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दोनों डोज का लक्ष्य पूरा नहीं, फ्रंटलाइन वॉरियर्स को कैसे लगेगी बूस्टर डोज

Thu, 09 Dec 2021 12:45 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 09 Dec 2021 12:45 AM IST
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The target of both the doses is not met, how will the frontline warriors get the booster dose
संजय कुमार
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रोहतक। कोरोना का पांचवां वैरिएंट ओमिक्रॉन देश में लगातार पांव पसार रहा है। सबसे अधिक खतरा कोरोना मरीजों का उपचार कर रहे फ्रंटलाइन वॉरियर्स डॉक्टर, नर्स व नॉन मेडिकल स्टाफ को है। क्योंकि कोरोना से बचाव की वैक्सीन लगने के बाद इनके शरीर में कितनी एंटीबॉडी हैं, इसकी किसी को जानकारी नहीं है। बूस्टर डोज कब लगेगी, इसका भी पता नहीं है। हकीकत यह भी है कि जिले में काफी लोगों को अभी भी दूसरी डोज लगना बाकी है, कुछ को तो पहली डोज भी नहीं लगी है।
वैक्सीन लगाए जाने का एक साल पूरा होने वाला है। जांच में सामने आया है कि कोरोना संक्रमण के बाद व बचाव की वैक्सीन लगने के बाद शरीर में एंटीबॉडी अलग-अलग समय विद्यमान रहती है। यही एंटीबॉडी है, जोकि मरीज को नए संक्रमण से बचाती है। ओमिक्रॉन वैरिएंट को लेकर मेडिकल वर्कर्स परेशान हैं कि उनके शरीर में कितनी एंटीबॉडी हैं, उन्हें नहीं पता। वह बूस्टर डोज कब लगवाएं, उसका कोई नियम भी नहीं है। ऐसे में जिनके अंदर एंटीबॉडी नहीं हैं या कम हैं, वह फिर हाई रिस्क में हैं।
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पीजीआईएमएस भी रहा है ट्रायल में शामिल
कोवाक्सिन की रिसर्च में पीजीआईएमएस भी शामिल रहा है। छह जनवरी को तीसरे फेज का ट्रायल यहां पूरा हो जाएगा। इसके बाद सामने आएगा कि वैक्सीन की दो डोज लगने के बाद यह कितना काम करती है। पिछली रिसर्च में सामने आया था कि एंटीबॉडी तीन से छह माह तक शरीर में रहती है। वैक्सीन लगने के बाद यह एक साल या दो साल तक रह सकती है।
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वर्जन
बूस्टर डोज की कोई गाइडलाइन नहीं है। कोरोना के नए वैरिएंट से घबराने की जगह जागरूक रहने की जरूरत है। जनवरी में रिसर्च की रिपोर्ट आ जाएगी कि वैक्सीन लगने के बाद कितने समय तक शरीर में कितनी एंटीबॉडी रहती है। विदेशों में गंभीर बीमारी, अधिक आयु वालों को बूस्टर डोज पहले लगाई जा रही है। नया वैरिएंट ओमिक्रॉन कितना गंभीर है अभी नहीं कहा जा सकता।
- डॉ. रमेश वर्मा, प्रोफेसर एवं कोवाक्सिन अनुसंधान टीम के सदस्य, पीजीआईएमएस
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विदेश से आने वाले जिले में 33 यात्री हैं अनट्रेस
स्वास्थ्य विभाग के लिए विदेश यात्रा कर लौटे 33 यात्री अभी अनट्रेस हैं। इनमें 15 यात्रियों का या तो गलत नंबर है या गलत पता है। इसके अलावा अन्य राज्य में ही नहीं हैं। इन सभी की जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को भेज दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग जिला प्रशासन से विदेश से आने वाले यात्रियों की सूची मिलते ही उनसे संपर्क कर रहा है। इसमें गलत पता व नंबर होने के चलते इन तक पहुंच पाना मुश्किल हो रहा है। बुधवार को भी जिले में 16 नए यात्रियों की सूची आई है। इन सभी का आरटीपीसीआर सैंपल जांच के लिए भेज दिया गया है। गौरतलब है कि यूएई से 39, कनाडा से 13, मालदीव से 10, आस्ट्रेलिया से नौ, यूके से सात, कतर से चार, श्रीलंका से चार, फ्रांस व नेपाल से तीन, ओमान, यूएसए, जापान व अन्य देशों से एक व दो यात्री आए हैं। डॉ. तरुण मधुर हेल्थ मैनेजर स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि बुधवार को भी विदेश से आए 40 यात्रियों के सैंपल जांच के लिए भरे हैं। इसमें हाई रिस्क वाले देश से कोई नहीं आया है।

वर्जन
जिले में स्वास्थ्य विभाग की टीम को अलर्ट किया गया है। जिन यात्रियों तक विभाग नहीं पहुंच पा रहा है, उनका रिकॉर्ड सरकार को दिया जा रहा है। जो भी यात्री विदेश से आ रहे हैं, वह कहीं न जाएं। विभाग को जांच में सहयोग करें।
- डॉ. जेएस पुनिया, सिविल सर्जन
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