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देरी से पंजीकरण का नहीं है पोर्टल, कैसे बने मृत्यु प्रमाण पत्र

Thu, 28 Oct 2021 01:09 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 28 Oct 2021 01:09 AM IST
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There is no portal for late registration, how to make death certificate
पीजीआई में कोरोना से हुई मौतोें का आंकड़ा अब तक दुरुस्त नहीं हो पा रहा है। यह व्यवस्था अभी सुधरती नजर भी नहीं आ रही है। इसकी वजह देरी से आने वाले आवेदनों का पंजीकरण करने के लिए पोर्टल या अन्य व्यवस्था नहीं होना है। ऐसे में देरी से मिली करीब 25 लोगों की फाइलों पर कार्रवाई नहीं हो पा रही है। यही नहीं, इनके मृत्यु प्रमाण पत्र बनना भी मुश्किल हो गया है। हरियाणा सेवा का अधिकार आयोग ने इस मामले में पीजीआई के पूर्व निदेशक से जवाब तलब किया है।
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कोरोना से हुई मौतों का आंकड़ा अब भी उलझा हुआ है। हालांकि पिछले दिनों पूर्व निदेशक के प्रयासों से गुम हुई कोरोना मरीजों की फाइलें बरामद कर ली गई हैं। इसके बावजूद करीब 25 लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहे हैं। इनमें से कुछ फाइलें उपायुक्त, कुछ जन्म मृत्यु पंजीकरण विभाग के महानिदेशक व अन्य अधिकारियों की टेबल पर विचाराधीन हैं। इन फाइलों पर कार्रवाई नहीं हो पाने से लोगों के मृत्यु प्रमाण पत्र का काम अटक गया है। इसी संदर्भ में आयोग ने पूर्व निदेशक से जवाब तलब किया है।
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यह है पीजीआई में व्यवस्था
पीजीआई में एमआर (मेडिकल रिकॉर्ड) ब्रांच व जन्म एवं मृत्यु (बीएंडडी) ब्रांच है। संस्थान के वार्डों से मृतक मरीजों की रिपोर्ट बीएंडडी ब्रांच में आती है। यहां फाइल पर मुहर लगाकर नोटिफिकेशन किया जाता है। इसके बाद फाइल एमआर ब्रांच भेजी जाती है। नियमानुसार सात दिन में यह काम पूरा होना जरूरी है। जबकि प्रमाण पत्र 21 दिन में देना अनिवार्य है। संस्थान में औसतन एक महीने 1200 बच्चों का जन्म होता है। जबकि 800 लोगों की मौत हो जाती है। यह आंकड़ा करीब पांच जिलों के कार्यभार के बराबर बताया जा रहा है। ऐसे में वर्कलोड बना रहता है।
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संस्थान में पीजी करने वाले विद्यार्थी वर्कलोड के कारण अक्सर समय पर फाइल जमा नहीं करा पाते हैं। सरकार के सरल पोर्टल पर फाइलें जमा कराना जरूरी है। फाइल एक महीने के बाद आती है तो पोर्टल इसे अस्वीकार कर देता है। इसमें देरी से आने वाली फाइल का पंजीकरण करने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे मामले में जब पीजी छात्र फाइल लेकर सिविल सर्जन कार्यालय जाते हैं तो उन्हें पोर्टल पर ही फाइल भेजने के लिए कहा जाता है। इस समस्या के बारे में उपायुक्त, जन्म मृत्यु महानिदेशक, ग्रिवेंस कमेटी व अन्य अधिकारियों को कई बार अवगत कराया जा चुका है। इसके बावजूद समाधान नहीं हुआ है।

संस्थान में जन्म मृत्यु पंजीकरण का काम बेहतर ढंग से किया गया है। पुरानी व्यवस्था को दुरुस्त कर इसे सुधारा जा रहा है। देरी से आने वाली फाइलों के पंजीकरण के लिए पोर्टल नहीं है। इस बारे में सरकार को लिखा गया है। यह व्यवस्था होने से काम और आसान हो जाएगा।
- डॉ. संदीप, डीएमएस एवं रजिस्ट्रार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण, पीजीआई
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