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Rohtak News: छह दशक में बदली तस्वीर, गांव-कस्बों तक पहुंचीं शिक्षा और स्वास्थ्य की सुविधाएं

Sun, 01 Nov 2026 12:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Sun, 01 Nov 2026 12:12 AM IST
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The landscape has transformed over six
31जेएनडी26: जिले से गुजरता हुआ नेशनल हाइवे 152 डी। संवाद
जींद। छह दशक पहले जब जींद जिले का गठन हुआ था तब यहां विकास के साधन सीमित थे। शिक्षा के लिए शहर में एक सरकारी कॉलेज, स्वास्थ्य सेवाओं के लिए सीमित अस्पताल और आवागमन के लिए मुख्य रूप से रेल व कुछ सड़क मार्ग ही सहारा थे। वक्त के साथ जिले की तस्वीर बदली है। अब जींद से सात नेशनल हाईवे गुजर रहे हैं।
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जिले में नागरिक अस्पताल 200 बेड का है जबकि हैबतपुर में मेडिकल कॉलेज का निर्माण हो रहा है जहां ओपीडी सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। उच्च शिक्षा के संस्थान बढ़े हैं और खेल प्रतिभाओं को निखारने के लिए स्टेडियम व खेल नर्सरियां तैयार हुई हैं। हालांकि विकास की इस दौड़ में औद्योगिक क्षेत्र अब भी पीछे है। रोजगार के बड़े अवसरों की कमी जिले के युवाओं को दूसरे शहरों की ओर जाने के लिए मजबूर कर रही है।
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रेलवे से हाईवे नेटवर्क तक पहुंचा आवागमन

जींद की पहचान लंबे समय से रेल मार्ग के प्रमुख केंद्र के रूप में रही है। अंग्रेजों के शासनकाल में दिल्ली से फिरोजपुर तक बिछाई गई रेल लाइन आज भी जिले से होकर गुजरती है। पहले जहां आवागमन के लिए रेल और सीमित सड़क मार्ग प्रमुख साधन थे वहीं अब सड़क कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव आया है। दिल्ली-पटियाला मार्ग, जिसे पहले एनएच-71 के नाम से जाना जाता था, अब एनएच-352 और एनएच-52 के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा जिले को जम्मू-कटरा एक्सप्रेसवे, एनएच-152डी, जींद-सोनीपत ग्रीनफील्ड मार्ग, करनाल-जींद-भिवानी एनएच-709 और जींद-गोहाना एनएच-352 जैसे मार्गों से भी कनेक्टिविटी मिली है। सात नेशनल हाईवे का जुड़ाव जींद को प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों और दूसरे राज्यों से जोड़ने में अहम भूमिका निभा रहा है। इससे सफर के साथ व्यापार और आवागमन की संभावनाएं भी बढ़ी हैं।
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एक कॉलेज से सात राजकीय कॉलेज और विश्वविद्यालय तक पहुंची शिक्षा

जिले के गठन के समय जींद शहर में केवल एक राजकीय कॉलेज था। अब इस कॉलेज का नाम संत शिरोमणि श्री सैन भगत राजकीय महाविद्यालय है। शहर में इंदिरा गांधी राजकीय महिला महाविद्यालय भी स्थापित हुआ। वर्तमान में जिले में सात राजकीय कॉलेज हैं, जिनमें तीन महिला कॉलेज हैं। पिल्लूखेड़ा में इसी वर्ष राजकीय महिला कॉलेज का निर्माण शुरू हुआ है। सफीदों में नर्सिंग कॉलेज का निर्माण भी शुरू हो चुका है। वर्ष 2014 में चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद जिले में उच्च शिक्षा के नए अवसर बढ़े हैं। यहां विभिन्न पाठ्यक्रमों के साथ प्रशिक्षण की सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में जिले के 22 स्कूल पीएम श्री योजना में शामिल हैं।



50 बेड से 200 बेड तक पहुंचा अस्पताल, मेडिकल कॉलेज से बढ़ेंगी सुविधाएं

स्वास्थ्य सेवाओं में भी जिले ने लंबा सफर तय किया है। जींद शहर में वर्ष 1975 में 50 बेड का सरकारी अस्पताल शुरू हुआ था। अब यह नागरिक अस्पताल 200 बेड का हो चुका है। हैबतपुर गांव के पास 750 बेड क्षमता वाले मेडिकल कॉलेज का निर्माण जारी है और यहां ओपीडी सेवाएं शुरू हो गई हैं। इसके अलावा सफीदों और नरवाना में भी सरकारी अस्पताल हैं। नरवाना में 100 बेड के अस्पताल की घोषणा हो चुकी है। जिले के दूसरे कस्बों में भी स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार हुआ है। मेडिकल कॉलेज के पूरी तरह शुरू होने से विशेषज्ञ उपचार और चिकित्सा शिक्षा के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।



खेलों में बढ़े अवसर, उद्योगों का इंतजार बरकरार

खेलों के क्षेत्र में जिले की पहचान मजबूत हुई है। जिले में पांच खेल स्टेडियम और करीब 150 खेल नर्सरियां खिलाड़ियों को अभ्यास और प्रशिक्षण के अवसर दे रही हैं। इनसे ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मंच मिल रहा है। दूसरी ओर औद्योगिक विकास की तस्वीर अभी भी बहुत उत्साहजनक नहीं है। उचाना के आसपास करीब 1200 एकड़ में आईएमटी विकसित करने की घोषणा हुई थी, लेकिन परियोजना अब तक सिरे नहीं चढ़ पाई है। बड़े उद्योगों और रोजगार के पर्याप्त अवसरों की कमी के कारण युवाओं को नौकरी की तलाश में रोहतक, सोनीपत और दिल्ली जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। छह दशक में सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और खेल के क्षेत्र में जींद ने लंबी दूरी तय की है, लेकिन औद्योगिक विकास की रफ्तार बढ़ाना आने वाले समय की सबसे बड़ी जरूरत है।
फोटो कैप्शन
31जेएनडी26: जिले से गुजरता हुआ नेशनल हाइवे 152 डी। संवाद
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