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कार्रवाई को लेकर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिले परिजन, मिला आश्वासन
Updated Fri, 28 Sep 2018 03:52 AM IST
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आरोपियों पर कार्रवाई की मांग के लिए स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिले परिजन
चोपटा। नसबंदी के आपरेशन के दौरान जिला नागरिक अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा लापरवाही बरतने के मामले में केस दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से नाराज महिला के परिजन बुधवार को चंडीगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिले। स्वास्थ्य मंत्री ने शिकायत सुनने के बाद परिजनों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी के सस्पेंड की सूचना वीरवार को पूरे दिन सोशल मीडिया पर चलती रही। लेकिन किसी भी विभागीय अधिकारी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की।
ये था मामला: मामले के अनुसार गांव हंजीरा निवासी सरोज पुत्री सुभाष की 7 अगस्त 2017 को जयपुर के अस्पताल में मौत हो गई थी। उसके पिता सुभाष के अनुसार मई 2017 में वह सरोज को नसबंदी के आपरेशन के लिए नागरिक अस्पताल में लेकर आया। जहां अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुभाषिनी जैन ने उन्हें अपने पति डॉ. आरके जैन के निजी अस्पताल में आपरेशन करवाने को कहा। जिस पर 8 मई को वे जैन हड्डियों के अस्पताल में आए। जहां डॉ. सुभाषिनी व उसके पति आरके जैन मौजूद रहे। आरोप है कि बिना किसी चैकअप और टेस्ट के उसकी बेटी को बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया। जिससे वह कोमा में चली गई। इसके बाद उसे संजीवनी अस्पताल में रैफर कर दिया। 8 से 13 मई 2017 तक की संजीवनी अस्पताल की फीस भी डा. जैन ने दी। इसके बाद संजीवनी अस्पताल ने भी जबाव दे दिया तो वे अपनी बेटी को जयपुर ले गए। जहां 7 अगस्त 2017 को उसकी मौत हो गई। सुभाष का आरोप है कि डॉ. सुभाषिनी की लापरवाही के कारण उसकी बेटी तीन महीने कोमा में रही और बाद में उसकी मौत हो गई। जिसके लिए वह जिम्मेवार है। इस संबंध में 7 अगस्त 2017 को शहर थाना में शिकायत दर्ज करवाई गई। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिसके बाद मामला ग्रीवेंस कमेटी में चला गया। ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे राज्यमंत्री कृष्ण बेदी ने पूरे मामले को जानने के बाद इसे मानवीय संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ मानते हुए डॉक्टर दंपति पर तुरंत प्रभाव से केस दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद पुलिस ने 26 जून 2018 को चिकित्सक दंपति पर केस दर्ज किया था।
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चोपटा। नसबंदी के आपरेशन के दौरान जिला नागरिक अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा लापरवाही बरतने के मामले में केस दर्ज होने के बाद भी कोई कार्रवाई न होने से नाराज महिला के परिजन बुधवार को चंडीगढ़ में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से मिले। स्वास्थ्य मंत्री ने शिकायत सुनने के बाद परिजनों को उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। वहीं मुख्य चिकित्सा अधिकारी के सस्पेंड की सूचना वीरवार को पूरे दिन सोशल मीडिया पर चलती रही। लेकिन किसी भी विभागीय अधिकारी ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की।
ये था मामला: मामले के अनुसार गांव हंजीरा निवासी सरोज पुत्री सुभाष की 7 अगस्त 2017 को जयपुर के अस्पताल में मौत हो गई थी। उसके पिता सुभाष के अनुसार मई 2017 में वह सरोज को नसबंदी के आपरेशन के लिए नागरिक अस्पताल में लेकर आया। जहां अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुभाषिनी जैन ने उन्हें अपने पति डॉ. आरके जैन के निजी अस्पताल में आपरेशन करवाने को कहा। जिस पर 8 मई को वे जैन हड्डियों के अस्पताल में आए। जहां डॉ. सुभाषिनी व उसके पति आरके जैन मौजूद रहे। आरोप है कि बिना किसी चैकअप और टेस्ट के उसकी बेटी को बेहोशी का इंजेक्शन दिया गया। जिससे वह कोमा में चली गई। इसके बाद उसे संजीवनी अस्पताल में रैफर कर दिया। 8 से 13 मई 2017 तक की संजीवनी अस्पताल की फीस भी डा. जैन ने दी। इसके बाद संजीवनी अस्पताल ने भी जबाव दे दिया तो वे अपनी बेटी को जयपुर ले गए। जहां 7 अगस्त 2017 को उसकी मौत हो गई। सुभाष का आरोप है कि डॉ. सुभाषिनी की लापरवाही के कारण उसकी बेटी तीन महीने कोमा में रही और बाद में उसकी मौत हो गई। जिसके लिए वह जिम्मेवार है। इस संबंध में 7 अगस्त 2017 को शहर थाना में शिकायत दर्ज करवाई गई। शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने इस मामले में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। जिसके बाद मामला ग्रीवेंस कमेटी में चला गया। ग्रीवेंस कमेटी की मीटिंग की अध्यक्षता कर रहे राज्यमंत्री कृष्ण बेदी ने पूरे मामले को जानने के बाद इसे मानवीय संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ मानते हुए डॉक्टर दंपति पर तुरंत प्रभाव से केस दर्ज कर जांच के आदेश दिए थे। जिसके बाद पुलिस ने 26 जून 2018 को चिकित्सक दंपति पर केस दर्ज किया था।
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