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Rohtak News: बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से शरीर में पैदा होता है प्रतिरोध
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34...डॉ. मंदीप, मेडिसिन विभाग, नागरिक अस्पताल
रोहतक। वर्तमान में एंटीबायोटिक के अधिक इस्तेमाल को लेकर जागरूक होने की आवश्यकता है। इसको लेकर नागरिक अस्पताल के डॉ. मंदीप ने बताया कि एंटीबायोटिक तभी कारगर रहती है जब उसका तार्किक और प्रमाण आधारित उपयोग किया जाए।
बिना जरूरत के इनका इस्तेमाल शरीर में प्रतिरोध पैदा कर देता है। इससे आम संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकते हैं। गला खराब, बलगम वाली खांसी जैसी स्थितियों में ही एंटीबायोटिक की आवश्यकता पड़ती है जबकि सामान्य बुखार और सूखी खांसी में इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
डॉ. मनदीप ने बताया कि एंटीबायोटिक्स के तार्किक उपयोग का अर्थ ऐसी दवाओं का सही बीमारी, सही मात्रा और सही अवधि के लिए उपयोग से है। वहीं, अतार्किक उपयोग यानी बिना जांच, बिना सलाह और हर छोटी बीमारी में एंटीबायोटिक लेना शरीर में बैक्टीरिया को प्रतिरोधी बना देता है। यह स्थिति खतरनाक होती है क्योंकि ऐसे बैक्टीरिया पर दवाइयां असर करना बंद कर देती हैं।
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उन्होंने बताया कि कई मरीज घर पर ही वायरल इंफेक्शन होने पर एजिथ्रोमाइसिन, एमोक्सीसिलिन जैसी एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं जबकि ये दवाइयां केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन में दी जाती हैं। किसी भी एंटीबायोटिक का उपयोग खून की जांच के बाद ही किया जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि मरीज को वायरल संक्रमण है या बैक्टीरियल।
उन्होंने बताया कि कई एंटीबायोटिक किडनी और लिवर पर को प्रभावित करती है इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इनका उपयोग मरीज को गंभीर स्थिति में पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने पर मरीज को बाद में उपचार के लिए उच्चस्तरीय एंटीबायोटिक देनी पड़ती है। उच्च स्तरीय एंटीबायोटिक देने से इलाज महंगा पड़ता है।
एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है। इससे मरीज बीमारी से जल्दी उबर नहीं पाता और दवाओं पर निर्भर हो जाता है इसलिए एंटीबायोटिक तभी लें जब डॉक्टर इसकी सलाह दें। पूरा कोर्स समय पर पूरा करें। -डॉ. मंदीप, मेडिसिन विभाग, नागरिक अस्पताल।
अधिक एंटीबायोटिक के नुकसान
अधिक उपयोग से रेजिस्टेंस बढ़ता है।
किडनी व लिवर पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
इलाज महंगा और लंबा होता है।
इम्युनिटी कमजोर होती है।
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बिना जरूरत के इनका इस्तेमाल शरीर में प्रतिरोध पैदा कर देता है। इससे आम संक्रमण भी गंभीर रूप ले सकते हैं। गला खराब, बलगम वाली खांसी जैसी स्थितियों में ही एंटीबायोटिक की आवश्यकता पड़ती है जबकि सामान्य बुखार और सूखी खांसी में इनका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।
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डॉ. मनदीप ने बताया कि एंटीबायोटिक्स के तार्किक उपयोग का अर्थ ऐसी दवाओं का सही बीमारी, सही मात्रा और सही अवधि के लिए उपयोग से है। वहीं, अतार्किक उपयोग यानी बिना जांच, बिना सलाह और हर छोटी बीमारी में एंटीबायोटिक लेना शरीर में बैक्टीरिया को प्रतिरोधी बना देता है। यह स्थिति खतरनाक होती है क्योंकि ऐसे बैक्टीरिया पर दवाइयां असर करना बंद कर देती हैं।
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उन्होंने बताया कि कई मरीज घर पर ही वायरल इंफेक्शन होने पर एजिथ्रोमाइसिन, एमोक्सीसिलिन जैसी एंटीबायोटिक लेना शुरू कर देते हैं जबकि ये दवाइयां केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन में दी जाती हैं। किसी भी एंटीबायोटिक का उपयोग खून की जांच के बाद ही किया जाना चाहिए ताकि यह पता चल सके कि मरीज को वायरल संक्रमण है या बैक्टीरियल।
उन्होंने बताया कि कई एंटीबायोटिक किडनी और लिवर पर को प्रभावित करती है इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना इनका उपयोग मरीज को गंभीर स्थिति में पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि गलत तरीके से एंटीबायोटिक लेने पर मरीज को बाद में उपचार के लिए उच्चस्तरीय एंटीबायोटिक देनी पड़ती है। उच्च स्तरीय एंटीबायोटिक देने से इलाज महंगा पड़ता है।
एंटीबायोटिक के अत्यधिक उपयोग से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कमजोर हो जाती है। इससे मरीज बीमारी से जल्दी उबर नहीं पाता और दवाओं पर निर्भर हो जाता है इसलिए एंटीबायोटिक तभी लें जब डॉक्टर इसकी सलाह दें। पूरा कोर्स समय पर पूरा करें। -डॉ. मंदीप, मेडिसिन विभाग, नागरिक अस्पताल।
अधिक एंटीबायोटिक के नुकसान
अधिक उपयोग से रेजिस्टेंस बढ़ता है।
किडनी व लिवर पर दुष्प्रभाव पड़ता है।
इलाज महंगा और लंबा होता है।
इम्युनिटी कमजोर होती है।