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मरीज ने संतुलन खोया था, इसलिए संस्थान जिम्मेदार नहीं ः पीजीआई
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
Updated Thu, 17 Nov 2016 01:48 AM IST
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पीजीआई में लिफ्ट खराब, यूं छत से अाते हैं मरीज
- फोटो : अमर उजाला
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पीजीआईएमएस ओपीडी में लिफ्ट में फंसकर मरीज की मौत मामले की जांच रिपोर्ट भी चौंकाने वाली है। रिपोर्ट में जांच अधिकारियों ने हादसे की वजह मरीज का संतुलन खोना बताया है। संस्थान ने खुद को कहीं भी जिम्मेदार नहीं बताया है। हालांकि बिजली निगम के एसडीई को जरूर घसीटा गया है। शिकायतकर्ता परिवार भी इस रिपोर्ट से हैरान है।
ध्यान रहे कि गत 25 जुलाई को जनता कालोनी से उपचार कराने आए 66 वर्षीय आनंद स्वरूप की ओपीडी की लिफ्ट में मौत हो गई थी। अव्यवस्थाओं पर परिजनों ने विरोध किया तो जांच टीम गठित हुई। मामले की जांच डॉ. आरबी सिंह, डॉ. एके खुराना और डॉ. जितेंद्र जाखड़ ने की। इस जांच रिपोर्ट में कहा गया कि पीजीआई ओपीडी में अचानक बिजली चली गई। इसमें लिफ्ट में बैठे सभी अभिभावक और मरीज फंस गए। बाद में सभी को सुरक्षित तरीके से निकाल लिया गया।
परंतु लिफ्ट से निकलते समय आनंद स्वरूप अपना संतुलन नहीं रख पाए और गिर गए। बाद में आनंद स्वरूप की मौत हो गई। टीम का कहना है कि उन्होंने इस घटना के लिए किसी भी कर्मचारी और अधिकारी को दोषी करार नहीं दिया है।
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जांच टीम ने ही उठा दिए सवाल
- हादसा बिजली जाने तथा आटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस फेल होने से हुआ।
- हादसे के समय जनरेटर काम नहीं कर रहा था
- प्रतिदिन लिफ्ट के रखरखाव की कार्रवाई रजिस्टर में दर्ज हो और लिफ्ट सही न होने पर नोटिस चस्पां हो
- बिजली जाने पर लाइन को सीधा जनरेटर से जोड़ा जाए
- सभी लिफ्टों का संचालन कुशल कर्मचारियों के माध्यम से हो
बिजली निगम के एसडीई को घसीटा
जांच टीम ने लिफ्ट मामले में उप मंडल अभियंता बिजली मंडल को घसीटा है। इसमें कहा गया है कि लिफ्ट को संस्था की संपदा शाखा को नहीं सौंपा गया। इसलिए इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी बिजली निगम के एसडीई (अभियंता) ी थी। जनरेटर का बैकअप व एडीआर फेल होने की जिम्मेदारी भी उनकी थी।
लिफ्ट मैन जरूरी नहीं, फिर भी 80 का आवेदन
जांच टीम 17 जून 2009 को पावर विभाग की जारी अधिसूचना का हवाला देती है कि लिफ्ट आपरेटर की जरूरत नहीं है। फिर भी उन्होंने 60 लिफ्ट मैन और 20 बिजली कर्मियों के लिए आउटसोर्स पर आवेदन मांगे हैं। इसके लिए पत्र व्यवहार चल रहा है, जैसे ही सरकार अनुमति देगी ये पद भर लिए जाएंगे।
अब उठ रहे ये सवाल
- जांच टीम संस्थान की गलती नहीं मानती। लेकिन पुलिस ने लिफ्ट आपरेटर तीर्थ और सहायक नरेश को गिरफ्तार किया। तीर्थ ने कोर्ट से जमानत ली और नरेश ने अग्रिम जमानत ली?
- बगैर लिफ्ट मैन, तकनीशियन व मैंटेनेंस के लिफ्ट का संचालन किसकी अनुमति से हुआ। हादसे के बाद लिफ्ट क्यों बंद की गई?
- अस्पताल प्रबंधन के सीनियर प्रोफेसर एवं हेड डॉ. ब्रिजेंद्र ढिल्लो ने ओपीडी की लिफ्ट की खामियों को लेकर एमएस और निदेशक को पत्र लिखे, इन पर संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?
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ध्यान रहे कि गत 25 जुलाई को जनता कालोनी से उपचार कराने आए 66 वर्षीय आनंद स्वरूप की ओपीडी की लिफ्ट में मौत हो गई थी। अव्यवस्थाओं पर परिजनों ने विरोध किया तो जांच टीम गठित हुई। मामले की जांच डॉ. आरबी सिंह, डॉ. एके खुराना और डॉ. जितेंद्र जाखड़ ने की। इस जांच रिपोर्ट में कहा गया कि पीजीआई ओपीडी में अचानक बिजली चली गई। इसमें लिफ्ट में बैठे सभी अभिभावक और मरीज फंस गए। बाद में सभी को सुरक्षित तरीके से निकाल लिया गया।
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परंतु लिफ्ट से निकलते समय आनंद स्वरूप अपना संतुलन नहीं रख पाए और गिर गए। बाद में आनंद स्वरूप की मौत हो गई। टीम का कहना है कि उन्होंने इस घटना के लिए किसी भी कर्मचारी और अधिकारी को दोषी करार नहीं दिया है।
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जांच टीम ने ही उठा दिए सवाल
- हादसा बिजली जाने तथा आटोमेटिक रेस्क्यू डिवाइस फेल होने से हुआ।
- हादसे के समय जनरेटर काम नहीं कर रहा था
- प्रतिदिन लिफ्ट के रखरखाव की कार्रवाई रजिस्टर में दर्ज हो और लिफ्ट सही न होने पर नोटिस चस्पां हो
- बिजली जाने पर लाइन को सीधा जनरेटर से जोड़ा जाए
- सभी लिफ्टों का संचालन कुशल कर्मचारियों के माध्यम से हो
बिजली निगम के एसडीई को घसीटा
जांच टीम ने लिफ्ट मामले में उप मंडल अभियंता बिजली मंडल को घसीटा है। इसमें कहा गया है कि लिफ्ट को संस्था की संपदा शाखा को नहीं सौंपा गया। इसलिए इसके संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी बिजली निगम के एसडीई (अभियंता) ी थी। जनरेटर का बैकअप व एडीआर फेल होने की जिम्मेदारी भी उनकी थी।
लिफ्ट मैन जरूरी नहीं, फिर भी 80 का आवेदन
जांच टीम 17 जून 2009 को पावर विभाग की जारी अधिसूचना का हवाला देती है कि लिफ्ट आपरेटर की जरूरत नहीं है। फिर भी उन्होंने 60 लिफ्ट मैन और 20 बिजली कर्मियों के लिए आउटसोर्स पर आवेदन मांगे हैं। इसके लिए पत्र व्यवहार चल रहा है, जैसे ही सरकार अनुमति देगी ये पद भर लिए जाएंगे।
अब उठ रहे ये सवाल
- जांच टीम संस्थान की गलती नहीं मानती। लेकिन पुलिस ने लिफ्ट आपरेटर तीर्थ और सहायक नरेश को गिरफ्तार किया। तीर्थ ने कोर्ट से जमानत ली और नरेश ने अग्रिम जमानत ली?
- बगैर लिफ्ट मैन, तकनीशियन व मैंटेनेंस के लिफ्ट का संचालन किसकी अनुमति से हुआ। हादसे के बाद लिफ्ट क्यों बंद की गई?
- अस्पताल प्रबंधन के सीनियर प्रोफेसर एवं हेड डॉ. ब्रिजेंद्र ढिल्लो ने ओपीडी की लिफ्ट की खामियों को लेकर एमएस और निदेशक को पत्र लिखे, इन पर संज्ञान क्यों नहीं लिया गया?