{"_id":"696562127f489a1f1a092289","slug":"the-childhood-pastimes-of-lord-krishna-were-described-and-devotees-danced-to-the-hymns-rohtak-news-c-17-roh1020-793281-2026-01-13","type":"story","status":"publish","title_hn":"Rohtak News: श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन, भजनों पर झूमे श्रद्धालु","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Rohtak News: श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का किया वर्णन, भजनों पर झूमे श्रद्धालु
विज्ञापन
35...श्रीनगर कॉलोनी स्थित रामा आश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भजनों पर झूमते श्रद्धालु ।
रोहतक। श्रीनगर कॉलोनी स्थित रामा आश्रम में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के पंचम दिवस पर कथा स्थल भक्ति, श्रद्धा और आनंद से सराबोर रहा और श्रद्धालु भजनों पर झूमते रहे। कथा व्यास स्वामी रामानुज दास ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।
कथा व्यास ने बताया कि किस प्रकार बाल कृष्ण ने अपनी दिव्य लीलाओं से समस्त ब्रजवासियों का उद्धार किया। पूतना का उद्धार, शकटासुर वध व नटखट बाल रूप की मधुर लीलाओं का सजीव वर्णन किया गया। बालकृष्ण की लीलाओं को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो के जयकारों से गूंज उठा।
कथा में यह भी वर्णन किया गया कि भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप के दर्शन के लिए योगी के वेश में स्वयं भगवान शिव ब्रज में पधारे। इस प्रसंग ने श्रोताओं को यह संदेश दिया कि भगवान का बाल स्वरूप भी समस्त देवी-देवताओं के लिए पूजनीय है।
विज्ञापन
महंत अशोक दास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर ले जाने वाली दिव्य प्रेरणा है। उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से कथा श्रवण करने का आह्वान किया।
विज्ञापन
कथा व्यास ने बताया कि किस प्रकार बाल कृष्ण ने अपनी दिव्य लीलाओं से समस्त ब्रजवासियों का उद्धार किया। पूतना का उद्धार, शकटासुर वध व नटखट बाल रूप की मधुर लीलाओं का सजीव वर्णन किया गया। बालकृष्ण की लीलाओं को सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे और पूरा पंडाल नंद के आनंद भयो के जयकारों से गूंज उठा।
विज्ञापन
कथा में यह भी वर्णन किया गया कि भगवान श्रीकृष्ण के बाल रूप के दर्शन के लिए योगी के वेश में स्वयं भगवान शिव ब्रज में पधारे। इस प्रसंग ने श्रोताओं को यह संदेश दिया कि भगवान का बाल स्वरूप भी समस्त देवी-देवताओं के लिए पूजनीय है।
विज्ञापन
महंत अशोक दास महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा केवल कथा नहीं, बल्कि जीवन को धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर ले जाने वाली दिव्य प्रेरणा है। उन्होंने अधिक से अधिक संख्या में श्रद्धालुओं से कथा श्रवण करने का आह्वान किया।