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पटियाला की तर्ज पर रोहतक में भी कराए जाएंगे स्पोर्ट्स कोर्स

Tue, 17 Jan 2017 01:56 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक Updated Tue, 17 Jan 2017 01:56 AM IST
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Sports course in Rohtak, would be on the lines of Patiala, sports minister in rohtak
केंद्रीय खेल राज्य मंत्री विजय गोयल - फोटो : अमर उजाला
पंजाब के पटियाला की तर्ज पर रोहतक में भी स्पोर्ट्स के कोर्स कराये जाएंगे। डिप्लोमा कोर्सों का संचालन केंद्रीय खेल मंत्रालय की ओर से किया जाएगा। डिप्लोमा कोर्स बाक्सिंग, फुटबाल, बास्केटबाल, फुटबाल और अन्य खेलों में कराया जाएगा। सोमवार को राष्ट्रीय युवा महोत्सव के समापन अवसर पर युवा कार्यक्रम एवं खेल राज्य मंत्री विजय गोयल ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के आग्रह पर यह घोषणा की। 
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केंद्रीय खेल मंत्री विजय गोयल ने कहा कि युवा अवस्था ही काम करने की उम्र है। इस दौरान ही कॅरियर बनाने के साथ मस्ती भी की जाती है। जो युवा इनमें संतुलन बनाए रखता है, वह हमेशा कामयाब रहता है। पीएम मोदी भी कहते हैं कि खेलोगे तो खिलोगे। उन्होंने कहा कि पीएम ने जब बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का आह्वान किया तो हरियाणा ने सबसे पहले इसे चरितार्थ कर दिखाया। मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक व्यवस्था को जवाबदेह और पारदर्शी बनाने के लिए सीएम सुशासन सहयोगी, ग्रामीण विकास के लिए तरुण आदि कार्यक्रम चलाए हैं।
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युवा महोत्सव का शुभांकर लाडो है जोकि हरियाणा में बेटी को कहा जाता है। उन्होंने कहा कि सेना में हर दसवां जवान प्रदेश का होता है। आपसी भाईचारा, दूध-दही का खाणा, आर्य समाज की धरती, साक्षी मलिक, फौगाट बहनें, योगेश्वर दत्त, बिजेंद्र सिंह और कल्पना चावला हरियाणा की पहचान हैं। 
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उन्होंने कहा कि युवा महोत्सव में फूड फेस्टिवल, सांस्कृतिक कार्यक्रम अच्छे रहे। उन्होंने, कौन कहता है कि आसमान में छेद नहीं हो सकता, एक पत्थर तबियत से तो उछालो यार पंक्तियों का जिक्रकरते हुए कहा कि आपमें से कोई भी नौजवान खेल, सांस्कृतिक, राजनीति, शिक्षा आदि क्षेत्रों में आगे जा सकता है। गोयल ने हरियाणा की माटी से जुड़ी अपनी यादों को साझा करते हुए कहा कि मेरी जन्मभूमि सोनीपत जिले में खरखौदा के पास आनंदपुर गांव है।


बच्चे गाना सुनाते हैं, रूप सुहाना लगता है...
विजय गोयल ने कहा कि मेरी दादी भजन सुनाती थीं प्रेमी भरकर प्रेम के, ईश्वर के गुण गाया कर। इतना ही नहीं महोत्सव में आए युवाओं के साथ मिलकर उन्होंने दे दी हमें आजादी बिना खड्ग-बिना ढाल, साबरमती के संत तूने कर दिया कमाल गाकर माहौल को जोश से भर दिया। इस लिए बच्चे देशभक्ति के गीत गाते थे, लेकिन आज की दादी को पुराने गीत नहीं आते। इसलिए वे नहीं सुना पाती। यहीं कारण है कि आज किसी बच्चे से पूछा जाए कि गीता सुना तो वह कहने लगेगा कि रूप सुहाना लगता है, चांद पुराना लगता है।
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