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Rohtak News: स्वस्थ होगी नारी और बेहतर निभाएगी जिम्मेदारी
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के महिला अध्ययन केंद्र ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण संवेदीकरण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम का विषय महिलाओं का समग्र स्वास्थ्य रहा। कार्यक्रम का उद्देश्य महिलाओं को उनके शारीरिक, मानसिक और सामाजिक स्वास्थ्य के महत्व के बारे में जागरूक करना था। वक्ताओं ने कहा कि नारी शक्ति आज हर क्षेत्र में कामयाबी का परचम लहरा रही है। वह स्वस्थ होगी अपनी जिम्मेदारी को और बेहतर निभाएगी।
यह कार्यक्रम राधाकृष्णन सभागार में आयोजित किया गया। भारतीय पुनर्वास परिषद की अध्यक्षा डॉ. शरणजीत कौर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। मनोविज्ञान विभाग की सेवानिवृत्त प्रो. और पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रोमिला बतरा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। प्राचार्य डॉ. अरुणा तनेजा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रही। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. शशि रश्मि ने किया। मंच संचालन शोधार्थी अजय ने किया।
डॉ. शरणजीत कौर ने कहा कि हमें वर्तमान में जीना सीखना चाहिए और जीवन में खुशहाली के लिए यह बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें हर परिस्थिति में खुद को ढालना सीखना चाहिए और व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों के महत्व को समझना चाहिए। प्रो. प्रोमिला बतरा ने कहा कि महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वास्थ्य, सामाजिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अच्छे पोषण और शारीरिक गतिविधियों के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के लिए सामंजस्य कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
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डॉ. अरुणा तनेजा ने कहा कि महिलाओं का समाज, देश और विश्व में महत्वपूर्ण योगदान होता है और हर महिला को अपनी विशिष्ट पहचान बनानी चाहिए। महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. शालिनी सिंह ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. सर्वदीप कोहली, डीन सीडीसी प्रो. विनीता हुड्डा, चीफ वार्डन गर्ल्स प्रो. सपना गर्ग, यूसीएस निदेशक प्रो. विनीता शुक्ला, सीडीएस प्रभारी डॉ. प्रतिमा रंगा, एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ. सविता राठी और मनोविज्ञान विभाग के अन्य प्राध्यापक भी उपस्थित थे। एमडीयू की महिला कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में भाग लिया।
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यह कार्यक्रम राधाकृष्णन सभागार में आयोजित किया गया। भारतीय पुनर्वास परिषद की अध्यक्षा डॉ. शरणजीत कौर मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। मनोविज्ञान विभाग की सेवानिवृत्त प्रो. और पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. प्रोमिला बतरा मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुईं। प्राचार्य डॉ. अरुणा तनेजा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रही। कार्यक्रम में आभार प्रदर्शन कार्यक्रम समन्वयक डॉ. शशि रश्मि ने किया। मंच संचालन शोधार्थी अजय ने किया।
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डॉ. शरणजीत कौर ने कहा कि हमें वर्तमान में जीना सीखना चाहिए और जीवन में खुशहाली के लिए यह बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि हमें हर परिस्थिति में खुद को ढालना सीखना चाहिए और व्यक्तिगत और सामाजिक संबंधों के महत्व को समझना चाहिए। प्रो. प्रोमिला बतरा ने कहा कि महिलाओं के समग्र स्वास्थ्य के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरणीय स्वास्थ्य, सामाजिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने अच्छे पोषण और शारीरिक गतिविधियों के महत्व पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के लिए सामंजस्य कौशल विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
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डॉ. अरुणा तनेजा ने कहा कि महिलाओं का समाज, देश और विश्व में महत्वपूर्ण योगदान होता है और हर महिला को अपनी विशिष्ट पहचान बनानी चाहिए। महिला अध्ययन केंद्र की निदेशक प्रो. शालिनी सिंह ने स्वागत भाषण दिया और कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत की।
इस कार्यक्रम में मनोविज्ञान विभाग की अध्यक्ष प्रो. सर्वदीप कोहली, डीन सीडीसी प्रो. विनीता हुड्डा, चीफ वार्डन गर्ल्स प्रो. सपना गर्ग, यूसीएस निदेशक प्रो. विनीता शुक्ला, सीडीएस प्रभारी डॉ. प्रतिमा रंगा, एनएसएस कोऑर्डिनेटर डॉ. सविता राठी और मनोविज्ञान विभाग के अन्य प्राध्यापक भी उपस्थित थे। एमडीयू की महिला कर्मचारियों ने बड़ी संख्या में इस कार्यक्रम में भाग लिया।