{"_id":"618582bca09fdc494e162df9","slug":"talks-continued-throughout-the-day-but-grover-did-not-agree-rohtak-news-rtk6290215174","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिनभर होती रही वार्ता, पर नहीं माने ग्रोवर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिनभर होती रही वार्ता, पर नहीं माने ग्रोवर
विज्ञापन
किलोई गांव स्थित शिव मंदिर के बाहर प्रदर्शन करते लोग। संवाद
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
किलोई के प्राचीन शिव मंदिर में भाजपा नेताओं और किसानों के बीच दिनभर चले गतिरोध के बीच किसान नेताओं ने कई बार पूर्वमंत्री मनीष ग्रोवर को मनाने की कोशिश की कि वह माफी मांग लें। लेकिन ग्रोवर एक ही बात पर अड़े रहे कि वह मंदिर में माथा टेकने आए हैं, उनकी क्या गलती है जो वह माफी मांगें।
किलोई में पुलिस ने मंदिर के दोनों गेट बंद कर घेराबंदी कर ली। वहीं, किसानों ने भी मंदिर से निकलने वाली दोनों सड़कें वाहन लगा कर बंद कर दीं। गतिरोध दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया ताकि गतिरोध दूर हो सके। इनमें भाकियू (अंबावता) के प्रदेश प्रदेश अनिल नांदल, भाकियू (चढूनी) के जिला प्रधान राजू मकड़ौली, किलोई के किसान नेता, हुड्डा खाप के प्रधान ओम प्रकाश नांदल आदि शामिल थे। इन किसान नेताओं ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से बात की। अधिकारी चाहते थे कि भाजपाइयों को जाने दिया जाए। किसान इस पर तैयार नहीं थे, उन्होंने यह आश्वासन जरूर दिया कि वे शांति बनाए रखेंगे। अधिकारियों और किसान नेताओं की ग्रोवर से भी बात हुई। सभी ने ग्रोवर को समझाने की हरसंभव कोशिश की कि दिखावे के लिए ही सही, वे माफी मांग लें और विवाद खत्म करें। लेकिन ग्रोवर एक ही बात पर अड़े रहे कि उनकी कोई गलती नहीं है, वह क्यों माफी मांगें। आखिर दोपहर पौने दो बजे वह किसी तरह बाहर आने के लिए राजी हो गए। अंदरखाते यह तय हुआ कि ग्रोवर खड़े रहेंगे और सतीश नांदल माफी मांग लेंगे। नांदल ने हाथ जोड़कर कहा कि यह पीएम मोदी का महत्वपूर्ण कार्यक्रम था। उसके लिए किलोई मंदिर के चयन पर हम सबको गर्व होना चाहिए। हम तो श्रद्धा भावना से आए थे, अगर आप चाहते हैं कि आगे से न आएं तो नहीं आएंगे। इसके बाद सभी अंदर चले गए। लगा कि विवाद निपट गया है पर अचानक युवा प्रदर्शनकारी बोले कि ग्रोवर ने माफी नहीं मांगी और नारेबाजी शुरू हो गई। पुलिस और प्रशासन के लिए मुश्किल घड़ी थी। एक तरफ ग्रोवर नहीं मान रहे थे, दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ रही थी, दिन ढल रहा था, अंधेरा उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता था। ऐसे में एक बार तो मन बना लिया गया कि ग्रोवर को वहां से सकुशल निकाला जाए। इसी मकसद से अर्ध सैनिक बल भी तैनात कर दिए गए थे। लेकिन फिर ग्रोवर मान गए और इसकी जरूरत नहीं पड़ी।
भाजपा के दो गुट भिड़े
सूत्रों के अनुसार मंदिर के अंदर भाजपा के दो गुटों के बीच काफी विवाद हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बात हाथापाई तक पहुंच गई। एक गुट का कहना था कि ग्रोवर को माफी मांग लेनी चाहिए, लेकिन ग्रोवर गुट इसके लिए तैयार नहीं था। इस बहस के दौरान कई गड़े मुर्दे भी उखड़े।
विज्ञापन
मंदिर का चयन गलत
पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए जिला भाजपा को प्राचीन शिव मंदिर का चयन करना था। संयुक्त किसान मोर्चा पहले से एलान कर चुका है कि जब तक आंदोलन चल रहा है कि भाजपा, जजपा वाले अगर गांवों में आएंगे तो उनका विरोध किया जाएगा। फिर भी किलोई मंदिर का चयन किया गया। जबकि, शहर में भी प्राचीन शिव मंदिर है, वहां सुरक्षित ढंग से कार्यक्रम किया जा सकता था। लेकिन भाजपाई ऐसे इलाके में पहुंच गए जो पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ है। किसान आंदोलन वहां काफी मजबूत स्थिति में है। ऐसे में भाजपा का सारा नेतृत्व वहां पहुंच गया। पीएम मोदी का कार्यक्रम सुबह साढ़े नौ बजे शुरू होना था। सभी लोग समय पर पहुंच गए। राजू मकड़ौली ने कहा कि मंदिर के संचालकों ने उन्हें बताया कि भाजपाइयों ने कहा कि वह सिर्फ जल चढ़ाने आए हैं। उनके साथ पुलिस फोर्स थी, धीरे-धीरे उन्होंने कार्यक्रम के प्रसारण का इंतजाम कर लिया। उधर, जिला युवा मोर्चा प्रधान नवीन ढुल ने कहा कि किलोई का मंदिर सबसे प्राचीन है, इसलिए कार्यक्रम वहां रखा गया था। हमने तो पूरा कार्यक्रम देखा उसके बाद प्रसाद ग्रहण किया। हमें तो किसी विवाद के बारे में पता ही नहीं था।
फिर दोहराया घटनाक्रम
पिछले कुछ माह में पूर्वमंत्री मनीष ग्रोवर की किसानों के साथ दूसरी भिड़ंत है। शुक्रवार को कुछ दिन पहले हुआ घटनाक्रम एक बार फिर दोहराया गया। हिसार में महिला आंदोलनकारियों से अभद्रता के मामले में किसान मनीष ग्रोवर के घर का घेराव करने उनके डीएलएफ कॉलोनी स्थित आवास पर जा रहे थे। पुलिस के रोकने पर उन्होंने खजाना दफ्तर के सामने ही धरना दे दिया था। पहले ही दिन किसानों ने जिस तरह संगठित होकर सारे इंतजाम कर लिए थे, उससे साफ था कि धरना आसानी से खत्म नहीं होगा। दूसरे दिन से ही ग्रोवर पर दबाव बढ़ने लगा था, लेकिन उन्होंने माफी नहीं मांगी। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, यह तय होने लगा था कि माफी मांगे बिना कुछ नहीं होगा। आखिर छठे दिन देर रात को ग्रोवर ने सिंचाई विभाग के बंद कमरे में माफी मांग ली। हालांकि वह अगले दिन मुकर गए और कहा कि माफी नहीं मांगी, बड़ी बहनों के पैर छुए थे। शुक्रवार को भी दोपहर में ही यह स्पष्ट हो गया था कि ग्रोवर को माफी मांगनी पड़ेगी, लेकिन वह अड़े रहे। आखिर शाम तो जब मंदिर के सामने ग्राउंड में जबरदस्त भीड़ जुट गई तो उन्हें माफी मांगनी पड़ी। पर बाद में वह फिर मुकर गए और कहा कि उन्होंने सिर्फ राम-राम कहा था।
यूं चला घटनाक्रम
9.30 बजे - भाजपाई पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए किलोई मंदिर पहुंचे।
10.20 बजे - किसान मंदिर के बाहर जुटना शुरू हुए।
10.50 बजे - पुलिस ने मंदिर के दोनों गेट बंद कर घेराबंदी की।
10.55 बजे - किसानों ने मंदिर की दोनों रास्ते बंद किए।
12. 40 बजे - दूसरे गांवों के किसान भी आने शुरू हुए।
12.55 बजे - किसान नेताओं का दल बातचीत के लिए मंदिर में गया।
1.10 बजे - एसपी उदय सिंह मीणा पहुंचे।
1.42 बजे - सतीश नांदल ने माफी मांगी, ग्रोवर ने नहीं।
2.30 बजे - डीसी कैप्टन मनोज कुमार पहुंचे।
3.00 बजे - सोनीपत, झज्जर की पुलिस पहुंची, अर्ध सैनिक बल तैनात।
5.13 बजे - मनीष ग्रोवर ने हाथ जोड़े।
विज्ञापन
किलोई में पुलिस ने मंदिर के दोनों गेट बंद कर घेराबंदी कर ली। वहीं, किसानों ने भी मंदिर से निकलने वाली दोनों सड़कें वाहन लगा कर बंद कर दीं। गतिरोध दूर करने के लिए जिला प्रशासन ने किसान नेताओं को बातचीत के लिए बुलाया ताकि गतिरोध दूर हो सके। इनमें भाकियू (अंबावता) के प्रदेश प्रदेश अनिल नांदल, भाकियू (चढूनी) के जिला प्रधान राजू मकड़ौली, किलोई के किसान नेता, हुड्डा खाप के प्रधान ओम प्रकाश नांदल आदि शामिल थे। इन किसान नेताओं ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से बात की। अधिकारी चाहते थे कि भाजपाइयों को जाने दिया जाए। किसान इस पर तैयार नहीं थे, उन्होंने यह आश्वासन जरूर दिया कि वे शांति बनाए रखेंगे। अधिकारियों और किसान नेताओं की ग्रोवर से भी बात हुई। सभी ने ग्रोवर को समझाने की हरसंभव कोशिश की कि दिखावे के लिए ही सही, वे माफी मांग लें और विवाद खत्म करें। लेकिन ग्रोवर एक ही बात पर अड़े रहे कि उनकी कोई गलती नहीं है, वह क्यों माफी मांगें। आखिर दोपहर पौने दो बजे वह किसी तरह बाहर आने के लिए राजी हो गए। अंदरखाते यह तय हुआ कि ग्रोवर खड़े रहेंगे और सतीश नांदल माफी मांग लेंगे। नांदल ने हाथ जोड़कर कहा कि यह पीएम मोदी का महत्वपूर्ण कार्यक्रम था। उसके लिए किलोई मंदिर के चयन पर हम सबको गर्व होना चाहिए। हम तो श्रद्धा भावना से आए थे, अगर आप चाहते हैं कि आगे से न आएं तो नहीं आएंगे। इसके बाद सभी अंदर चले गए। लगा कि विवाद निपट गया है पर अचानक युवा प्रदर्शनकारी बोले कि ग्रोवर ने माफी नहीं मांगी और नारेबाजी शुरू हो गई। पुलिस और प्रशासन के लिए मुश्किल घड़ी थी। एक तरफ ग्रोवर नहीं मान रहे थे, दूसरी तरफ प्रदर्शनकारियों की संख्या बढ़ रही थी, दिन ढल रहा था, अंधेरा उनकी मुश्किलें और बढ़ा सकता था। ऐसे में एक बार तो मन बना लिया गया कि ग्रोवर को वहां से सकुशल निकाला जाए। इसी मकसद से अर्ध सैनिक बल भी तैनात कर दिए गए थे। लेकिन फिर ग्रोवर मान गए और इसकी जरूरत नहीं पड़ी।
विज्ञापन
भाजपा के दो गुट भिड़े
सूत्रों के अनुसार मंदिर के अंदर भाजपा के दो गुटों के बीच काफी विवाद हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बात हाथापाई तक पहुंच गई। एक गुट का कहना था कि ग्रोवर को माफी मांग लेनी चाहिए, लेकिन ग्रोवर गुट इसके लिए तैयार नहीं था। इस बहस के दौरान कई गड़े मुर्दे भी उखड़े।
विज्ञापन
मंदिर का चयन गलत
पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए जिला भाजपा को प्राचीन शिव मंदिर का चयन करना था। संयुक्त किसान मोर्चा पहले से एलान कर चुका है कि जब तक आंदोलन चल रहा है कि भाजपा, जजपा वाले अगर गांवों में आएंगे तो उनका विरोध किया जाएगा। फिर भी किलोई मंदिर का चयन किया गया। जबकि, शहर में भी प्राचीन शिव मंदिर है, वहां सुरक्षित ढंग से कार्यक्रम किया जा सकता था। लेकिन भाजपाई ऐसे इलाके में पहुंच गए जो पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का गढ़ है। किसान आंदोलन वहां काफी मजबूत स्थिति में है। ऐसे में भाजपा का सारा नेतृत्व वहां पहुंच गया। पीएम मोदी का कार्यक्रम सुबह साढ़े नौ बजे शुरू होना था। सभी लोग समय पर पहुंच गए। राजू मकड़ौली ने कहा कि मंदिर के संचालकों ने उन्हें बताया कि भाजपाइयों ने कहा कि वह सिर्फ जल चढ़ाने आए हैं। उनके साथ पुलिस फोर्स थी, धीरे-धीरे उन्होंने कार्यक्रम के प्रसारण का इंतजाम कर लिया। उधर, जिला युवा मोर्चा प्रधान नवीन ढुल ने कहा कि किलोई का मंदिर सबसे प्राचीन है, इसलिए कार्यक्रम वहां रखा गया था। हमने तो पूरा कार्यक्रम देखा उसके बाद प्रसाद ग्रहण किया। हमें तो किसी विवाद के बारे में पता ही नहीं था।
फिर दोहराया घटनाक्रम
पिछले कुछ माह में पूर्वमंत्री मनीष ग्रोवर की किसानों के साथ दूसरी भिड़ंत है। शुक्रवार को कुछ दिन पहले हुआ घटनाक्रम एक बार फिर दोहराया गया। हिसार में महिला आंदोलनकारियों से अभद्रता के मामले में किसान मनीष ग्रोवर के घर का घेराव करने उनके डीएलएफ कॉलोनी स्थित आवास पर जा रहे थे। पुलिस के रोकने पर उन्होंने खजाना दफ्तर के सामने ही धरना दे दिया था। पहले ही दिन किसानों ने जिस तरह संगठित होकर सारे इंतजाम कर लिए थे, उससे साफ था कि धरना आसानी से खत्म नहीं होगा। दूसरे दिन से ही ग्रोवर पर दबाव बढ़ने लगा था, लेकिन उन्होंने माफी नहीं मांगी। जैसे-जैसे दिन बीतते गए, यह तय होने लगा था कि माफी मांगे बिना कुछ नहीं होगा। आखिर छठे दिन देर रात को ग्रोवर ने सिंचाई विभाग के बंद कमरे में माफी मांग ली। हालांकि वह अगले दिन मुकर गए और कहा कि माफी नहीं मांगी, बड़ी बहनों के पैर छुए थे। शुक्रवार को भी दोपहर में ही यह स्पष्ट हो गया था कि ग्रोवर को माफी मांगनी पड़ेगी, लेकिन वह अड़े रहे। आखिर शाम तो जब मंदिर के सामने ग्राउंड में जबरदस्त भीड़ जुट गई तो उन्हें माफी मांगनी पड़ी। पर बाद में वह फिर मुकर गए और कहा कि उन्होंने सिर्फ राम-राम कहा था।
यूं चला घटनाक्रम
9.30 बजे - भाजपाई पीएम मोदी के कार्यक्रम के लिए किलोई मंदिर पहुंचे।
10.20 बजे - किसान मंदिर के बाहर जुटना शुरू हुए।
10.50 बजे - पुलिस ने मंदिर के दोनों गेट बंद कर घेराबंदी की।
10.55 बजे - किसानों ने मंदिर की दोनों रास्ते बंद किए।
12. 40 बजे - दूसरे गांवों के किसान भी आने शुरू हुए।
12.55 बजे - किसान नेताओं का दल बातचीत के लिए मंदिर में गया।
1.10 बजे - एसपी उदय सिंह मीणा पहुंचे।
1.42 बजे - सतीश नांदल ने माफी मांगी, ग्रोवर ने नहीं।
2.30 बजे - डीसी कैप्टन मनोज कुमार पहुंचे।
3.00 बजे - सोनीपत, झज्जर की पुलिस पहुंची, अर्ध सैनिक बल तैनात।
5.13 बजे - मनीष ग्रोवर ने हाथ जोड़े।