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एक साल पहले की थी हत्या, अब ताउम्र जेल में रहेंगे
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Tue, 13 Oct 2015 02:12 AM IST
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अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश अश्विनी कुमार की अदालत ने सोनीपत के
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गांव मदीना निवासी नीरज की गोली मारकर हत्या करने के मामले में तीन दोषियों
को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अदालत ने मदीना निवासी सेवाराम उर्फ काला,
दिनेश और पवन को उम्रकैद और 1 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना
नहीं भरने पर दोषियों को 6-6 महीने की अतिरिक्त कैद भुगतनी होगी। साथ ही
अदालत ने मामले में एक आरोपी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। जबकि एक
नाबालिग आरोपी का जुवेनाइल कोर्ट में केस विचाराधीन है।
अदालत में चले अभियोग के अुनसार, सोनीपत के गांव मदीना निवासी धूप सिंह ने तीन फ रवरी 2014 को पुलिस में शिकायत दी थी। शिकायत में धूपसिंह ने लिखा था कि वर्ष 2008 में उसके परिवार का एक महिला को लेकर गांव के ही रामभज से झगड़ा हुआ था। इसके चलते उसके बेटे नीरज ने रामभज के भाई राममेहर की हत्या कर दी थी। इसके बाद वर्ष 2009 में रामभज के भाई जोगेंद्र की हत्या हो गई। इसमें भी नीरज का नाम आया। वर्ष 2010 में रामभज के करौंथा निवासी ससुर व साले की हत्या हो गई। इसमें नीरज व उसका नाम षडयंत्र रचने में आ गया। इन सब केसों का पंचायती तौर पर फैसला हो गया था।
सभी आरोपी जेल से बाहर आ गए थे। बाद में वर्ष 2012 को नीरज व हरिओम ने झगड़े में गांव के ही शील की हत्या कर दी। फिर पंचायती तौर पर फैसला हो गया था। इसके बाद नीरज 20 फ रवरी 2013 को जेल से बाहर आ गया। इसके बाद फ रवरी 2014 में रात के समय नीरज की हत्या कर दी गई। परिवार को तीन फ रवरी 2014 की सुबह उसकी हत्या की सूचना मिली। उसे पांच छह नकाबपोशों ने मदीना निवासी संदीप के साथ बैडमिंटन खेलते समय गोलियों से छलनी कर डाला। अदालत ने पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद सजा सुनाई।
अदालत में चले अभियोग के अुनसार, सोनीपत के गांव मदीना निवासी धूप सिंह ने तीन फ रवरी 2014 को पुलिस में शिकायत दी थी। शिकायत में धूपसिंह ने लिखा था कि वर्ष 2008 में उसके परिवार का एक महिला को लेकर गांव के ही रामभज से झगड़ा हुआ था। इसके चलते उसके बेटे नीरज ने रामभज के भाई राममेहर की हत्या कर दी थी। इसके बाद वर्ष 2009 में रामभज के भाई जोगेंद्र की हत्या हो गई। इसमें भी नीरज का नाम आया। वर्ष 2010 में रामभज के करौंथा निवासी ससुर व साले की हत्या हो गई। इसमें नीरज व उसका नाम षडयंत्र रचने में आ गया। इन सब केसों का पंचायती तौर पर फैसला हो गया था।
सभी आरोपी जेल से बाहर आ गए थे। बाद में वर्ष 2012 को नीरज व हरिओम ने झगड़े में गांव के ही शील की हत्या कर दी। फिर पंचायती तौर पर फैसला हो गया था। इसके बाद नीरज 20 फ रवरी 2013 को जेल से बाहर आ गया। इसके बाद फ रवरी 2014 में रात के समय नीरज की हत्या कर दी गई। परिवार को तीन फ रवरी 2014 की सुबह उसकी हत्या की सूचना मिली। उसे पांच छह नकाबपोशों ने मदीना निवासी संदीप के साथ बैडमिंटन खेलते समय गोलियों से छलनी कर डाला। अदालत ने पूरे मुकदमे की सुनवाई के बाद सजा सुनाई।