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नौकरी और शिक्षा में जातिय आधारित आरक्षण के खिलाफ बंद का जिला में रहा मिला जुला असर

Wed, 11 Apr 2018 01:37 AM IST
Updated Wed, 11 Apr 2018 01:37 AM IST
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नौकरी और शिक्षा में जातिय आधारित आरक्षण के खिलाफ बंद का जिला में रहा मिला जुला असर
अमर उजाला ब्यूरो
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सिरसा।
आरक्षण के विरोध में सोशल मीडिया पर भारत बंद की अपील का मंगलवार को सिरसा में काफी मिलाजुला असर दिखाई दिया। सुबह ही आरक्षण विरोधी लोग शहर में बाजार बंद करवाने निकल पड़े, जिसके परिणाम स्वरूप शहर में कई स्थानों पर दोपहर तक बाजार बंद रहे, जबकि कई बाजारों में दुकानें कुछ देर के लिए बंद रहीं। बंद को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के कडे़ बंदोबस्त किए गए थे, जिसके चलते शहर में कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। पुलिस प्रशासन की ओर से हर चौक-चौराहे पर पुलिस व होमगार्ड जवानों की तैनाती की गई। जिला प्रशासन की ओर से ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्त भी की गई थी। शाम को बंद शांतिपूर्वक निपटने के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली।
जानकारी के अनुसार आरक्षण के विरोध में सोशल मीडिया पर दस अप्रैल को भारत बंद की अपील के चलते मंगलवार सुबह आरक्षण की खिलाफ करने वाले लोग सुबह बाजारों में एकत्रित होना शुरू हो गए। ये लोग टोलियां बनाकर बाजारों में घूमने लगे और हाथ जोड़कर कारोबारियों से आरक्षण के खिलाफ अपने प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील करने लगे। शांति पूर्वक की गई अपील का कारोबारियाें व दुकानदारों पर काफी असर हुआ और उन्होंने अपने प्रतिष्ठान व दुकानें स्वेच्छा से बंद करनी शुरू कर दी। कई दुकानदारों ने कुछ देर तक ही अपनी दुकानें बंद रखी। रोड़ी बाजार, भादरा बाजार, पालिका बाजार, भगत सिंह चौक, रानियां गेट, सुरतगढ़िया बाजार, सरकुलर रोड आदि बाजारों में दुकानें कुछ देर तक बंद रही। कई स्थानों पर ऐसा देखने को मिला जहां प्रदर्शनकारियों ने जबरन दुकानें बंद करवाई। शहर का बरनाला रोड दोपहर दो बजे तक बिलकुल बंद रहा। ज्यादातर दुकानदारों ने आरक्षण की खिलाफत को अपना समर्थन दिया। वहीं, डबवाली, रानियां, ऐलनाबाद व कालांवाली में भी बंद का मिलाजुला रहा।
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योग्यता के साथ नहीं हो रहा न्याय
आरक्षण के खिलाफ एकजुट होकर आरक्षण विरोध मोर्चा के लोगों ने भगत सिंह और सुभाष चौक पर जोरदार प्रदर्शन भी किया। आरक्षण विरोधी घन श्याम दास मित्तल, विकास मुंजाल, जितेंद्र कुमार, टोनी जैन आदि ने कहा कि सरकार को आरक्षण खत्म करना चाहिए। नौकरी और शिक्षा में जाति आधारित आरक्षण के कारण योग्यता के साथ न्याय नहीं हो रहा। इसलिए नई पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य के लिए आरक्षण को हर हाल में समाप्त किया जाना चाहिए। दो अप्रैल को दलित समुदाय की ओर से किए गए भारत बंद के दिन लाठियों के जोर पर बाजार बंद करवाए गए थे, लेकिन मंगलवार को हाथ जोड़कर आरक्षण के खिलाफ हाथ जोड़कर समर्थन मांगा गया। कारोबारियों व दुकानदारों ने अपनी इच्छा से इस मुहिम को अपना समर्थन दिया है।
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कड़ी सतर्कता की थी एडवाइजरी
आरक्षण के खिलाफ भारत बंद को लेकर गृह विभाग की ओर से जिला प्रशासन को कड़ी सतर्कता की एडवाइजरी जारी की गई थी, जिसके चलते प्रशासन ने ड्यूटी मजिस्ट्रेट की नियुक्त कर शहर में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की। सुबह जैसे ही आरक्षण की खिलाफत करने वाले लोग एकजुट होना शुरू हुए पुलिस फोर्स उनके आसपास मौजूद रही। शहर थाना प्रभारी इंस्पेक्टर अमित बैनीवाल के नेतृत्व में पुलिस फोर्स प्रदर्शनकारियों के साथ-साथ चलती रही। बंद की शांतिपूर्वक अपील के चलते प्रशासन को ज्यादा परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा। शाम को शांति पूर्वक बंद निपटने के साथ ही पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने राहत की सांस ली।

सोशल मीडिया पर थी पैनी नजर
प्रशासन की ओर से की गई सुरक्षा व्यवस्था का आलम ऐसा था कि सड़क से लेकर सोशल मीडिया पर सुरक्षा एजेंसियों की पैनी नजर रख रही थी। सोशल मीडिया पर कहीं कोई गलत संदेश न फैल पाए इस खास ध्यान रखा जा रहा था। सीआईडी व आईबी के कर्मचारी प्रदर्शनकारियों के बीच और सोशल साइटों पर बंद को लेकर किए जा रहे कमेंट व सूचनाओं की अपडेट सीनियर ऑफिसरों को लगातार देते रहे।

कोई नेता नहीं आया समर्थन करने
दो मार्च को दलित समुदाय द्वारा किए गए भारत बंद के दौरान सिरसा जिले में विभिन्न राजनैतिक दलों के स्थानीय नेता ने दलित समुदाय के लोगों के बीच जाकर उन्हें अपना समर्थन देते रहे, जबकि मंगलवार को आरक्षण के खिलाफ बंद को लेकर एक भी नेता विरोध कर रहे लोगों के बीच नहीं आया। आरक्षण विरोधियों में इस बात को लेकर भी काफी गुस्सा देखने को मिला। आरक्षण का विरोध करने वाले लोगों का कहना है कि वोट बैंक की राजनीति करने वाले नेताओं का यह रवैया देश हित में ठीक नहीं है।


सुप्रीम कोर्ट की चिंता के बाद बदले हालत
मार्च माह में सुप्रीम कोर्ट ने एससी/एसटी एक्ट के गलत इस्तेमाल होने पर चिंता जाहिर करते हुए कुछ बदलाव किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था बिना मामले की जांच के किसी को गिरफ्तार नहीं किया जाना चाहिए। ऐसे में दलित समुदाय और कुछ राजनीतिक दल दो अप्रैल को भारत बंद कर सड़कों पर उतर आए थे। इनका कहना था कि इससे दलितों के विरूद्ध हिंसा के मामले और ज्यादा बढ़ेंगे। बंद के दौरान प्रदेश में काफी माहौल खराब हो गया था।
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