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कैटल फ्री जिला होने के बावजूद हादसों का पर्याय बन रहे हैं आवारा पशु
Updated Sat, 11 Aug 2018 02:24 AM IST
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कैटल फ्री जिला फिर सड़कों पर घूम रहे लावारिस पशु
सिरसा। भले ही जिला प्रशासन ने वर्ष 2017 में सिरसा को कैटल फ्री जिला घोषित कर दिया हो, लेकिन एक बार फिर सड़कों पर लावारिस पशु घूम रहे हैं। पिछले करीब दस दिनों में लावारिस पशुओं से टकराकर पांच लोगों की मौत हो चुकी है। हादसों के बाद भी प्रशासन समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। हालांकि नगर परिषद ने कुछ समय पूर्व अभियान चलाकर लावारिस घूम रहे कुछ पशुओं को नंदीशाला में पहुंचाया था। अभी भी शहर को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर लावारिस पशुओं का जमघट देखा जा सकता है। इनमें टैग लगे हुए पशु भी शामिल हैं।
जिले में है सबसे अधिक गोशाला
कहने को तो सिरसा जिले में प्रदेश में सबसे अधिक 80 से 90 के लगभग गोशालाएं व नंदीशालाएं हैं। हजारों पशुओं को इनमें आश्रय मिला हुआ है। लोग कहने को तो गोमाता को माता का दर्जा देते हैं। लेकिन वही माता सड़कों पर घूमकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। सड़कों के किनारे हरा चारा डालने पर प्रशासन ने रोक लगाई थी। लेकिन बावजूद इसके लोगों द्वारा सड़कों के किनारों पर चारा डाला जाता है। जिससे न केवल गंदगी फैलती है। बल्कि ये पशु चारे के लिए आपस में टकराते हैं और लोगों के लिए मुसीबत बनते हैं। दस दिनों में पांच लोग गंवा चुके हैं जान
बता दें कि पिछले दस दिनों के दौरान शहर में पांच लोग आवारा पशुओं के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। पहले मामले में बरनाला रोड स्थित जेसीडी के पास मेहनाखेड़ा निवासी बाइक सवार के आगे आवारा पशु आ गया। जिससे गंभीर चोटें लगने के कारण उसकी मौत हो गई। दूसरे हादसे में गांव कोटली के पास हिसार निवासी एक व्यक्ति की बाइक सांड से टकरा गई। जिससे बाइक सवार व्यक्ति व सांड दोनों की मौत हो गई थी। तीसरे हादसे में गांव पनिहारी के निवासी युवक की सिरसा से गांव लौटते वक्त गांव के निकट ही रोड पर आवारा पशु के आगे आने से मौत हो गई। चौथी घटना में दिल्ली पुल के निकट आवारा पशु के आगे आने से गाड़ी सवार पंजाब के एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। 5वें हादसे में सिरसा-भादरा मार्ग पर गांव बेगू के निकट बाइक के आगे आवारा पशु आने के कारण व्यक्ति की मौत हो चुकी है।
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कोट्स:
शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया हुआ है। केलनियां में 6 एकड़ में नंदीशाला बनाने के लिए टेंडर किया जा चुका है। नगरपरिषद शहर को आवारा पशुओं को मुक्त करने का प्रयास कर रही है।
देवेंद्र बिश्नोई, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर, सिरसा।
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सिरसा। भले ही जिला प्रशासन ने वर्ष 2017 में सिरसा को कैटल फ्री जिला घोषित कर दिया हो, लेकिन एक बार फिर सड़कों पर लावारिस पशु घूम रहे हैं। पिछले करीब दस दिनों में लावारिस पशुओं से टकराकर पांच लोगों की मौत हो चुकी है। हादसों के बाद भी प्रशासन समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहा है। हालांकि नगर परिषद ने कुछ समय पूर्व अभियान चलाकर लावारिस घूम रहे कुछ पशुओं को नंदीशाला में पहुंचाया था। अभी भी शहर को जोड़ने वाले मुख्य मार्गों पर लावारिस पशुओं का जमघट देखा जा सकता है। इनमें टैग लगे हुए पशु भी शामिल हैं।
जिले में है सबसे अधिक गोशाला
कहने को तो सिरसा जिले में प्रदेश में सबसे अधिक 80 से 90 के लगभग गोशालाएं व नंदीशालाएं हैं। हजारों पशुओं को इनमें आश्रय मिला हुआ है। लोग कहने को तो गोमाता को माता का दर्जा देते हैं। लेकिन वही माता सड़कों पर घूमकर दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर हैं। सड़कों के किनारे हरा चारा डालने पर प्रशासन ने रोक लगाई थी। लेकिन बावजूद इसके लोगों द्वारा सड़कों के किनारों पर चारा डाला जाता है। जिससे न केवल गंदगी फैलती है। बल्कि ये पशु चारे के लिए आपस में टकराते हैं और लोगों के लिए मुसीबत बनते हैं। दस दिनों में पांच लोग गंवा चुके हैं जान
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बता दें कि पिछले दस दिनों के दौरान शहर में पांच लोग आवारा पशुओं के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं। पहले मामले में बरनाला रोड स्थित जेसीडी के पास मेहनाखेड़ा निवासी बाइक सवार के आगे आवारा पशु आ गया। जिससे गंभीर चोटें लगने के कारण उसकी मौत हो गई। दूसरे हादसे में गांव कोटली के पास हिसार निवासी एक व्यक्ति की बाइक सांड से टकरा गई। जिससे बाइक सवार व्यक्ति व सांड दोनों की मौत हो गई थी। तीसरे हादसे में गांव पनिहारी के निवासी युवक की सिरसा से गांव लौटते वक्त गांव के निकट ही रोड पर आवारा पशु के आगे आने से मौत हो गई। चौथी घटना में दिल्ली पुल के निकट आवारा पशु के आगे आने से गाड़ी सवार पंजाब के एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। 5वें हादसे में सिरसा-भादरा मार्ग पर गांव बेगू के निकट बाइक के आगे आवारा पशु आने के कारण व्यक्ति की मौत हो चुकी है।
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शहर की सड़कों पर घूम रहे आवारा पशुओं को पकड़ने का अभियान चलाया हुआ है। केलनियां में 6 एकड़ में नंदीशाला बनाने के लिए टेंडर किया जा चुका है। नगरपरिषद शहर को आवारा पशुओं को मुक्त करने का प्रयास कर रही है।
देवेंद्र बिश्नोई, चीफ सेनेटरी इंस्पेक्टर, सिरसा।