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Rohtak News: शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए कॉमन एसओपी की मांग करेगा महासंघ
Wed, 24 Jun 2026 05:27 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
संवाद न्यूज एजेंसी, रोहतक
Updated Wed, 24 Jun 2026 05:27 AM IST
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रोहतक। महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (एमडीयू) के सीडीओई में आयोजित अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ हरियाणा के दो दिवसीय अभ्यास वर्ग के दूसरे दिन मंगलवार को शिक्षकों की समस्याओं, उनके समाधान व कुटुंब शिक्षा में शिक्षक की भूमिका पर चर्चा की गई। यहां शिक्षकों की समस्याओं के समाधान के लिए कॉमन एसओपी की मांग करने पर जोर दिया।
अखिल भारतीय मंत्री प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि महासंघ की ओर से राज्य सरकार को 21 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है। इस पर सकारात्मक चर्चा हुई है। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही, आठवें वेतन आयोग को लेकर भी महासंघ ने विस्तृत ज्ञापन दिया है।
उन्होंने कहा कि पदोन्नति, प्रमोशन, गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ तथा यूजीसी अधिसूचनाओं की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण शिक्षकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए महासंघ सरकार से एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (कॉमन एसओपी) लागू करने की मांग करेगा।
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विश्वविद्यालय शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रांत संयोजक प्रो. युद्धवीर सिंह ने कहा कि कुटुंब शिक्षा की सम्पूर्णता शिक्षक के बिना संभव नहीं है। शिक्षक अपने आचरण, अनुशासन और नैतिक मूल्यों से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है तथा समाज को दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में शिक्षक को आदर्श के रूप में देखा जाता है, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहकर विद्यार्थियों के साथ आत्मीय, सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में प्रांत मंत्री प्रो. सतीश कुमार सैनी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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अखिल भारतीय मंत्री प्रो. गीता भट्ट ने कहा कि महासंघ की ओर से राज्य सरकार को 21 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है। इस पर सकारात्मक चर्चा हुई है। शिक्षकों की लंबे समय से लंबित मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी को हाल ही में राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही, आठवें वेतन आयोग को लेकर भी महासंघ ने विस्तृत ज्ञापन दिया है।
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उन्होंने कहा कि पदोन्नति, प्रमोशन, गैर-शैक्षणिक कार्यों के बोझ तथा यूजीसी अधिसूचनाओं की अलग-अलग व्याख्याओं के कारण शिक्षकों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इन समस्याओं के समाधान के लिए महासंघ सरकार से एक समान मानक संचालन प्रक्रिया (कॉमन एसओपी) लागू करने की मांग करेगा।
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विश्वविद्यालय शिक्षा प्रकोष्ठ के प्रांत संयोजक प्रो. युद्धवीर सिंह ने कहा कि कुटुंब शिक्षा की सम्पूर्णता शिक्षक के बिना संभव नहीं है। शिक्षक अपने आचरण, अनुशासन और नैतिक मूल्यों से विद्यार्थियों के व्यक्तित्व का निर्माण करता है तथा समाज को दिशा प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि भारतीय समाज में शिक्षक को आदर्श के रूप में देखा जाता है, इसलिए शिक्षकों को अपने दायित्वों के प्रति सजग रहकर विद्यार्थियों के साथ आत्मीय, सामाजिक और भावनात्मक जुड़ाव बनाए रखना चाहिए। कार्यक्रम के अंत में प्रांत मंत्री प्रो. सतीश कुमार सैनी ने धन्यवाद ज्ञापित किया।