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संपत्ति कर शाखा के दो कर्मचारी सस्पेंड
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नगर निगम में समाधान दिवस पर निगम आयुक्त धीरेन्द्र खड़गटा को अपनी समस्या के बारे में बताते पार्षद
रोहतक। बार-बार कहने और नोटिस देने के बाद भी दो कर्मचारियों द्वारा काम नहीं करने से नाराज निगमायुक्त धीरेंद्र खड़गटा ने उन्हें सस्पेंड कर दिया है। निगम द्वारा सोमवार को आयोजित समाधान दिवस में जन सुनवाई के दौरान पार्षद गुलशन निझावन की शिकायत सुनते ही निगमायुक्त रोष में आ गए। उन्हें केस याद था, यह भी याद था कि इस मामले में कर्मचारी को नोटिस दिया गया था। लेकिन फिर भी काम नहीं हुआ। तो निगमायुक्त ने मौके पर ही संपत्ति कर शाखा के दो कर्मचारियों को सस्पेंड करने के आदेश दे दिए।
निगम में बार-बार आ रही तमाम विभागों से संबंधित शिकायतों के बाद निगमायुक्त खड़गटा ने पहली बार समाधान दिवस आयोजित करने का फैसला किया। हर माह की 15 तारीख को आयोजित होने वाले दिवस का मकसद सभी अधिकारियों की मौजूदगी में सीधे जन शिकायतों की सुनवाई और सात से 15 दिन में समाधान करना था। निगमायुक्त ने संयुक्त कमिश्नर महेश कुुमार और तहसीलदार शिव कुमार के साथ दरबार लगाया, फिर खुद ही सारी शिकायतों की सुनवाई की। इस दौरान 101 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें सबसे ज्यादा संपत्ति कर शाखा से संबंधित थीं। निगमायुक्त ने खुद सारी शिकायतें संबंधित अधिकारियों को मार्क कीं। उन्हें शिकायत के अनुसार सात से 15 दिन में हल करने के निर्देश दिए गए। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी इसमें कोताही करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मेयर मनमोहन गोयल नहीं आए, सीनियर डिप्टी मेयर राजकमल सहगल भी काफी देर से पहुंचे।
निझावन के प्रॉपर्टी आईडी में आ रही थी समस्या
पार्षद गुलशन निझावन ने बताया कि उन्होंने बाबरा मोहल्ला में अपनी पत्नी और भाभी के नाम से प्लॉट लिया। रजिस्ट्री करवाने के बाद प्रॉपर्टी आईडी अपने नाम करवाने के लिए पोर्टल पर आवेदन किया। उसके साथ सभी आवश्यक कागजात भी लगाए। आठ दिन बाद उन्हें निगम से ई-मेल आई कि आपकी अर्जी रिजेक्ट कर दी गई है। पोर्टल पर कारण देखा तो लिखा था कि रजिस्ट्री ठीक ढंग से पढ़ी नहीं जा पा रही है। दोबारा आवेदन किया तो फिर रिजेक्ट हो गया। फिर निझावन ने डीएमसी को शिकायत की, उन्होंने संबंधित क्लर्क को बुला कर पूछा कि इसमें क्या नहीं पढ़ा जा रहा है। तो वह दूसरे क्लर्क का नाम लेने लगा। जबकि, आवेदन उसके प्रॉपर्टी आईडी से रिजेक्ट हुआ था। दोनों में से कोई भी जवाब नहीं दे सका। निझावन ने फिर रजिस्ट्रेशन करवाया, लेकिन फिर कुछ नहीं हुआ तो वह निगमायुक्त के पास पहुंचे। आठ दिन बाद पता किया तो जवाब मिला कि फिर आवेदन करना पड़ेगा। फिर निझावन समाधान दिवस में पहुंचे और कमिश्नर को शिकायत दी। कमिश्नर ने संपत्ति कर शाखा के एक बेलदार, जिससे क्लर्क का काम लिया जा रहा था और एक क्लर्क को सस्पेंड करने के आदेश दिए।
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पेंडिंग फाइलें बनीं मुसीबत
जन सुनवाई के दौरान निगमायुक्त ने स्वीकार किया कि पेंडिंग फाइलें बड़ी समस्या है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मौके पर पूछा कि एटीपी से लेकर पटवारी तक, किसके पास फाइलें पेंडिंग हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर दबाव है लेकिन उनका प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द यह पेंडेंसी खत्म की जाए।
समाधान दिवस पर आईं प्रमुख शिकायतें
इंडस्ट्री में रिहायश का रेट लगा दिया
विकास नगर निवासी संदीप अग्रवाल ने बताया कि उनके तीन बिल गड़बड़ आए हैं। उनका एरिया ज्यादा दिखा रखा है। उनकी इंडस्ट्री में रिहायशी प्रॉपर्टी का रेट लगा रखा है। पहले 10-15 लाख का बिल भेजा और बिना नोटिस सीलिंग कर दी थी।
मकान को दिखाया शॉपिंग मॉल
महाजन पड़ाव, वार्ड 16 निवासी रमेश चंद्र की समस्या यह है कि उनके मकान को निगम ने रिकॉर्ड में शॉपिंग मॉल दिखा रखा है। एक बार प्रॉपर्टी टैक्स का बिल घर का आया, भरने गए तो मॉल का पकड़ा दिया। दो बार ऑनलाइन शिकायत की, लेकिन उसे रिजेक्ट कर दिया गया।
एरिया ज्यादा दिखाया
सेक्टर चार निवासी दिलबाग सिंह ने शिकायत दी कि उनकी प्रॉपर्टी का एरिया रिकॉर्ड में ज्यादा दिखा रखा है। उनकी रजिस्ट्री 500 वर्ग फुट की है और निगम रिकॉर्ड में 1050 वर्ग फुट दिखा रहे हैं। कई सालों से वह ज्यादा टैक्स देने को मजबूर हैं।
ज्यादा टैक्स देने को मजबूर
जींद बाईपास निवासी अशोक सैनी ने बताया कि उनका प्लॉट 396 वर्ग गज का है और उनसे प्रॉपर्टी टैक्स 396 वर्ग के हिसाब से लिया जा रहा है। 2016 में सीलिंग करने आए निगम कर्मचारियों ने बोला कि बिल भर दो बाद में एडजस्ट हो जाएगा, जो अब तक नहीं हुआ। कोरोना काल में सरकार ने स्कूलों को प्रॉपर्टी टैक्स से छूट दी थी। सैनी ने वह अदा कर दिया था अब एडजस्टमेंट नहीं किया जा रहा है।
प्लॉट के बीच में दिखा दी गली
लाढ़ौत रोड, रिशी नगर निवासी श्रीनिवास की समस्या विचित्र है। निगम ने उनके प्लॉट के बीच में गली दिखा रखी है। आरोप है कि कुछ पड़ोसियों ने निगमकर्मियों के साथ मिल कर साजिश रची है। वह कोर्ट केस भी जीत चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उनके एक अन्य प्लॉट में पत्नी का नाम जोड़ा था, जो अब तक नहीं हुआ।
आईं 101 शिकायतें
समाधान दिवस के दौरान कुल 101 शिकायतें आईं। जिनमें 71 संपत्ति कर शाखा, 15 भवन शाखा और दो सफाई शाखा से संबंधित थीं। कुछ शिकायतें तकनीकी शाखा से संबंधित थीं।
वर्जन-
लोगों की शिकायतों के निपटारे के लिए समाधान दिवस शुरू किया गया है। जिसमें 15 दिनों में निपटारे का लक्ष्य रखा गया है। तकनीकी समस्याएं आ रही हैं, डाटा अपडेट करने की प्रक्रिया धीमी है। इसके अलावा भ्रष्टाचार का मुद्दा भी है। सभी को हल किया जा रहा है, एफआईआर भी करवाई गई है। कोताही के मामले में दो कर्मचारियों को आज सस्पेंड किया गया है। फाइलों की पेंडेंसी घटाने का प्रयास किया जा रहा है।
- धीरेंद्र खड़गटा, निगमायुक्त, रोहतक
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निगम में बार-बार आ रही तमाम विभागों से संबंधित शिकायतों के बाद निगमायुक्त खड़गटा ने पहली बार समाधान दिवस आयोजित करने का फैसला किया। हर माह की 15 तारीख को आयोजित होने वाले दिवस का मकसद सभी अधिकारियों की मौजूदगी में सीधे जन शिकायतों की सुनवाई और सात से 15 दिन में समाधान करना था। निगमायुक्त ने संयुक्त कमिश्नर महेश कुुमार और तहसीलदार शिव कुमार के साथ दरबार लगाया, फिर खुद ही सारी शिकायतों की सुनवाई की। इस दौरान 101 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें सबसे ज्यादा संपत्ति कर शाखा से संबंधित थीं। निगमायुक्त ने खुद सारी शिकायतें संबंधित अधिकारियों को मार्क कीं। उन्हें शिकायत के अनुसार सात से 15 दिन में हल करने के निर्देश दिए गए। साथ ही चेतावनी दी गई कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी इसमें कोताही करता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। मेयर मनमोहन गोयल नहीं आए, सीनियर डिप्टी मेयर राजकमल सहगल भी काफी देर से पहुंचे।
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निझावन के प्रॉपर्टी आईडी में आ रही थी समस्या
पार्षद गुलशन निझावन ने बताया कि उन्होंने बाबरा मोहल्ला में अपनी पत्नी और भाभी के नाम से प्लॉट लिया। रजिस्ट्री करवाने के बाद प्रॉपर्टी आईडी अपने नाम करवाने के लिए पोर्टल पर आवेदन किया। उसके साथ सभी आवश्यक कागजात भी लगाए। आठ दिन बाद उन्हें निगम से ई-मेल आई कि आपकी अर्जी रिजेक्ट कर दी गई है। पोर्टल पर कारण देखा तो लिखा था कि रजिस्ट्री ठीक ढंग से पढ़ी नहीं जा पा रही है। दोबारा आवेदन किया तो फिर रिजेक्ट हो गया। फिर निझावन ने डीएमसी को शिकायत की, उन्होंने संबंधित क्लर्क को बुला कर पूछा कि इसमें क्या नहीं पढ़ा जा रहा है। तो वह दूसरे क्लर्क का नाम लेने लगा। जबकि, आवेदन उसके प्रॉपर्टी आईडी से रिजेक्ट हुआ था। दोनों में से कोई भी जवाब नहीं दे सका। निझावन ने फिर रजिस्ट्रेशन करवाया, लेकिन फिर कुछ नहीं हुआ तो वह निगमायुक्त के पास पहुंचे। आठ दिन बाद पता किया तो जवाब मिला कि फिर आवेदन करना पड़ेगा। फिर निझावन समाधान दिवस में पहुंचे और कमिश्नर को शिकायत दी। कमिश्नर ने संपत्ति कर शाखा के एक बेलदार, जिससे क्लर्क का काम लिया जा रहा था और एक क्लर्क को सस्पेंड करने के आदेश दिए।
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पेंडिंग फाइलें बनीं मुसीबत
जन सुनवाई के दौरान निगमायुक्त ने स्वीकार किया कि पेंडिंग फाइलें बड़ी समस्या है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मौके पर पूछा कि एटीपी से लेकर पटवारी तक, किसके पास फाइलें पेंडिंग हैं। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर दबाव है लेकिन उनका प्रयास रहेगा कि जल्द से जल्द यह पेंडेंसी खत्म की जाए।
समाधान दिवस पर आईं प्रमुख शिकायतें
इंडस्ट्री में रिहायश का रेट लगा दिया
विकास नगर निवासी संदीप अग्रवाल ने बताया कि उनके तीन बिल गड़बड़ आए हैं। उनका एरिया ज्यादा दिखा रखा है। उनकी इंडस्ट्री में रिहायशी प्रॉपर्टी का रेट लगा रखा है। पहले 10-15 लाख का बिल भेजा और बिना नोटिस सीलिंग कर दी थी।
मकान को दिखाया शॉपिंग मॉल
महाजन पड़ाव, वार्ड 16 निवासी रमेश चंद्र की समस्या यह है कि उनके मकान को निगम ने रिकॉर्ड में शॉपिंग मॉल दिखा रखा है। एक बार प्रॉपर्टी टैक्स का बिल घर का आया, भरने गए तो मॉल का पकड़ा दिया। दो बार ऑनलाइन शिकायत की, लेकिन उसे रिजेक्ट कर दिया गया।
एरिया ज्यादा दिखाया
सेक्टर चार निवासी दिलबाग सिंह ने शिकायत दी कि उनकी प्रॉपर्टी का एरिया रिकॉर्ड में ज्यादा दिखा रखा है। उनकी रजिस्ट्री 500 वर्ग फुट की है और निगम रिकॉर्ड में 1050 वर्ग फुट दिखा रहे हैं। कई सालों से वह ज्यादा टैक्स देने को मजबूर हैं।
ज्यादा टैक्स देने को मजबूर
जींद बाईपास निवासी अशोक सैनी ने बताया कि उनका प्लॉट 396 वर्ग गज का है और उनसे प्रॉपर्टी टैक्स 396 वर्ग के हिसाब से लिया जा रहा है। 2016 में सीलिंग करने आए निगम कर्मचारियों ने बोला कि बिल भर दो बाद में एडजस्ट हो जाएगा, जो अब तक नहीं हुआ। कोरोना काल में सरकार ने स्कूलों को प्रॉपर्टी टैक्स से छूट दी थी। सैनी ने वह अदा कर दिया था अब एडजस्टमेंट नहीं किया जा रहा है।
प्लॉट के बीच में दिखा दी गली
लाढ़ौत रोड, रिशी नगर निवासी श्रीनिवास की समस्या विचित्र है। निगम ने उनके प्लॉट के बीच में गली दिखा रखी है। आरोप है कि कुछ पड़ोसियों ने निगमकर्मियों के साथ मिल कर साजिश रची है। वह कोर्ट केस भी जीत चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उनके एक अन्य प्लॉट में पत्नी का नाम जोड़ा था, जो अब तक नहीं हुआ।
आईं 101 शिकायतें
समाधान दिवस के दौरान कुल 101 शिकायतें आईं। जिनमें 71 संपत्ति कर शाखा, 15 भवन शाखा और दो सफाई शाखा से संबंधित थीं। कुछ शिकायतें तकनीकी शाखा से संबंधित थीं।
वर्जन-
लोगों की शिकायतों के निपटारे के लिए समाधान दिवस शुरू किया गया है। जिसमें 15 दिनों में निपटारे का लक्ष्य रखा गया है। तकनीकी समस्याएं आ रही हैं, डाटा अपडेट करने की प्रक्रिया धीमी है। इसके अलावा भ्रष्टाचार का मुद्दा भी है। सभी को हल किया जा रहा है, एफआईआर भी करवाई गई है। कोताही के मामले में दो कर्मचारियों को आज सस्पेंड किया गया है। फाइलों की पेंडेंसी घटाने का प्रयास किया जा रहा है।
- धीरेंद्र खड़गटा, निगमायुक्त, रोहतक