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Rohtak News: इंतजार में बीते 10 साल, नहीं हुआ ट्रेनों के ठहराव का समाधान
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04जेएनडी11: जुलाना रेलवे स्टेशन। संवाद
- फोटो : सियार के हमले में घायल शहनाज बानो।
जुलाना।
कस्बे के लोगों की वर्षों पुरानी ट्रेनों के ठहराव की मांग अभी तक पूरी नहीं हो पाई। विकास के दावे करने वाले जनप्रतिनिधियों से लेकर रेल मंत्रालय तक गुहार लगाने के बावजूद जुलाना रेलवे स्टेशन पर प्रमुख ट्रेनों का ठहराव सपना ही बना हुआ है। आश्वासनों के सहारे 10 साल बीत चुके हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
जुलाना क्षेत्र के रामभज, अजय, सुनील, पवन, रमेश का कहना है कि कस्बा शिक्षा, व्यापार और धार्मिक यात्रा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां से रोजाना सैकड़ों यात्री दिल्ली, जयपुर, राजस्थान, मध्यप्रदेश, असम व अन्य जगहों की यात्रा करते हैं। फिर भी अवध असम एक्सप्रेस, छिंदवाड़ा एक्सप्रेस और खाटू श्याम जाने वाली ट्रेनों का ठहराव जुलाना में नहीं हो रहा है।
रमेश जिंदल, रोशन लाल, जयभगवान अमित ने बताया कि ट्रेनों के ठहराव को लेकर कई बार सांसद, विधायकों और रेल मंत्रियों को ज्ञापन सौंपे गए। चुनावी समय में हर बार नेताओं ने ट्रेनों के ठहराव का भरोसा दिया गया लेकिन चुनाव बीतते ही यह मुद्दा फाइलों में दबकर रह गया।
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अब उन्हें आश्वासनों से ज्यादा ठोस कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने रेलवे डीआरएम से भी ट्रेनों के ठहराव की मांग की थी लेकिन उन्होंने भी आश्वासन ही दिया कि पहले टिकटों का सर्वे करवाया जाएगा उसके बाद ही ट्रेनों का ठहराव होगा।
ट्रेनों के बंद होने से लोग परेशान
कोरोना काल के दौरान बंद हुई उद्यान आभा एक्सप्रेस और फिरोजपुर जनता एक्सप्रेस का संचालन भी शुरू नहीं हुआ। इससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है। ट्रेनों के बंद होने से रोजमर्रा के यात्रियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को मजबूरी में निजी साधनों या दूर के रेलवे स्टेशनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ट्रेनों के ठहराव की मांग
जुलाना क्षेत्र में देवरड़, झमोला और पड़ाना गांव में श्री श्याम मंदिर हैं। क्षेत्र के लोगों में खाटू श्याम मंदिर को लेकर काफी श्रद्धा भावना है। ट्रेनों का ठहराव नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को निजी वाहनों से रुख करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं की मांग है कि जल्द से जल्द ट्रेनों का जुलाना में ठहराव किया जाए ताकि उन्हें हो रही परेशानी से निजात मिल सके।
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कस्बे के लोगों की वर्षों पुरानी ट्रेनों के ठहराव की मांग अभी तक पूरी नहीं हो पाई। विकास के दावे करने वाले जनप्रतिनिधियों से लेकर रेल मंत्रालय तक गुहार लगाने के बावजूद जुलाना रेलवे स्टेशन पर प्रमुख ट्रेनों का ठहराव सपना ही बना हुआ है। आश्वासनों के सहारे 10 साल बीत चुके हैं लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया।
जुलाना क्षेत्र के रामभज, अजय, सुनील, पवन, रमेश का कहना है कि कस्बा शिक्षा, व्यापार और धार्मिक यात्रा के लिहाज से एक महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां से रोजाना सैकड़ों यात्री दिल्ली, जयपुर, राजस्थान, मध्यप्रदेश, असम व अन्य जगहों की यात्रा करते हैं। फिर भी अवध असम एक्सप्रेस, छिंदवाड़ा एक्सप्रेस और खाटू श्याम जाने वाली ट्रेनों का ठहराव जुलाना में नहीं हो रहा है।
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रमेश जिंदल, रोशन लाल, जयभगवान अमित ने बताया कि ट्रेनों के ठहराव को लेकर कई बार सांसद, विधायकों और रेल मंत्रियों को ज्ञापन सौंपे गए। चुनावी समय में हर बार नेताओं ने ट्रेनों के ठहराव का भरोसा दिया गया लेकिन चुनाव बीतते ही यह मुद्दा फाइलों में दबकर रह गया।
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अब उन्हें आश्वासनों से ज्यादा ठोस कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने रेलवे डीआरएम से भी ट्रेनों के ठहराव की मांग की थी लेकिन उन्होंने भी आश्वासन ही दिया कि पहले टिकटों का सर्वे करवाया जाएगा उसके बाद ही ट्रेनों का ठहराव होगा।
ट्रेनों के बंद होने से लोग परेशान
कोरोना काल के दौरान बंद हुई उद्यान आभा एक्सप्रेस और फिरोजपुर जनता एक्सप्रेस का संचालन भी शुरू नहीं हुआ। इससे यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है। ट्रेनों के बंद होने से रोजमर्रा के यात्रियों, विद्यार्थियों और नौकरीपेशा लोगों को मजबूरी में निजी साधनों या दूर के रेलवे स्टेशनों का सहारा लेना पड़ रहा है।
ट्रेनों के ठहराव की मांग
जुलाना क्षेत्र में देवरड़, झमोला और पड़ाना गांव में श्री श्याम मंदिर हैं। क्षेत्र के लोगों में खाटू श्याम मंदिर को लेकर काफी श्रद्धा भावना है। ट्रेनों का ठहराव नहीं होने के कारण श्रद्धालुओं को निजी वाहनों से रुख करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। श्रद्धालुओं की मांग है कि जल्द से जल्द ट्रेनों का जुलाना में ठहराव किया जाए ताकि उन्हें हो रही परेशानी से निजात मिल सके।