निश्चित रखने से नींद की दिनचर्या बेहतर बनती है। दिन में भी अपने लिए कम से कम आधा घंटा निकालना चाहिए। इस दौरान अपनी पसंद का काम करें, रुचियों को समय दें और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से कुछ समय का विराम लें।
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परिस्थितियों को स्वीकारें और भावनाओं को व्यक्त करें
उन्होंने कहा कि जीवन में हर परिस्थिति मनमुताबिक नहीं होती। ऐसे में हर चीज के अपनी अपेक्षा के अनुसार होने की जिद करने के बजाय परिस्थितियों को स्वीकार करना जरूरी है। सोच में लचीलापन लाना भी महत्वपूर्ण है। निराशा या असफलता मिलने पर उसे अंत मानने के बजाय अनुभव और सीख के रूप में देखना चाहिए। रविंद्र पुरी के अनुसार, भावनाओं को लगातार दबाकर रखना मानसिक परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए अपनी भावनाओं को उचित तरीके से व्यक्त करना सीखें।
सीमाएं तय करें और ''ना'' कहना सीखें
रविंद्र पुरी ने यह भी कहा कि दूसरों की अपेक्षाओं को पूरा करने के दबाव में हर बात के लिए ''हां'' कहना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर विनम्रता से ''ना'' कहना मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। अपनी सीमाएं तय करना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति को अनावश्यक तनाव से बचाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करें
रविंद्र पुरी ने जोर दिया कि शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीरता से लेना चाहिए। कई लोग समाज में अपनी छवि खराब होने के डर से मानसिक परेशानी साझा नहीं करते। इस सोच को बदलना होगा। परिवारों, कार्यस्थलों और संस्थानों में ऐसा माहौल बनना चाहिए। जहां लोग बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद ले सकें। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर संवेदनशीलता के साथ सुनना और खुलकर चर्चा करना जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
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उन्होंने मनोवैज्ञानिक शोधों के आधार पर मानसिक रूप से स्वस्थ रहने के कई उपाय बताए। रविंद्र पुरी ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। इस विषय पर खुलकर बात करना भी जरूरी है, ताकि लोग बिना किसी झिझक के अपनी समस्याएं साझा कर सकें।
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रविंद्र पुरी ने बताया कि सुबह की शुरुआत जल्दबाजी और तनाव के बजाय सुकून के साथ करनी चाहिए। सोने और जागने का समय निश्चित रखने से नींद की दिनचर्या बेहतर बनती है। दिन में भी अपने लिए कम से कम आधा घंटा निकालना चाहिए। इस दौरान अपनी पसंद का काम करें, रुचियों को समय दें और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों से कुछ समय का विराम लें।
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परिस्थितियों को स्वीकारें और भावनाओं को व्यक्त करें
उन्होंने कहा कि जीवन में हर परिस्थिति मनमुताबिक नहीं होती। ऐसे में हर चीज के अपनी अपेक्षा के अनुसार होने की जिद करने के बजाय परिस्थितियों को स्वीकार करना जरूरी है। सोच में लचीलापन लाना भी महत्वपूर्ण है। निराशा या असफलता मिलने पर उसे अंत मानने के बजाय अनुभव और सीख के रूप में देखना चाहिए। रविंद्र पुरी के अनुसार, भावनाओं को लगातार दबाकर रखना मानसिक परेशानी बढ़ा सकता है। इसलिए अपनी भावनाओं को उचित तरीके से व्यक्त करना सीखें।
सीमाएं तय करें और ''ना'' कहना सीखें
रविंद्र पुरी ने यह भी कहा कि दूसरों की अपेक्षाओं को पूरा करने के दबाव में हर बात के लिए ''हां'' कहना उचित नहीं है। जरूरत पड़ने पर विनम्रता से ''ना'' कहना मानसिक स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। अपनी सीमाएं तय करना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह व्यक्ति को अनावश्यक तनाव से बचाता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करें
रविंद्र पुरी ने जोर दिया कि शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य को भी गंभीरता से लेना चाहिए। कई लोग समाज में अपनी छवि खराब होने के डर से मानसिक परेशानी साझा नहीं करते। इस सोच को बदलना होगा। परिवारों, कार्यस्थलों और संस्थानों में ऐसा माहौल बनना चाहिए। जहां लोग बिना किसी झिझक के अपनी बात रख सकें और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद ले सकें। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर संवेदनशीलता के साथ सुनना और खुलकर चर्चा करना जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।