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Rohtak News: बचपन में दिख रहे जवानी के लक्षण, पीजीआई में हर माह पहुंच रहे छह नए केस

Mon, 10 Aug 2026 02:30 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 10 Aug 2026 02:30 AM IST
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Signs of early puberty appearing in childhood; PGI receiving six new cases every month.
अभिषेक कीरत
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रोहतक। मासूम बच्चों में समय से पहले यौवन के लक्षण दिखने की घटनाओं ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। पीजीआई रोहतक में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां महज चार साल की मासूम बच्चियों में पीरियड्स (माहवारी) शुरू हो रहे हैं और पांच साल के बच्चे के बच्चे के चेहरे पर मुंहासे हो रहे हैं। पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक में बच्चों को विशेष टीके लगाकर हार्मोन की गति को नियंत्रित किया जा रहा है। चिकित्सा की भाषा में लड़कियों में आठ साल व लड़कों में नौ साल से पहले यौवन के लक्षण दिखने की स्थिति को प्रीकोशियस प्यूबर्टी (असामयिक याैवनारंभ ) कहा जाता है।
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हर महीने आ रहे छह नए मामले, लड़कियों में अधिक समस्या
पीजीआई के पीडियाट्रिक एंडोक्रायनोलॉजी क्लीनिक की चिकित्सक प्रो अंजलि वर्मा ने बताया कि क्लीनिक में हर महीने करीब छह नए बच्चे पहुंच रहे हैं। इनमें लड़कियों की संख्या अधिक है। फिलहाल पीजीआई में करीब 40 बच्चे हर माह इलाज के लिए लीयूपरोलाइड इंजेक्शन लेने पहुंच रहे हैं। इनमें लड़कों की संख्या केवल सात है। हरियाणा के सभी जिलों के अलावा राजस्थान व उत्तर प्रदेश (यूपी) से भी बच्चे आ रहे हैं। साल 2019 में ऐसे मामलों की संख्या महज दो से तीन थी। अब जागरूकता बढ़ने की वजह से केस अधिक संख्या में सामने आने लगे हैं।
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लीयूपरोलाइड इंजेक्शन से रोके जा रहे हार्मोन

डॉ. अंजलि वर्मा ने बताया कि इस बीमारी में कम उम्र में ही दिमाग से सामान्य के मुकाबले ज्यादा हार्मोन निकलने लगते हैं। इनको रोकने के लिए बच्चों को हर महीने लीयूपरोलाइड इंजेक्शन लगाया जाता है। कुछ सालों तक हर महीने यह टीका लगाने के बाद 11 से 12 साल तक आते-आते इंजेक्शन लगाना बंद कर दिया जाता है।
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कारण व समाधान
लड़कियों में समय से पहले यौवन का मुख्य कारण मोटापा है। जंक फूड का सेवन, स्क्रीन टाइम बढ़ने, व्यायाम की कमी, ब्रेन ट्यूमर व उर्वरक युक्त खान-पान भी इसके बड़े कारणों में हैं। ऐसे में रोजाना व्यायाम, स्क्रीन टाइम कम व जंक फूड से दूरी ही सावधानी है।

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लड़कियों की लंबाई पर असर:

अभिभावकों के देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण बच्चों की लंबाई पर सबसे ज्यादा असर पड़ता है। उनकी लंबाई कम रह जाती है। अगर समय पर डॉक्टर के पास आ जाएं तो इसका सटीक समाधान संभव है।
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लक्षण:
आठ साल से पहले स्तनों का बढ़ना।

लड़कों शरीर व जननांग पर बालों का जल्दी आना।
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पीजीआई पहुंचे ये मामले:
केस 1:एक चार साल की मासूम बच्ची को पीरियड की ब्लीडिंग होने पर पीजीआई लाया गया। जांच में पता चला कि उसके हार्मोन सामान्य से काफी बढ़े हुए थे। अब हर महीने टीके के जरिए उसका इलाज चल रहा है।


केस 2: एक पांच साल का लड़का अस्पताल पहुंचा, जो अपनी उम्र के बच्चों से काफी बड़ा दिखता था। उसके चेहरे पर बड़ों की तरह बहुत ज्यादा मुहांसे हो गए व प्राइवेट पार्ट पर भी बाल उग आए थे।
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