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Sirsa News: जोड़ों की अकड़न और दर्द को न समझें उम्र का असर
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सिरसा। सुबह की पहली करवट के साथ यदि हाथ-पैरों में अकड़न, जोड़ों में दर्द और सूजन दिन की शुरुआत को मुश्किल बनाने लगे तो सजग हो जाएं। इसे बढ़ती उम्र का सामान्य असर मानकर अनदेखा न करें। यह संकेत गठिया की दस्तक हो सकते हैं। समय रहते इनकी पहचान और उपचार न होने पर बीमारी जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की शिकायत लेकर मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। कई लोग इसे उम्र का असर मानकर उपचार में देरी कर देते हैं, जबकि गठिया केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। इसके कुछ प्रकार युवाओं और बच्चों को भी प्रभावित कर सकते हैं। समय पर जांच से बीमारी की पहचान कर उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।
गठिया के प्रमुख प्रकारों में ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस शामिल हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के कार्टिलेज में बदलाव के कारण दर्द और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। वहीं, रूमेटाइड आर्थराइटिस प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जिसमें जोड़ों में सूजन और अकड़न होती है। सुबह लंबे समय तक अकड़न रहना, बार-बार सूजन आना और दर्द के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित होना ऐसे संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संवाद
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बिना सलाह दर्द निवारक दवाएं लेने से बचें :
लगातार दर्द या सूजन रहने पर चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। बिना चिकित्सकीय सलाह लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन नुकसानदायक हो सकता है। गठिया के विभिन्न प्रकारों का उपचार अलग-अलग होता है, इसलिए खुद से दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इलाज कराना चाहिए।
व्यायाम और संतुलित आहार भी जरूरी :
जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और वजन पर नियंत्रण जरूरी है। पहले से दर्द या सूजन होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार व्यायाम करना चाहिए। जागरूकता, समय पर जांच और उचित उपचार से बीमारी के प्रभाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन और सुबह उठने पर लंबे समय तक अकड़न रहने को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गठिया केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है, इसके कुछ प्रकार युवाओं और बच्चों को भी प्रभावित करते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह दर्द निवारक दवाएं लेने के बजाय समय पर जांच करवाकर उचित उपचार कराएं। -डॉ. कमल बैनीवाल, ऑर्थो स्पेशलिस्ट, जिला नागरिक अस्पताल, सिरसा।
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विशेषज्ञों के अनुसार, जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की शिकायत लेकर मरीज अस्पताल पहुंचते हैं। कई लोग इसे उम्र का असर मानकर उपचार में देरी कर देते हैं, जबकि गठिया केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है। इसके कुछ प्रकार युवाओं और बच्चों को भी प्रभावित कर सकते हैं। समय पर जांच से बीमारी की पहचान कर उचित उपचार शुरू किया जा सकता है।
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गठिया के प्रमुख प्रकारों में ऑस्टियोआर्थराइटिस और रूमेटाइड आर्थराइटिस शामिल हैं। ऑस्टियोआर्थराइटिस में जोड़ों के कार्टिलेज में बदलाव के कारण दर्द और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है। वहीं, रूमेटाइड आर्थराइटिस प्रतिरक्षा तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जिसमें जोड़ों में सूजन और अकड़न होती है। सुबह लंबे समय तक अकड़न रहना, बार-बार सूजन आना और दर्द के कारण रोजमर्रा के काम प्रभावित होना ऐसे संकेत हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। संवाद
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बिना सलाह दर्द निवारक दवाएं लेने से बचें :
लगातार दर्द या सूजन रहने पर चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है। बिना चिकित्सकीय सलाह लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन नुकसानदायक हो सकता है। गठिया के विभिन्न प्रकारों का उपचार अलग-अलग होता है, इसलिए खुद से दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार इलाज कराना चाहिए।
व्यायाम और संतुलित आहार भी जरूरी :
जोड़ों को स्वस्थ रखने के लिए नियमित हल्की शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार और वजन पर नियंत्रण जरूरी है। पहले से दर्द या सूजन होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार व्यायाम करना चाहिए। जागरूकता, समय पर जांच और उचित उपचार से बीमारी के प्रभाव को कम करने तथा जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
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जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन और सुबह उठने पर लंबे समय तक अकड़न रहने को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। गठिया केवल बुजुर्गों की बीमारी नहीं है, इसके कुछ प्रकार युवाओं और बच्चों को भी प्रभावित करते हैं। बिना चिकित्सकीय सलाह दर्द निवारक दवाएं लेने के बजाय समय पर जांच करवाकर उचित उपचार कराएं। -डॉ. कमल बैनीवाल, ऑर्थो स्पेशलिस्ट, जिला नागरिक अस्पताल, सिरसा।