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Rohtak News: डॉ. देविना की बगिया बनी स्मृतियों और जीवन मूल्यों की जीवंत धरोहर
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09-घर की बगिया में पौधों की देखभाल करतीं डॉ. देविना बधवार। संवाद
रोहतक। मॉडल टाउन निवासी डॉ. देविना बधवार के घर में 8 साल पहले बनाई बगिया अब रंग बिरंगे फूलों से महक रही है। उनकी ये बगिया भावनाओं, स्मृतियों और जीवन मूल्यों की एक जीवंत धरोहर है।
बगिया की शुरुआत उनके पिता डॉ. मनोज बधवार ने 2018 में की थी और उसी साल उनका आकस्मिक निधन हो गया। उनके हाथों से लगाए गए आंवला, नीम और हरसिंगार के पौधे अब पेड़ बन गए हैं जो आज भी उनकी उपस्थिति का एहसास कराते हैं।
बगिया हमें यह सिखाती है कि जीवन में सादगी, प्रकृति और सेवा का संगम ही असली समृद्धि है। बगिया और घर-आंगन में 100 से ज्यादा पौधे हैं। बगिया में लगाए पौधों से वे व्यंजन बनाती हैं। गर्मी में दो बार पौधों में पानी देतीं हैं।
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पिता की प्रेरणा से बढ़ाई हरियाली
पिता की प्रेरणा से उन्होंने भी इस बगिया में हरियाली बढ़ाई। अपराजिता का पौधा लगाया जिसकी चाय न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि मन को भी शांति देती है। पान के पत्तों से पान शेक और आइसक्रीम बनाना उनके लिए एक नया प्रयोग है। अंजीर के पेड़ से तैयार होने वाली आइसक्रीम, गुलाब से बनने वाला गुलकंद और तुलसी की पत्तियों से बनी चटनी, ये सब हमारी रसोई को प्रकृति से जोड़ते हैं।
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बगिया में बिखरी रंगों की छटा
समाजसेविका डॉ. देविना की बगिया में हरियाली के साथ ही रंग बिरंग फूल भी खिले हुए हैं जिनकी छटा चारों ओर फैल रही है। जीनिया और कॉसमॉस के फूल सहज ही सभी को आकर्षित करते हैं। ताजगी से भरा पुदीना का शरबत बनाकर गर्मी के मौसम को खास बना देता है। मधुकामनी का पौधा अपनी सुगंध से पूरे घर को महकाता है, मानो हर कोना प्रकृति के स्नेह से भर गया हो।
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भोजन बनाकर प्रवासी मजदूरों के बच्चों तक पहुंचाती हैं
डॉ. देविना बगिया में उगी इन प्राकृतिक उपजों से भोजन बनाकर जब प्रवासी मजदूरों के जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाती हैं तो यह सिर्फ पेट नहीं बल्कि आत्मा को भी तृप्त करता है। बगिया में लगाए पौधों में वे गोशाला से मंगाई गोबर की खाद का प्रयोग करती हैं। डॉ. देविना के अनुसार कड़ी पत्ता का पौधा रसोई में स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ाता है। लेट्यूस की हरी-भरी पत्तियां सलाद और स्वास्थ्य वर्धक व्यंजनों में उपयोग करते हैं।
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बगिया की शुरुआत उनके पिता डॉ. मनोज बधवार ने 2018 में की थी और उसी साल उनका आकस्मिक निधन हो गया। उनके हाथों से लगाए गए आंवला, नीम और हरसिंगार के पौधे अब पेड़ बन गए हैं जो आज भी उनकी उपस्थिति का एहसास कराते हैं।
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बगिया हमें यह सिखाती है कि जीवन में सादगी, प्रकृति और सेवा का संगम ही असली समृद्धि है। बगिया और घर-आंगन में 100 से ज्यादा पौधे हैं। बगिया में लगाए पौधों से वे व्यंजन बनाती हैं। गर्मी में दो बार पौधों में पानी देतीं हैं।
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पिता की प्रेरणा से बढ़ाई हरियाली
पिता की प्रेरणा से उन्होंने भी इस बगिया में हरियाली बढ़ाई। अपराजिता का पौधा लगाया जिसकी चाय न केवल स्वास्थ्यवर्धक है बल्कि मन को भी शांति देती है। पान के पत्तों से पान शेक और आइसक्रीम बनाना उनके लिए एक नया प्रयोग है। अंजीर के पेड़ से तैयार होने वाली आइसक्रीम, गुलाब से बनने वाला गुलकंद और तुलसी की पत्तियों से बनी चटनी, ये सब हमारी रसोई को प्रकृति से जोड़ते हैं।
बगिया में बिखरी रंगों की छटा
समाजसेविका डॉ. देविना की बगिया में हरियाली के साथ ही रंग बिरंग फूल भी खिले हुए हैं जिनकी छटा चारों ओर फैल रही है। जीनिया और कॉसमॉस के फूल सहज ही सभी को आकर्षित करते हैं। ताजगी से भरा पुदीना का शरबत बनाकर गर्मी के मौसम को खास बना देता है। मधुकामनी का पौधा अपनी सुगंध से पूरे घर को महकाता है, मानो हर कोना प्रकृति के स्नेह से भर गया हो।
भोजन बनाकर प्रवासी मजदूरों के बच्चों तक पहुंचाती हैं
डॉ. देविना बगिया में उगी इन प्राकृतिक उपजों से भोजन बनाकर जब प्रवासी मजदूरों के जरूरतमंद बच्चों तक पहुंचाती हैं तो यह सिर्फ पेट नहीं बल्कि आत्मा को भी तृप्त करता है। बगिया में लगाए पौधों में वे गोशाला से मंगाई गोबर की खाद का प्रयोग करती हैं। डॉ. देविना के अनुसार कड़ी पत्ता का पौधा रसोई में स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ाता है। लेट्यूस की हरी-भरी पत्तियां सलाद और स्वास्थ्य वर्धक व्यंजनों में उपयोग करते हैं।