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Rohtak News: चलने में असमर्थ सरिता बच्चों को दिखा रहीं भविष्य की राह
Sun, 30 Mar 2025 02:01 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Sun, 30 Mar 2025 02:01 AM IST
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29सीटीके20 बच्चों के साथ मौजूद सरिता। स्रोत :स्वयं
रोहित राठौर
रोहतक। चुनौतियां ही संघर्ष की जीत होती है। कहा जाता है कि चुनौतियों का सामना करने से ही सफलता मिलती है। इनसे लड़ने वाला ही जीवन में सफलता हासिल कर करता है। विजय नगर निवासी 39 वर्षीय सरिता दिव्यांगता के बाद भी गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं।
सरिता 17 साल से गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। भले ही सरिता बचपन से चलने में असक्षम हैं, लेकिन अपनी सकारात्मक सोच से बच्चों को सही राह पर चलना जरूर सिखा रही हैं। सरिता ने बताया कि बुआ को देखते हुए सामाजिक कार्यों के लिए आगे आईं। सामाजिक संस्थाओं से जुड़ना शुरू किया। वर्ष 2009 में कन्हेली में स्थित एमटीएफसी (मेक द फ्यूचर ऑफ कंट्री) से जुड़ी और बच्चों को शिक्षा देनी शुरू की। उन्होंने बताया कि संस्था से किसी प्रकार का शुल्क नहीं ले रहीं, बल्कि प्रिंटिंग के कार्य में सहयोग कर अपना खर्चा वहन कर रही हैं। वहीं, सरिता संस्था में 2009 से चौथी व पांचवीं के बच्चों की पढ़ाई और कंप्यूटर में हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग का ज्ञान दे रही हैं। साथ ही, संस्था जुड़ी सभी प्रकार की गतिविधियों में हिस्सा ले रही हैं। फिलहाल, सरिता ने स्नातकोत्तर से सामाजिक सेवा की पढ़ाई पूरी की है और करीब 200 बच्चों को रोजगार के लिए सक्षम बनाया है। संवाद
आर्थिक कमजोरी के कारण शुरू नहीं कर पाई उच्चतर शिक्षा
सरिता ने बताया कि चौथी कक्षा के बाद उनके चलने लिए बैसाखी मिली थी। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई व्हील चेयर पर रहते हुए वर्ष 2003 में पूरी की। लेकिन, आर्थिक तंगी के कारण उच्चतर शिक्षा शुरू नहीं कर पाईं। इसके बाद 2006 में आईटीआई में दाखिला लिया, जहां से अंग्रेजी स्टेनो की शिक्षा ली। साथ ही, रेडक्रॉस से एक साल का कंप्यूटर कोर्स पूरा किया।
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पिता के निधन के बाद भी नहीं मानी हार
एमटीएमसी संस्था के संस्थापक नरेश ने बताया कि सरिता के परिवार में मां, तीन भाई व तीन बहनें हैं, जिनका मूल रूप से गुजारा दो भाई ही कर रहे हैं। वर्ष 2021 में पिता की मृत्यु हुई थी। कोरोना काल में भी लोगों को सामाजिक सेवाएं देने का कार्य किया। वहीं, रक्तदान शिविरों और कई सामाजिक शिविरों का संचालन कर चुकी हैं।
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रोहतक। चुनौतियां ही संघर्ष की जीत होती है। कहा जाता है कि चुनौतियों का सामना करने से ही सफलता मिलती है। इनसे लड़ने वाला ही जीवन में सफलता हासिल कर करता है। विजय नगर निवासी 39 वर्षीय सरिता दिव्यांगता के बाद भी गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा दे रही हैं।
सरिता 17 साल से गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। भले ही सरिता बचपन से चलने में असक्षम हैं, लेकिन अपनी सकारात्मक सोच से बच्चों को सही राह पर चलना जरूर सिखा रही हैं। सरिता ने बताया कि बुआ को देखते हुए सामाजिक कार्यों के लिए आगे आईं। सामाजिक संस्थाओं से जुड़ना शुरू किया। वर्ष 2009 में कन्हेली में स्थित एमटीएफसी (मेक द फ्यूचर ऑफ कंट्री) से जुड़ी और बच्चों को शिक्षा देनी शुरू की। उन्होंने बताया कि संस्था से किसी प्रकार का शुल्क नहीं ले रहीं, बल्कि प्रिंटिंग के कार्य में सहयोग कर अपना खर्चा वहन कर रही हैं। वहीं, सरिता संस्था में 2009 से चौथी व पांचवीं के बच्चों की पढ़ाई और कंप्यूटर में हिंदी और अंग्रेजी टाइपिंग का ज्ञान दे रही हैं। साथ ही, संस्था जुड़ी सभी प्रकार की गतिविधियों में हिस्सा ले रही हैं। फिलहाल, सरिता ने स्नातकोत्तर से सामाजिक सेवा की पढ़ाई पूरी की है और करीब 200 बच्चों को रोजगार के लिए सक्षम बनाया है। संवाद
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आर्थिक कमजोरी के कारण शुरू नहीं कर पाई उच्चतर शिक्षा
सरिता ने बताया कि चौथी कक्षा के बाद उनके चलने लिए बैसाखी मिली थी। 10वीं और 12वीं की पढ़ाई व्हील चेयर पर रहते हुए वर्ष 2003 में पूरी की। लेकिन, आर्थिक तंगी के कारण उच्चतर शिक्षा शुरू नहीं कर पाईं। इसके बाद 2006 में आईटीआई में दाखिला लिया, जहां से अंग्रेजी स्टेनो की शिक्षा ली। साथ ही, रेडक्रॉस से एक साल का कंप्यूटर कोर्स पूरा किया।
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पिता के निधन के बाद भी नहीं मानी हार
एमटीएमसी संस्था के संस्थापक नरेश ने बताया कि सरिता के परिवार में मां, तीन भाई व तीन बहनें हैं, जिनका मूल रूप से गुजारा दो भाई ही कर रहे हैं। वर्ष 2021 में पिता की मृत्यु हुई थी। कोरोना काल में भी लोगों को सामाजिक सेवाएं देने का कार्य किया। वहीं, रक्तदान शिविरों और कई सामाजिक शिविरों का संचालन कर चुकी हैं।