{"_id":"5b098b964f1c1bf66e8b4a89","slug":"91527352214-sirsa-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"एडीसी ने तीन सदस्यीय कमेटी का किया गठन, प्राथमिक जांच में खंभों व लाइटों की लाखों रुपयो की दो बार अदायगी की गई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एडीसी ने तीन सदस्यीय कमेटी का किया गठन, प्राथमिक जांच में खंभों व लाइटों की लाखों रुपयो की दो बार अदायगी की गई
Updated Sat, 26 May 2018 10:00 PM IST
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स्लम एरिया में लगे 170 पोल व लाइट गड़बड़झाला मामले में नगरपरिषद ईओ वीरेंद्र सहारण ने तत्कालीन एमई सुबेर सिंह व जेई अरुण कुमार की भूमिका बताई संदिग्ध
सिरसा। बीआरजीएफ स्कीम के तहत शहर के स्लम एरिया में लगाए गए 170 पोल व लाइट में गड़बड़झाला हुआ है। एडीसी कार्यालय के आदेश पर नगरपरिषद ने अपनी रिपोर्ट उन्हें भेज दी है। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि एमबी में लाइट बिल का इंद्राज से प्रतीत होता कि खंभों व लाइटों की पुन अदायगी की गई। इतना ही नहीं नगरपरिषद के ईओ के समक्ष न तो तत्कालीन अभियंता सुबेर सिंह व कनिष्ठ अभियंता अरुण कुमार जांच में शामिल हुए। ऐसे में दोनों अधिकारी इस गड़बड़ झाले में संदिग्ध भूमिका में नजर आ रहे हैं। नगरपरिषद की रिपोर्ट के आधार पर एडीसी कार्यालय ने पीडब्लूडी विभाग के एसडीओ इलेक्ट्रिक, एकाउंट ऑफिसर डीआरडीए तथा एसडीओ पंचायती राज विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जो कि पूरे मामले की जांच करेगी।
वार्ड नंबर 22 के पार्षद बलजीत कौर के पति शिकायतकर्ता हरदास सिंह रिंकू ने बताया कि 2013 में बीआरजीएफ स्कीम के तहत स्लम एरिया के लिए एडीसी कार्यालय ने करीब 170 पाले लगवाने थे। वार्ड 22 और पीर बस्ती में 40 पोल लगने थे। नगरपरिषद पर इनेलो काबिज थी। शिकायतकर्ता हरदास सिंह रिंकू का कहना है कि 21 पोल लगे। बाकी पोल मेला ग्राउंड एरिया में पीर बस्ती दिखाकर जोड़ दिए गए। जबकि मेला ग्राउंड क्षेत्र में पीर बस्ती नहीं है। वो पोल गत्ता फैक्ट्री रोड पर लगा दिए गए। शिकायतकर्ता रिंकू का आरोप है कि 650 रुपये वाले कंनेसर की जगह पर 30 रुपये का कनेंसर डाला गया। तार भी कमजोर भी डाली गई। पोल लगाने के लिए थड़ा 6 फुट गहरा थड़ा बनाना था। लेकिन दो फुट से ज्यादा गहरा थड़ा ही नहीं बनाया गया। पोल भी एडीसी ने नए लेकर दिए थ। ठेकेदार अभियंता को फिर भी पेमेंट कर दी गई। जबकि ठेका केवल फिटिंग का था। हमने ये शिकायत सीएम विंडो पर की और एडीसी इसकी जांच कर रहे हैं।
एडीसी कार्यालय पहुंची जांच रिपोर्ट
नगरपरिषद की जांच रिपोर्ट अनुसार स्टॉक रजिस्ट्रर अनुसार बीआरजीएफ स्कीम के तहत लगाए गए 170 पोल व लाइट पहले से ही दर्ज है। नगरपरिषद द्वारा इन पोलों की खरीद के लिए बीआरजीएफ फंड से 28 लाख 38 हजार 525 रुपये की अदायगी मैं न्यू सांगवान इलेक्ट्रानिक को गई। परंतु एमबी में इन लाईटों के बिलों के किए गए इंद्राज से प्रतीत होता है कि खंभों व लाइटों की पुन अदायगी की गई। मामले की जांच के लिए दो मई को नगरपरिषद के ईओ विरेंद्र सहारण व लिपिक अभियंता शाखा व सफाई निरीक्षक पवन कंबोज ने वार्ड नंबर 22 की पार्षद बलजीत कौर के पति हरदास सिंह रिंकू के साथ पीर बस्ती में लगी लाइटों का दौरा किया। निरीक्षण में पाया गया कि लाइटें चालू नहीं है। आसपास के लोगों ने भी अधिकारियों को बताया कि लाइटें कभी चालू नहीं हुई। पार्षद के घर के आगे पड़ा पोल जमीन में दबा पड़ा है। जो कि निर्धारित स्थान पर फिक्स नहीं है। यह उक्त क्षेत्र में बीआरजीएफ स्कीम के तहत लगाई गई लाइटों की गुणवत्ता व मात्रा को व्यक्त करता है। थर्ड पार्टी की रिपोर्ट के आधार पर बिना लाइट इंचार्ज की जांच के बिना ही अदायगी कर दी गई। इतना ही नहीं लोकअदालत में जब यह मामला गया तो सुनवाई के दौरान तत्कालीन परिषद अभियंता व लाइट इंस्पेक्टर से भी रिपोर्ट नहीं ली गई। एमबी में तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता अरुण कुमार द्वारा अदायगी संबंधी दर्ज टिप्पणी भी संदेहापस्द है। इसलिए जांच रिपोर्ट में तत्कालीन पालिका अभियंता सुबेर सिंह, कनिष्ठ अभियंता अरुण कुमार तथा वर्तमान में कार्यरत पालिका अभियंता राकेश कुमार तथा कनिष्ठ अभियंता भूपेंद्र सिंह को रिकार्ड सहित जांच में शामिल किया जाए।
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तत्कालीन एमई और जेई नहीं जांच में शामिल हुए
जांच रिपोर्ट अनुसार नगरपरिषद के ईओ वीरेंद्र सहारण ने नगरपरिषद अभियंता राकेश कुमार से स्लम एरिया में बीआरजीएफ योजना के संबंध में लगाई गइ स्ट्रीट लाइटों की रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन वह अभी लंबित है। चार मई 2018 को तत्कालीन नगरपरिषद अभियंता सुबेर सिंह तथा कनिष्ठ अभियंता अरुण कुमार को नगरपरिषद के ईओ वीरेंद्र सहारण ने बुलाया था। लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। अभियंता शाखा द्वारा अभी तक केवल बीआरजीएफ के तहत लगाई गई स्ट्रीट लाइट से संबंधित दस्तावेज जैसे प्रशासन स्वीकृति, अनुमान पत्रों, स्टॉक रजिस्टर, वर्क रजिस्टर, बीआरजीएफ अनुदान राशि रजिस्ट्रर, टेंडर रजिस्टर, अदायगी से संबंधित बिल बाऊचर, एमबी वर्क आर्डर, थर्ड पार्टी मोनिटरिंग, लोक अदालत में केस की प्रतियां भी एडीसी कार्यालय को उपलब्ध करवाई गई। लेकिन जांच रिपोर्ट को परिषद अभियंता ने लंबे समय से लंबित रखा। वहीं नगरपरिषद अभियंता सुबेर सिंह व कनष्ठि अभियंता अरुण कुमार का जांच में शामिल न होना अपने आप में संदेह का विषय है।
जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन: एडीसी
मेरे पास रिपोर्ट आई है। हमने इसमें जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। जो कि राशि चैक करेगी, पोल कितने हैं, कहीं दोबारा तो इंट्री नहीं हुई।
मनीष नागपाल,एडीसी सिरसा।
फोटो सात व आठ
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सिरसा। बीआरजीएफ स्कीम के तहत शहर के स्लम एरिया में लगाए गए 170 पोल व लाइट में गड़बड़झाला हुआ है। एडीसी कार्यालय के आदेश पर नगरपरिषद ने अपनी रिपोर्ट उन्हें भेज दी है। जांच रिपोर्ट में बताया गया कि एमबी में लाइट बिल का इंद्राज से प्रतीत होता कि खंभों व लाइटों की पुन अदायगी की गई। इतना ही नहीं नगरपरिषद के ईओ के समक्ष न तो तत्कालीन अभियंता सुबेर सिंह व कनिष्ठ अभियंता अरुण कुमार जांच में शामिल हुए। ऐसे में दोनों अधिकारी इस गड़बड़ झाले में संदिग्ध भूमिका में नजर आ रहे हैं। नगरपरिषद की रिपोर्ट के आधार पर एडीसी कार्यालय ने पीडब्लूडी विभाग के एसडीओ इलेक्ट्रिक, एकाउंट ऑफिसर डीआरडीए तथा एसडीओ पंचायती राज विभाग की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है जो कि पूरे मामले की जांच करेगी।
वार्ड नंबर 22 के पार्षद बलजीत कौर के पति शिकायतकर्ता हरदास सिंह रिंकू ने बताया कि 2013 में बीआरजीएफ स्कीम के तहत स्लम एरिया के लिए एडीसी कार्यालय ने करीब 170 पाले लगवाने थे। वार्ड 22 और पीर बस्ती में 40 पोल लगने थे। नगरपरिषद पर इनेलो काबिज थी। शिकायतकर्ता हरदास सिंह रिंकू का कहना है कि 21 पोल लगे। बाकी पोल मेला ग्राउंड एरिया में पीर बस्ती दिखाकर जोड़ दिए गए। जबकि मेला ग्राउंड क्षेत्र में पीर बस्ती नहीं है। वो पोल गत्ता फैक्ट्री रोड पर लगा दिए गए। शिकायतकर्ता रिंकू का आरोप है कि 650 रुपये वाले कंनेसर की जगह पर 30 रुपये का कनेंसर डाला गया। तार भी कमजोर भी डाली गई। पोल लगाने के लिए थड़ा 6 फुट गहरा थड़ा बनाना था। लेकिन दो फुट से ज्यादा गहरा थड़ा ही नहीं बनाया गया। पोल भी एडीसी ने नए लेकर दिए थ। ठेकेदार अभियंता को फिर भी पेमेंट कर दी गई। जबकि ठेका केवल फिटिंग का था। हमने ये शिकायत सीएम विंडो पर की और एडीसी इसकी जांच कर रहे हैं।
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एडीसी कार्यालय पहुंची जांच रिपोर्ट
नगरपरिषद की जांच रिपोर्ट अनुसार स्टॉक रजिस्ट्रर अनुसार बीआरजीएफ स्कीम के तहत लगाए गए 170 पोल व लाइट पहले से ही दर्ज है। नगरपरिषद द्वारा इन पोलों की खरीद के लिए बीआरजीएफ फंड से 28 लाख 38 हजार 525 रुपये की अदायगी मैं न्यू सांगवान इलेक्ट्रानिक को गई। परंतु एमबी में इन लाईटों के बिलों के किए गए इंद्राज से प्रतीत होता है कि खंभों व लाइटों की पुन अदायगी की गई। मामले की जांच के लिए दो मई को नगरपरिषद के ईओ विरेंद्र सहारण व लिपिक अभियंता शाखा व सफाई निरीक्षक पवन कंबोज ने वार्ड नंबर 22 की पार्षद बलजीत कौर के पति हरदास सिंह रिंकू के साथ पीर बस्ती में लगी लाइटों का दौरा किया। निरीक्षण में पाया गया कि लाइटें चालू नहीं है। आसपास के लोगों ने भी अधिकारियों को बताया कि लाइटें कभी चालू नहीं हुई। पार्षद के घर के आगे पड़ा पोल जमीन में दबा पड़ा है। जो कि निर्धारित स्थान पर फिक्स नहीं है। यह उक्त क्षेत्र में बीआरजीएफ स्कीम के तहत लगाई गई लाइटों की गुणवत्ता व मात्रा को व्यक्त करता है। थर्ड पार्टी की रिपोर्ट के आधार पर बिना लाइट इंचार्ज की जांच के बिना ही अदायगी कर दी गई। इतना ही नहीं लोकअदालत में जब यह मामला गया तो सुनवाई के दौरान तत्कालीन परिषद अभियंता व लाइट इंस्पेक्टर से भी रिपोर्ट नहीं ली गई। एमबी में तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता अरुण कुमार द्वारा अदायगी संबंधी दर्ज टिप्पणी भी संदेहापस्द है। इसलिए जांच रिपोर्ट में तत्कालीन पालिका अभियंता सुबेर सिंह, कनिष्ठ अभियंता अरुण कुमार तथा वर्तमान में कार्यरत पालिका अभियंता राकेश कुमार तथा कनिष्ठ अभियंता भूपेंद्र सिंह को रिकार्ड सहित जांच में शामिल किया जाए।
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तत्कालीन एमई और जेई नहीं जांच में शामिल हुए
जांच रिपोर्ट अनुसार नगरपरिषद के ईओ वीरेंद्र सहारण ने नगरपरिषद अभियंता राकेश कुमार से स्लम एरिया में बीआरजीएफ योजना के संबंध में लगाई गइ स्ट्रीट लाइटों की रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन वह अभी लंबित है। चार मई 2018 को तत्कालीन नगरपरिषद अभियंता सुबेर सिंह तथा कनिष्ठ अभियंता अरुण कुमार को नगरपरिषद के ईओ वीरेंद्र सहारण ने बुलाया था। लेकिन वे उपस्थित नहीं हुए। अभियंता शाखा द्वारा अभी तक केवल बीआरजीएफ के तहत लगाई गई स्ट्रीट लाइट से संबंधित दस्तावेज जैसे प्रशासन स्वीकृति, अनुमान पत्रों, स्टॉक रजिस्टर, वर्क रजिस्टर, बीआरजीएफ अनुदान राशि रजिस्ट्रर, टेंडर रजिस्टर, अदायगी से संबंधित बिल बाऊचर, एमबी वर्क आर्डर, थर्ड पार्टी मोनिटरिंग, लोक अदालत में केस की प्रतियां भी एडीसी कार्यालय को उपलब्ध करवाई गई। लेकिन जांच रिपोर्ट को परिषद अभियंता ने लंबे समय से लंबित रखा। वहीं नगरपरिषद अभियंता सुबेर सिंह व कनष्ठि अभियंता अरुण कुमार का जांच में शामिल न होना अपने आप में संदेह का विषय है।
जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन: एडीसी
मेरे पास रिपोर्ट आई है। हमने इसमें जांच के लिए एक तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। जो कि राशि चैक करेगी, पोल कितने हैं, कहीं दोबारा तो इंट्री नहीं हुई।
मनीष नागपाल,एडीसी सिरसा।
फोटो सात व आठ