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Rohtak News: 100 एकड़ में नहीं हुई गेहूं की बिजाई, मुआवजा न मिलने से किसानों में रोष
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25जेएनडी06: मालवी गांव में खराब हुई धान की फसल दिखाते हुए किसान। स्रोत: ग्रामीण
जुलाना। मालवी गांव के किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बरसाती पानी के कारण खेतों में लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रही। इससे पहले तो धान की फसल पूरी तरह से खराब हो गई और अब 100 एकड़ भूमि में गेहूं की बिजाई नहीं हो सकी।
नुकसान से किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं और प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसान अशोक, धर्मेंद्र, सुधीर, युद्धवीर ने बताया कि बारिश के दौरान निकासी व्यवस्था ठीक न होने के कारण पानी कई दिनों तक खेतों में खड़ा रहा। इससे धान की फसल खराब हो गई और उत्पादन शून्य के बराबर रहा।
किसानों ने उम्मीद की थी कि धान के नुकसान की भरपाई गेहूं की फसल से हो जाएगी लेकिन खेतों में अत्यधिक नमी और कीचड़ के चलते समय पर जुताई और बिजाई संभव नहीं हो पाई।
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किसानों ने बताया कि उन्होंने सरकार की ओर से शुरू किए गए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपना पंजीकरण भी कराया है और संबंधित दस्तावेज जमा करवाए हैं। अभी तक किसी भी मुआवजा नहीं मिला है।
किसानों का कहना है कि खाद, बीज और सिंचाई पर पहले ही हजारों रुपये खर्च हो चुके थे। धान की फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब गेहूं की बिजाई न होने से पूरे सीजन की आमदनी पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द सर्वे करवाकर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और शीघ्र मुआवजा जारी किया जाए।
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नुकसान से किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं और प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं। किसान अशोक, धर्मेंद्र, सुधीर, युद्धवीर ने बताया कि बारिश के दौरान निकासी व्यवस्था ठीक न होने के कारण पानी कई दिनों तक खेतों में खड़ा रहा। इससे धान की फसल खराब हो गई और उत्पादन शून्य के बराबर रहा।
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किसानों ने उम्मीद की थी कि धान के नुकसान की भरपाई गेहूं की फसल से हो जाएगी लेकिन खेतों में अत्यधिक नमी और कीचड़ के चलते समय पर जुताई और बिजाई संभव नहीं हो पाई।
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किसानों ने बताया कि उन्होंने सरकार की ओर से शुरू किए गए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपना पंजीकरण भी कराया है और संबंधित दस्तावेज जमा करवाए हैं। अभी तक किसी भी मुआवजा नहीं मिला है।
किसानों का कहना है कि खाद, बीज और सिंचाई पर पहले ही हजारों रुपये खर्च हो चुके थे। धान की फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब गेहूं की बिजाई न होने से पूरे सीजन की आमदनी पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द सर्वे करवाकर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और शीघ्र मुआवजा जारी किया जाए।