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कृषि उन्नत मेले में प्रगतिशील किसान शमशेर सिंह संधू ‘अध्येता किसान पुरस्कार-201
Updated Tue, 20 Mar 2018 01:36 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
सिरसा।
उपमंडल डबवाली के गांव मटदादू निवासी शमशेर सिंह संधू ऐसे प्रगतिशील किसान हैं। जिन्होंने खेती में पुराने पारंपरिक ढर्रे पर न चलते हुए नई कृषि तकनीक अपनाकर उसे लाभकारी तो बनाया ही अपितु दूसरे किसानों को भी राह दिखाई है। इससे देश भर में उनके कृषि कार्यों को सराहा जा रहा है। इसके लिए रविवार को देश के कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने भी नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित कृषि उन्नत मेले में उन्हें ‘अध्येता किसान पुरस्कार-2018’ और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
संस्थान कैंपस में 16 से 18 मार्च तक आयोजित कृषि उन्नत मेले में देश भर से सभी राज्यों के प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इनमें से केवल सात किसानों को ‘अध्येता किसान पुरस्कार-2018’ के लिए चुना गया। संस्थान ने प्रशस्ति पत्र में उनके बारे में लिखा कि कृषि एवं संबद्ध उद्यम में नवीन तकनीकों को अपनाकर उच्च उत्पादकता और आय प्राप्त कर शमशेर ने कृषि को लाभकारी बनाया। कृषि के व्यवसायीकरण में योगदान देकर उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद भी सुलभ कराए। अपने ज्ञान और अनुभव को क्षेत्र के कृषक समुदाय में सांझा किया एवं उन्हें भी लाभदायक कृषि के लिए प्रेरित किया। वे एक सफल कृषि, बीज उत्पादन विशेषज्ञ और कृषि परामर्शदाता हैं। इन्हें किसानों के बीच ग्वार के राजा के नाम से जाना जाता है। गेहूं, जौ, ग्वार, कपास, तिल और सरसों के उत्पादन और साथी किसानों के बीच इसके प्रचार प्रसार में उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए ही भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान-अध्येता पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चुना है।
प्रगतिशील किसान और बीज उत्पादक हैं शमशेर संधू :
शमशेर सिंह संधू ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1980 में खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया। इससे खरीफ फसलों में ग्वार और कॉटन तथा रबी फसलों में गेहूं, जौ और सरसों की फसलों का उत्पादन बढ़ाने में सफलता पाई। वर्ष 1988 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से जुड़ गए और अनेक नई तकनीकों का ज्ञान प्राप्त कर बीज उत्पादन शुरू कर दिया ताकि अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिले। इससे उनकी क्षेत्र में विशेष पहचान गई। अब हरियाणा के अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान और पंजाब के किसानों को भी ग्वार के बीज उपलब्ध करवाते हैं।
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ये मिल चुके हैं पुरस्कार
शमशेर सिंह संधू को वर्ष 2007 में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अच्छे बीज उत्पादक के रूप में पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इसके अलावा हरियाणा के कृषि मंत्री हरमिंद्र सिंह चठ्ठा, वर्ष 2011 केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री हरीश रावत, 2015 में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री सतीश कुमार बालियान पुरस्कृत किया। अब 2018 में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का अध्येता किसान पुरस्कार दिए जाने से देश में डबवाली का गौरव बढ़ा है।
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सिरसा।
उपमंडल डबवाली के गांव मटदादू निवासी शमशेर सिंह संधू ऐसे प्रगतिशील किसान हैं। जिन्होंने खेती में पुराने पारंपरिक ढर्रे पर न चलते हुए नई कृषि तकनीक अपनाकर उसे लाभकारी तो बनाया ही अपितु दूसरे किसानों को भी राह दिखाई है। इससे देश भर में उनके कृषि कार्यों को सराहा जा रहा है। इसके लिए रविवार को देश के कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने भी नई दिल्ली में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा आयोजित कृषि उन्नत मेले में उन्हें ‘अध्येता किसान पुरस्कार-2018’ और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।
संस्थान कैंपस में 16 से 18 मार्च तक आयोजित कृषि उन्नत मेले में देश भर से सभी राज्यों के प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। इनमें से केवल सात किसानों को ‘अध्येता किसान पुरस्कार-2018’ के लिए चुना गया। संस्थान ने प्रशस्ति पत्र में उनके बारे में लिखा कि कृषि एवं संबद्ध उद्यम में नवीन तकनीकों को अपनाकर उच्च उत्पादकता और आय प्राप्त कर शमशेर ने कृषि को लाभकारी बनाया। कृषि के व्यवसायीकरण में योगदान देकर उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद भी सुलभ कराए। अपने ज्ञान और अनुभव को क्षेत्र के कृषक समुदाय में सांझा किया एवं उन्हें भी लाभदायक कृषि के लिए प्रेरित किया। वे एक सफल कृषि, बीज उत्पादन विशेषज्ञ और कृषि परामर्शदाता हैं। इन्हें किसानों के बीच ग्वार के राजा के नाम से जाना जाता है। गेहूं, जौ, ग्वार, कपास, तिल और सरसों के उत्पादन और साथी किसानों के बीच इसके प्रचार प्रसार में उत्कृष्ट योगदान को देखते हुए ही भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान-अध्येता पुरस्कार से सम्मानित करने के लिए चुना है।
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प्रगतिशील किसान और बीज उत्पादक हैं शमशेर संधू :
शमशेर सिंह संधू ने बताया कि उन्होंने वर्ष 1980 में खेती में नई तकनीक का इस्तेमाल शुरू किया। इससे खरीफ फसलों में ग्वार और कॉटन तथा रबी फसलों में गेहूं, जौ और सरसों की फसलों का उत्पादन बढ़ाने में सफलता पाई। वर्ष 1988 में भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान से जुड़ गए और अनेक नई तकनीकों का ज्ञान प्राप्त कर बीज उत्पादन शुरू कर दिया ताकि अन्य किसानों को भी इसका लाभ मिले। इससे उनकी क्षेत्र में विशेष पहचान गई। अब हरियाणा के अलावा आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्यप्रदेश, राजस्थान और पंजाब के किसानों को भी ग्वार के बीज उपलब्ध करवाते हैं।
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ये मिल चुके हैं पुरस्कार
शमशेर सिंह संधू को वर्ष 2007 में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अच्छे बीज उत्पादक के रूप में पुरस्कार देकर सम्मानित किया। इसके अलावा हरियाणा के कृषि मंत्री हरमिंद्र सिंह चठ्ठा, वर्ष 2011 केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री हरीश रावत, 2015 में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री सतीश कुमार बालियान पुरस्कृत किया। अब 2018 में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह से भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान का अध्येता किसान पुरस्कार दिए जाने से देश में डबवाली का गौरव बढ़ा है।