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क्या करोगे, महंगे स्कूल में पढ़ाकर... अंग्रेजी तो बोल नहीं पाएंगे

Thu, 01 May 2014 02:39 AM IST
रोहतक
रोहतक Updated Thu, 01 May 2014 02:39 AM IST
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What will you do, then do not speak English will be expensive school tutoring ...
क्या करोगे, इतने महंगे स्कूल में पढ़ाकर। अंग्रेजी तो यह ठीक से बोल नहीं पाएंगे और 2-3 माह में ही स्कूल से बाहर निकाल दिए जाओगे। यह जवाब मिला, बेटी तृषा के दाखिले के लिए भटक रहे घिलौड़ कलां निवासी जय भगवान को। जब वह अंबेडकर चौक स्थित मॉडल स्कूल में नियम 134ए के तहत अपनी बेटी का पहली कक्षा में दाखिला कराने के लिए पहुंचे। स्कूल व शिक्षा विभाग में 15 दिन से अपनी दोनों बेटियों के साथ चक्कर काट रहे भगवान के सब्र का बांध जब डीईईओ के समक्ष फूटा तो उन्होंने भी अपनी जिम्मेदारी से कन्नी काट ली।
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परेशान पिता ने भरे गले से शिक्षा अधिकारी को बताया कि साहब... बहुत गरीब आदमी हूं। मजदूरी कर अपनी दो बेटियों का पेट पालता हूं। पत्नी मर चुकी है और उसकी इच्छा पूरा करने के लिए रोजाना 25 किमी. का सफर तय कर आता हूं। भाड़े के लिए पैसे नहीं है और उधार लेकर यहां तक आया हूं।
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स्कूल में गया तो उन्होंने बच्ची का टेस्ट लिया। नंबर कम आए तो बोले यह चलेगी नहीं। हम तो अनपढ़ हैं। आज के मॉर्डन मां-बाप की तरह नहीं। जो अपने बच्ची को कुछ सिखा पाते। इतना सुनने के बावजूद भी डीईईओ का दिल नहीं पसीजा और बोले कि "डीईओ मैडम, आएंगी और वो ही तुम्हारी समस्या का समाधान करेंगी"। यह स्कूल डीसी के अंडर में आता है, इसलिए उनसे ही बात करो।
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मौका रहा, बुधवार को दोपहर 1:30 बजे जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी के कार्यालय का। जहां आधा दर्जन अभिभावकों ने मॉडल स्कूल द्वारा उनके बच्चों को दाखिला देने के बदले फीस मांगने पर काफी रोष जताया। इस दौरान शास्त्री नगर निवासी शमशेर सिंह ने बताया कि बेटी आरती को दूसरी कक्षा के लिए मॉडल स्कूल अलॉट हुआ है। स्कूल में गए तो उन्होंने सिक्योरिटी फीस, बिल्डिंग फंड और मासिक फीस के नाम पर 7900 रुपए मांगे। इतनी फीस मैं दे सकता तो वहां क्यूं जाता?

वहीं, सुखपुरा चौक निवासी विनय ने बताया कि सुबह 9 बजे से चक्कर काट रहे हैं। बेटे वैभव को दूसरी कक्षा में दाखिला नहीं मिला। पाड़ा मोहल्ला निवासी जितेंद्र ने बताया कि अपनी बेटी जिया का पहली कक्षा में प्रवेश कराने पहुंचे तो स्कूल वालों ने 300 रुपए जनरेटर और 400 रुपए मासिक फीस के साथ 8 हजार रुपए भी मांगे। साथ ही, बच्ची का मेडिकल करवाने को भी कहा। इस मौके पर डीईईओ समाधान करने के बजाए जिम्मेदारी से बचते दिखाई दिए।

दोपहर 2:30 बजे, डीईईओ द्वारा कोई हल न निकलने पर परेशान अभिभावक दो जाम पांच मुद्दे जन आंदोलन के संयोजक सतबीर सिंह हुड्डा व उनकी टीम के साथ डीसी व मॉडल स्कूल के चेयरमैन डॉ. अमित अग्रवाल के आवास पर पहुंचे। बकौल हुड्डा, डीसी ने अभिभावकों की सारी समस्याएं सुनी और तुरंत स्कूल के सीईओ से संपर्क किया। उन्होंने आदेश दिया कि बिना कोई फीस लिए इन बच्चों को दाखिला दिया जाए।

साथ ही, जिन बच्चों की फीस ली गई है वह उनके अभिभावकों को रिफंड कर दी जाएं। वह वैश्य पब्लिक स्कूल की प्राचार्या को भी आदेश देंगे कि वह बिना किसी परेशानी के इन बच्चों को दाखिला दें।

नियम 134ए के तहत पहली व दूसरी कक्षा के निकाले गए ड्रा के आधार पर जिले में कुल 365 बच्चों के दाखिले होने हैं, जबकि जिला शिक्षा विभाग के पास केवल 32 प्रवेश की ही रिपोर्ट है। गौरतलब है कि पहली कक्षा के लिए 49 स्कूलों में 187 और दूसरी कक्षा के लिए 52 स्कूलों में 178 बच्चों के दाखिले होने हैं।
 

आनाकानी की तो होगी कार्रवाई
आरटीई के तहत पहली से 8वीं तक के बच्चों के दाखिलों के लिए कोई तारीख तय नहीं है। यह बच्चे पूरा साल प्रवेश ले सकते हैं। नियम 134ए के आधार पर पहली व दूसरी कक्षा के दाखिले भी इसी के अंतर्गत आते हैं। जो स्कूल इन बच्चों को दाखिला देने में आनाकानी करेगा, उसके खिलाफ विभाग सख्त कार्रवाई करने को तैयार है। एक निजी स्कूल पर विभागीय कार्रवाई इसका साफ उदाहरण है।

-सत्यवती नांदल, जिला शिक्षा अधिकारी, रोहतक।


पहली व दूसरी कक्षा के कुल 45 बच्चों का दाखिला होना है और अभी तक 15 दाखिले हो चुके हैं। उन्हें बच्चों से फीस लेने में कोई रुचि नहीं है। अभिभावकों को साफ बता दिया गया था कि बच्चों के ज्ञान का सामान्य टेस्ट होगा, ताकि उन्हें अपने बच्चों के बौद्धिक स्तर का पता लग सके। अभिभावक खुद बोल रहे हैं कि उनके स्कूल में जो गतिविधियां कराई जाती हैं, वह उनका खर्चा देने को तैयार हैं।
-कर्नल महेंद्र सिंह राठी, सीईओ, मॉडल स्कूल शाखा।

डीईओ ही करेंगी समाधान
नियम 134ए का सारा चार्ज डीईओ को दिया गया है। वह इसमें कुछ नहीं कर सकते। डीईओ मैडम ही इस समस्या का समाधान करेंगी।
बलवंत सिंह नरवाल, जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी, रोहतक।
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