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जिले में 1300 पशु लंपी से संक्रमित, 29 की हो चुकी मौत, पशुपालन विभाग ने न तो फॉगिंग करवाई न ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 10 Aug 2022 11:12 PM IST
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1300 animals infected with lumpen in the district, 29 have died, animal husbandry department neither fogging nor sprayed pesticides
श्री गोशाला सिरसा में चारा खातीं गाय। संवाद - फोटो : Sirsa
सिरसा। जिले में अब तक करीब 1300 पशु लंपी बीमारी से संक्रमित हो चुके हैं और 29 पशुओं की मौत हो चुकी है। पशुपालन विभाग ने 44 संक्रमित पशुओं के सैंपल लिए हैं, जिन्हें जांच के लिए भोपाल स्थित लैब भेजा जा चुका है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कुल संक्रमित पशुओं में से 700 रिकवरी हो चुके हैं। विभाग की ओर से इस वायरस से बचाव को लेकर टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है।
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जिला में लंपी बीमारी से ग्रस्त केस लगातार बढ़ते नजर आ रहे हैं। इसका प्रभाव सबसे अधिक कालांवाली व डबवाली क्षेत्र में अधिक बताया जा रहा है। दूसरी ओर ज्यादा प्रभाव चोपटा तथा ऐलनाबाद क्षेत्र में देखा जा रहा है। हालांकि शहर और आसपास इसका अधिक प्रभाव नहीं है। लंपी स्कीन डिजीज वायरस के लिए अभी तक कोई विशेष वैक्सीन तैयार नहीं हुई है। पशुपालन विभाग की ओर से न तो फॉगिंग करवाई जा रही है और न ही किसी प्रकार के कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है। वहीं कुछ गोशालाओं की ओर से निजी स्तर पर ही वैक्सीनेशन किया जा रहा है।
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गोशाला संघ के पदाधिकारी कर रहे गोशालाओं का दौरा
जिला की विभिन्न गोशालाओं के पदाधिकारी गोशालाओं का दौरा का जायजा ले रहे है। गोसेवक योगेश बिश्नोई ने बताया की अब तक उन्होंने करीब 20 गोशालाओं का दौरा किया है। जिनमें से सादेवाला गोशाला में 20, मेहनाखेड़ा में 15, डबवाली में 46 तथा गंगा में करीब 30 से 35 पशु लंपी से संक्रमित पाए हैं।
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शहर की श्री गोशाला में अब तक नहीं एक भी मामला
शहर की श्री गोशाला में लंपी बीमारी से एक भी संक्रमित पशु नहीं पाया गया है। इस गोशाला में करीब 2300 पशु हैं। गोशाला के प्रबंधक पीके सिंवर ने बताया कि सभी पशुओं का वैक्सीनेशन करवा दिया है। इसलिए बचाव है और बीते वर्ष भी यह बीमारी सामने आई थी। इस दौरान करीब एक सौ पशु संक्रमित हुए थे। इनमें से 1 गाय की मौत भी हुई थी, लेकिन इस बार शून्य है। उन्होंने बताया की निजी कंपनी की 2400 डोज मंगवाई गई है, लेकिन सरकारी कोई वैक्सीन अभी तक नहीं आई है। लेकिन गोटापोक्स नामक दवाई से भी इस राहत देखने को मिली है।

वायरल जनित बीमारी होने के कारण इसका कोई स्पेसिफिक उपचार नहीं है। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखा जाता है तथा लक्षण के अनुसार पशु का इलाज किया जाता है। गांठों पर एंटीसेप्टिक दवाई का लेप लगाना चाहिए। तरल व नरम भोजन खिलाना चाहिए तथा हरे चारे की मात्रा प्रचुर मात्रा में होनी चाहिए। पशुपालन एवं डेरिंग विभाग, सिरसा 60 पशु चिकित्सालयों व 168 पशु औषधालयों में रोग ग्रस्त पशुओं को आवश्यकता अनुसार उपचार मुहैया कर रहा है। उपमंडल स्तर पर, विभागीय उपमंडल अधिकारी, निरंतर इस रोग की रोकथाम हेतु क्षेत्रीय टीमों से संपर्क बनाते हुए निगरानी कर रहे है। डॉ. विद्यासागर बांसल, उपनिदेशक, पशुपालन विभाग
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