फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Sirsa News ›   मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने लघु सचिवालय में डाला अनिश्चितकालीन डेरा

मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने लघु सचिवालय में डाला अनिश्चितकालीन डेरा

Wed, 06 Dec 2017 12:22 AM IST
Updated Wed, 06 Dec 2017 12:22 AM IST
विज्ञापन
मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने लघु सचिवालय में डाला अनिश्चितकालीन डेरा
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

सिरसा।
ओलावृष्टि और सफेद मक्खी से खराब फसल के बकाया 72 करोड़ मुआवजे की मांग को लेकर किसानों ने मंगलवार को लघु सचिवालय में डेरा डाल दिया। हरियाणा किसान मंच के बैनर तले सैकड़ों किसान लघु सचिवालय पहुंचे और उपायुक्त कार्यालय परिसर के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठ गए। दोपहर को सैकड़ों किसान ट्रैक्टर ट्रालियों में सवार होकर लघु सचिवालय पहुंचे थे। धरना लंबा चलने की संभावना को देखते हुए किसान अपने साथ चादरें, गद्दे, गैस चूल्हा, हुक्का, खाना पकाने के बर्तन आदि अपने साथ लेकर आए। वहां पहुंचते ही किसानों ने बीजेपी सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।
ये है मामला
हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा के नेतृत्व में प्रदर्शन कर रहे किसानों ने कहा कि एक वर्ष पूर्व ओढां और डबवाली क्षेत्र के कई गांवों में ओलावृष्टि और सफेद मक्खी से किसानों की फसलें खराब हुई थीं, जिसके लिए किसानों ने आवेदन किया था। अधिकारियों ने अपनी मनमानी करते हुए जिन गांवों के किसानों का नुकसान हुआ था, उनकी जगह अन्य गांवों के नाम भेज दिए, जिसके कारण पात्र किसान मुआवजे से वंचित रह गए। किसानों को संबोधित करते हुए प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि सरकार ने जो फसल बीमा योजना शुरू की है, वह किसानों के लिए राहत की बजाय आफत बन गई है। उन्होंने बताया कि किसानों के खातों से फसल बीमा योजना के तहत राशि तो काटी जा रही है, लेकिन उसका लाभ नहीं दिया जा रहा। करीब 72 करोड़ रुपये मुआवजा अभी भी बकाया पड़ा है। उन्होंने किसानों की मांगों, जिनमें बीमा क्लेम की राशि तुरंत देने, ट्रैक्टर पर लगाए गए टैक्स को हटाने और फसल बीमा का कार्य निजी एजेंसी की बजाय सरकारी एजेंसियों को देने की मांग की।
विज्ञापन


ज्ञापन लेने पहुंचे नगराधीश
प्रदर्शनकारी किसानों के बीच ज्ञापन लेने के लिए नगराधीश सुरेंद्र बेनीलाल पहुंचे। किसानों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन नगराधीश को सौंपा। नगराधीश ने किसानों से कहा कि उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा, धरना समाप्त कर दो। इसके जवाब में हरियाणा किसान मंच के प्रदेशाध्यक्ष प्रहलाद सिंह भारूखेड़ा ने कहा कि काफी समय से किसान मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी कोई सुनवाई नहीं कर रही। अब किसानों को धरना तभी समाप्त होगा जब सरकार किसानों को मुआवजा राशि प्रदान कर देगी। तब तक किसान लघु सचिवालय में दिनरात धरने पर बैठे रहेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन


नाश्ता और डिनर धरना स्थल पर
धरने में शामिल होने आए सैकड़ों किसानों ने धरना स्थल को ही अपना अस्थाई ठिकाना बना लिया है। यहीं पर नाश्ता, चाय, पानी और डिनर बनाने की व्यवस्था उनके द्वारा की गई है। किसानों की एक टीम अपने साथियों के लिए भोजन और चाय बनाने में जुटी रहेगी। हुक्के का प्रबंध भी किसानों के लिए किया गया है। दिन में हुक्का पीने के साथ-साथ सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रहेगी। रात को धरना स्थल पर ही रात गुजारी जाएगी। सर्द रात में सोने के लिए किसानों ने रजाई और कंबल भी मंगवाए हैं। हरियाणा किसान मंच जिलाध्यक्ष साहब राम ताजिया का कहना है कि किसानों का खेतों में बिजाई का काम पूरा हो चुका है, ऐसे में अब जब तक सरकार उनकी मांगें नहीं मानती धरना स्थल ही उनका अस्थाई निवास होगा।

ये हैं मुख्य मांगें
- किसानों को अति शीघ्र बकाया मुआवजा अदा किया जाए।
- किसानों को कर्ज मुक्त किया जाए।
- नरमें की प्रति एकड़ औसत 12 क्विंटल तथा गेहूं की 25 क्विंटल की जाए।
- ट्रैक्टर पर टैक्स लगाना बंद करो।
- 72 करोड़ बकाया मुआवजा अति शीघ्र किसानों को वितरित किया जाए।
- फसलों का भाव फैक्ट्रियों के सामान अनुसार तय किया जाए।
- देश में सभी वस्तुआें का भाव तय करने का एक फार्मूला लागू हो।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed