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Sirsa News: 7 राजमिस्त्री, 60 सेवादार, एक प्रण... महिला को मिले पक्का मकान
Mon, 15 Jun 2026 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
संवाद न्यूज एजेंसी, सिरसा
Updated Mon, 15 Jun 2026 11:30 PM IST
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रोड़ी में महिला का मकान बनाते डेरा अनुयायी।
रोड़ी। गांव थिराज में एक महिला की सालों पुरानी पक्के मकान की समस्या का एक डेरे के सेवादारों ने एक दिन में समाधान कर दिया। सोमवार को सात राजमिस्त्री व 60 सेवादारों ने मिलकर 24 घंटे के अंदर विधवा महिला का मकान बना दिया। महिला सहित गांव के लोगों ने सेवादारों का आभार जताया।
ग्रामीणों के अनुसार गांव थिराज निवासी गुलाब कौर के पति हरदम सिंह की करीब 9 वर्ष पहले मौत हो गई थी। गुलाब कौर के 3 बच्चे हैं जिनमें से एक बेटा व एक बेटी शादीशुदा है और एक बेटा दिहाड़ी-मजदूरी करता है। बड़ा बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ है। करीब एक वर्ष पहले बरसात के कारण गुलाब कौर का कच्चा मकान ढह गया। इसके बाद से ही वह टीन की छत युक्त कच्चे भूसे वाले मकान में अपने बेटों व पुत्रवधू के साथ रह रही थी। छोटा बेटा जैसे-तैसे कर घर का खर्च व बड़े भाई व मां की दवाइयों का खर्च चला पा रहा था।
गुलाब कौर ने बताया कि पक्का मकान बनाना हमारी पहुंच से बाहर था। इतना ही नहीं, हम तो टूटे मकान की छत तक नहीं लगवा पा रहे थे। इस बारे में ब्लॉक रोड़ी के सेवादारों को पता चला तो उन्होंने इंसानियत के नाते मकान बनाने का संकल्प लिया।
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सुबह शुरू हुआ और शाम तक बन गया मकान
डेरे के सेवादारों ने सुबह गुलाब कौर का मकान बनाने का काम शुरू किया। पहले मलबा हटा और बाद में सात मिस्त्री व सेवादार अपने काम में लग गए। देखते ही देखते पक्का मकान बनकर तैयार हो गया। सेवादारों ने काम करने वालों के लिए खाने पीने की व्यवस्था स्वयं की। 2 कमरों का पक्का मकान बनाकर तैयार कर दिया।
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सपने में नहीं सोचा था पक्का मकान बना पाएंगे
गुलाब कौर ने कहा कि मकान गिरने के बाद घर के हालात बेहद खराब हो गए थे। छोटा बेटा मेरी और बड़े बेटे की दवा और घर खर्च ही पूरा कर पाया था। घर का गुजारा हो जाता था इतना ही बहुत था। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि पक्का मकान बना पाएंगे। आज सेवादारों ने हमारे लिए जो किया वह सपने से कम नहीं हैं। मैं दिल से दुआ करती हूं कि सेवादारों पर भगवान की कृपा बनी रहे।
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ब्लॉक की बैठक में गुलाब कौर के मकान को लेकर विचार9विमर्श हुआ था। उसके बाद सेवादारों ने निर्णय लिया था कि गुलाब कौर को आशियाना बनाकर दिया जाए। सभी ने मिलकर आज दो कमरों का मकान गुलाब कौर को बनाकर दिया है। इंसानियत की सेवा से बढक़र कोई सेवा नहीं है।
-पवन कुमार मैहता, ब्लॉक प्रेमी सेवक रोड़ी।
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ग्रामीणों के अनुसार गांव थिराज निवासी गुलाब कौर के पति हरदम सिंह की करीब 9 वर्ष पहले मौत हो गई थी। गुलाब कौर के 3 बच्चे हैं जिनमें से एक बेटा व एक बेटी शादीशुदा है और एक बेटा दिहाड़ी-मजदूरी करता है। बड़ा बेटा मानसिक रूप से अस्वस्थ है। करीब एक वर्ष पहले बरसात के कारण गुलाब कौर का कच्चा मकान ढह गया। इसके बाद से ही वह टीन की छत युक्त कच्चे भूसे वाले मकान में अपने बेटों व पुत्रवधू के साथ रह रही थी। छोटा बेटा जैसे-तैसे कर घर का खर्च व बड़े भाई व मां की दवाइयों का खर्च चला पा रहा था।
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गुलाब कौर ने बताया कि पक्का मकान बनाना हमारी पहुंच से बाहर था। इतना ही नहीं, हम तो टूटे मकान की छत तक नहीं लगवा पा रहे थे। इस बारे में ब्लॉक रोड़ी के सेवादारों को पता चला तो उन्होंने इंसानियत के नाते मकान बनाने का संकल्प लिया।
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सुबह शुरू हुआ और शाम तक बन गया मकान
डेरे के सेवादारों ने सुबह गुलाब कौर का मकान बनाने का काम शुरू किया। पहले मलबा हटा और बाद में सात मिस्त्री व सेवादार अपने काम में लग गए। देखते ही देखते पक्का मकान बनकर तैयार हो गया। सेवादारों ने काम करने वालों के लिए खाने पीने की व्यवस्था स्वयं की। 2 कमरों का पक्का मकान बनाकर तैयार कर दिया।
सपने में नहीं सोचा था पक्का मकान बना पाएंगे
गुलाब कौर ने कहा कि मकान गिरने के बाद घर के हालात बेहद खराब हो गए थे। छोटा बेटा मेरी और बड़े बेटे की दवा और घर खर्च ही पूरा कर पाया था। घर का गुजारा हो जाता था इतना ही बहुत था। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि पक्का मकान बना पाएंगे। आज सेवादारों ने हमारे लिए जो किया वह सपने से कम नहीं हैं। मैं दिल से दुआ करती हूं कि सेवादारों पर भगवान की कृपा बनी रहे।
ब्लॉक की बैठक में गुलाब कौर के मकान को लेकर विचार9विमर्श हुआ था। उसके बाद सेवादारों ने निर्णय लिया था कि गुलाब कौर को आशियाना बनाकर दिया जाए। सभी ने मिलकर आज दो कमरों का मकान गुलाब कौर को बनाकर दिया है। इंसानियत की सेवा से बढक़र कोई सेवा नहीं है।
-पवन कुमार मैहता, ब्लॉक प्रेमी सेवक रोड़ी।