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Rohtak News: इस बार पालकी पर सवार होकर आएंगी मां दुर्गा, मांगलिक कार्यों में होगी वृद्धि
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रोहतक। पितृ पक्ष के बाद शारदीय नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। इन 9 दिनों तक शक्ति की देवी के नौ रूपों की पूजा की जाती है। ये 9 दिन, भक्तों के लिए बहुत महत्व रखते हैं। भक्त इस महापर्व के लिए हर साल अति उत्सुक रहते हैं और मां दुर्गा का स्वागत, पूर्ण भक्तिभाव से करते हैं।
आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 3 अक्तूबर से नवरात्र शुरू हो रहे हैं, जो 12 अक्तूबर तक पूरे भक्तिभाव और हर्षोल्लास के साथ मनाए जाएंगे। नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। जीवन के सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्र ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्रि में मैय्या रानी पालकी पर सवार होकर आएंगी। नवरात्रि, हिन्दू धर्म के सबसे बड़े त्यौहारों में से एक है, जिसे परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर मनाते हैं और देवी मां से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
ऐसे तय होती है मां की सवारी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि का प्रारंभ जब रविवार या सोमवार के दिन से होता है, तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं। यदि नवरात्रि, गुरुवार या शुक्रवार से शुरू हों, तो माता रानी पालकी में आती हैं। वहीं, नवरात्रि की शुरुआत अगर मंगलवार या शनिवार से होती है, तो मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं। नवरात्रि अगर बुधवार से शुरू हो तो माता रानी नौका में सवार होकर आती हैं।
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खास है पालकी की सवारी
ऐसी मान्यता है कि जब नवरात्रि में माता रानी पालकी पर सवार होकर आती हैं, तो मांगलिक कार्य की वृद्धि और खुशहाली बहुत बढ़ जाती है। इससे चारों ओर हरियाली छाने लगती है। प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। फसलें भी बहुत अच्छी होती हैं। मैय्या रानी जब पालकी पर सवार होकर आती हैं, तो अन्न-धन के भंडार भरती हैं। माता का पालकी पर सवार होकर आना, भक्तों के लिए बहुत मंगलकारी माना जाता है।
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आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि यानी 3 अक्तूबर से नवरात्र शुरू हो रहे हैं, जो 12 अक्तूबर तक पूरे भक्तिभाव और हर्षोल्लास के साथ मनाए जाएंगे। नवरात्रि में मां दुर्गा की पूजा से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। जीवन के सारे दुख-दर्द दूर हो जाते हैं। दुर्गा भवन मंदिर के पुजारी आचार्य मनोज मिश्र ने बताया कि इस बार शारदीय नवरात्रि में मैय्या रानी पालकी पर सवार होकर आएंगी। नवरात्रि, हिन्दू धर्म के सबसे बड़े त्यौहारों में से एक है, जिसे परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर मनाते हैं और देवी मां से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
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ऐसे तय होती है मां की सवारी
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, नवरात्रि का प्रारंभ जब रविवार या सोमवार के दिन से होता है, तो माता हाथी पर सवार होकर आती हैं। यदि नवरात्रि, गुरुवार या शुक्रवार से शुरू हों, तो माता रानी पालकी में आती हैं। वहीं, नवरात्रि की शुरुआत अगर मंगलवार या शनिवार से होती है, तो मां घोड़े पर सवार होकर आती हैं। नवरात्रि अगर बुधवार से शुरू हो तो माता रानी नौका में सवार होकर आती हैं।
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खास है पालकी की सवारी
ऐसी मान्यता है कि जब नवरात्रि में माता रानी पालकी पर सवार होकर आती हैं, तो मांगलिक कार्य की वृद्धि और खुशहाली बहुत बढ़ जाती है। इससे चारों ओर हरियाली छाने लगती है। प्रकृति का सौंदर्य अपने चरम पर होता है। फसलें भी बहुत अच्छी होती हैं। मैय्या रानी जब पालकी पर सवार होकर आती हैं, तो अन्न-धन के भंडार भरती हैं। माता का पालकी पर सवार होकर आना, भक्तों के लिए बहुत मंगलकारी माना जाता है।