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पुलिस के आप्रेशन प्रबल प्रहार पर पूर्व बार एसोसिएशन के प्रधान ने उठाए सवाल
Updated Fri, 07 Sep 2018 02:08 AM IST
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पुलिस के ऑपरेशन प्रबल प्रहार पर बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान ने उठाए सवाल
सिरसा। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान गुररत्न पाल किंगरे ने जिला पुलिस द्वारा नशा तस्करी रोकने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रबल प्रहार पर सवालिया निशान लगाए हैं। किंगरे ने कहा कि पुलिस बड़े मगरमच्छों को छोड़कर छोटी मछलियों को ही पकड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रबल प्रहार की आड़ में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच किसी जज से करवाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबल प्रहार की आड़ में पुलिस के कुछ अफसरों की तस्करों के साथ सांठगांठ है। जो क्षेत्र के युवाओं को नशे की गर्त में धकेल रहे हैं और पैसा इकट्ठा करने में लगे हैं। उन्होंने एक ऑडियो रिकार्डिंग भी सुनाई। जिसमें पुलिस सही स्थान की जगह दस किमी आगे चली गई और इस दौरान तस्कर निकल गये। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारी चिट्टे के प्रभाव में है। पुलिस कर्मचारियों का डोप टेस्ट करवाया जाना चाहिए। जब वे खुद ही चिट्टे के प्रभाव में हैं तो उनसे कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे तस्करों को पकड़ेंगे। उन्होंने बताया कि उनके पास पुख्ता सबूत है, जो वे जांच एजेंसी को देंगे। किंगरे ने कहा कि प्रबल प्रहार अभियान की आड़ में युवा क्लबों व युवाओं का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। वे अपने संबंध खराब कर तस्करों से दुश्मनी मोल ले रहे हैं। किंगरे ने कहा कि इन भ्रष्ट अधिकारियों के कारण ईमानदार पुलिस कर्मी भी पीड़ित है। एक वरिष्ठ अधिकारी की झूठी शिकायत देकर तबादला करवा दिया गया क्योंकि वह तस्करों व इनके आड़े आ रहा था। उन्होंने रानियां थाने में दर्ज एफआईआर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में 30 लाख रुपये लेकर आरोपित को छोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत जितनी भी बड़ी रिकवरी हुई है, उनमें अनेक व्यक्तियों को छोड़ा गया है।
कोट्स:
-पुलिस पर लगाए गए आरोप निराधार व बेबुनियाद हैं। पुलिस के प्रबल प्रहार के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पुलिस ने आमजन के सहयोग से नशे के सौदागरों को काबू करने में सफलता हासिल की है। केवल हरियाणा ही नहीं सात राज्यों के प्रशासन ने सिरसा पुलिस के प्रबल प्रहार को सराहा है। अगर उनके पास कोई सबूत हैं तो वे जनता के समक्ष प्रस्तुत करें।
-सुरजीत सिंह सहारण, पुलिस प्रवक्ता सिरसा।
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सिरसा। जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान गुररत्न पाल किंगरे ने जिला पुलिस द्वारा नशा तस्करी रोकने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन प्रबल प्रहार पर सवालिया निशान लगाए हैं। किंगरे ने कहा कि पुलिस बड़े मगरमच्छों को छोड़कर छोटी मछलियों को ही पकड़ रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी प्रबल प्रहार की आड़ में हो रहे भ्रष्टाचार की जांच किसी जज से करवाएं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबल प्रहार की आड़ में पुलिस के कुछ अफसरों की तस्करों के साथ सांठगांठ है। जो क्षेत्र के युवाओं को नशे की गर्त में धकेल रहे हैं और पैसा इकट्ठा करने में लगे हैं। उन्होंने एक ऑडियो रिकार्डिंग भी सुनाई। जिसमें पुलिस सही स्थान की जगह दस किमी आगे चली गई और इस दौरान तस्कर निकल गये। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग के कुछ कर्मचारी चिट्टे के प्रभाव में है। पुलिस कर्मचारियों का डोप टेस्ट करवाया जाना चाहिए। जब वे खुद ही चिट्टे के प्रभाव में हैं तो उनसे कैसे उम्मीद की जा सकती है कि वे तस्करों को पकड़ेंगे। उन्होंने बताया कि उनके पास पुख्ता सबूत है, जो वे जांच एजेंसी को देंगे। किंगरे ने कहा कि प्रबल प्रहार अभियान की आड़ में युवा क्लबों व युवाओं का गलत इस्तेमाल किया जा रहा है। वे अपने संबंध खराब कर तस्करों से दुश्मनी मोल ले रहे हैं। किंगरे ने कहा कि इन भ्रष्ट अधिकारियों के कारण ईमानदार पुलिस कर्मी भी पीड़ित है। एक वरिष्ठ अधिकारी की झूठी शिकायत देकर तबादला करवा दिया गया क्योंकि वह तस्करों व इनके आड़े आ रहा था। उन्होंने रानियां थाने में दर्ज एफआईआर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस मामले में 30 लाख रुपये लेकर आरोपित को छोड़ा गया था। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत जितनी भी बड़ी रिकवरी हुई है, उनमें अनेक व्यक्तियों को छोड़ा गया है।
कोट्स:
-पुलिस पर लगाए गए आरोप निराधार व बेबुनियाद हैं। पुलिस के प्रबल प्रहार के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। पुलिस ने आमजन के सहयोग से नशे के सौदागरों को काबू करने में सफलता हासिल की है। केवल हरियाणा ही नहीं सात राज्यों के प्रशासन ने सिरसा पुलिस के प्रबल प्रहार को सराहा है। अगर उनके पास कोई सबूत हैं तो वे जनता के समक्ष प्रस्तुत करें।
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-सुरजीत सिंह सहारण, पुलिस प्रवक्ता सिरसा।