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कोड पर आधारित है जांच, डोज की हकीकत न डॉक्टर को पता, न ही मरीज को

Mon, 27 Jul 2020 02:06 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 27 Jul 2020 02:06 AM IST
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The investigation is based on code, neither the doctor nor the patient knows the reality of the dose
देश के 12 प्रमुख संस्थानों में से पीजीआईएमएस रोहतक में चल रही कोवैक्सीन की डबल ब्लाइंड रिसर्च का पहला फेज पूरा हो गया है। डबल ब्लाइंड रिसर्च की खास बात है कि इसकी डोज के बारे में ना तो वालंटियर को पता होता और ना डॉक्टर को। इसकी जानकारी सिर्फ रिसर्च कर रहे एक्सपर्ट और आईसीएमआर के पास कोड के रूप में होती है। वैक्सीन देने वाले डॉक्टर की जिम्मेदारी होती है कि वालंटियर को कोई रिएक्शन या स्वास्थ्य संबंधी समस्या ना हो। तय समय बाद वालंटियर का सैंपल और उसे दी गई डोज का कोड लैब भेजा जाएगा, यहां तय होगा कि रिसर्च कितना कामयाब है। इसी आधार पर दूसरा फेज शुरू होगा। पीजीआईएमएस के पीसीसीएम विभागाध्यक्ष, कोविड के प्रदेश के प्रमुख नोडल अधिकारी एवं को वैक्सीन रिसर्च के को - इंवेस्टिगेटर डॉ. ध्रुव चौधरी ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में बताया कि सभी चाहते हैं कि को वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल में सफल हो। इससे कोरोना से हम लोगों को बचा पाएंगे। लेकिन अभी इस ट्रायल पर कुछ कह पाना संभव नहीं है, क्योंकि पहले फेज में 20 वालंटियरों को डोज दी जा चुकी है। यदि किसी वालंटियर को 14 दिन में कोई समस्या नहीं आती तो दूसरा फेज शुरू होगा। रिसर्च में शामिल वालंटियरों को फिर वैक्सीन का दूसरा शॉट दिया जाएगा। अभी दो सप्ताह होने के बाद हर वालंटियर की स्क्रीनिंग की जाएगी, इसकी जांच रिपोर्ट पर अगले फेज की रिसर्च शुरू होगी। डॉ. चौधरी ने बताया कि रिसर्च का दूसरा फेज अधिक महत्वपूर्ण होता है, इसमें अधिक सतर्क रहने की जरूरत होती है। इसमें हमें देखना होता है कि वालंटियर को वैक्सीन से कोई रिएक्शन तो नहीं हो रहा।
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जीरो, तीन, छह लेवल की होती है दवा
डॉ. ध्रुव बताते हैं कि को वैक्सीन की डोज के बारे में डॉक्टर को भी पता नहीं होता कि वह वालंटियर को क्या दे रहे हैं। इसकी जानकारी रिसर्च करने वालों के पास होती है। इसमें कोवैक्सीन की जीरो, तीन व छह लेवल की दवा व कंट्रोल हो सकते हैं। डोज के बारे में डॉक्टर व वालंटियर को न बताना रिसर्च का एक हिस्सा है। सारी जांच कोड पर आधारित होती है। सिर्फ वैक्सीन भेजने वाले को ही पता होती है कि किस वाल में क्या डोज है। गौरतलब है कि पीजीआईएमएस रोहतक पहले फेज में अपने 20 वालंटियरों को पहली डोज दे चुका है।
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