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स्मॉग का छाया चादर, आंखों में जलन, सांस लेना भी मुश्किल

Fri, 12 Nov 2021 02:27 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 12 Nov 2021 02:27 AM IST
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Shade sheet of smog, burning in eyes, difficult to breathe
वीरवार की शाम शहर में छाया स्मॉग। अमर उजाला
उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने से दिवाली के सातवें दिन वीरवार को मौसम में फिर बदलाव आ गया है। हवा में नमी की मात्रा बढ़ने से एक्यूआई 400 पार तक पहुंच गया। नमी , धुआं और धूल-कण से मिलकर बना स्मॉग आंसू निकाल रहा है। वहीं, आंखों में जलन की शिकायत के साथ लोगों के लिए सांस लेना भी मुश्किल हो गया है। हवा में बढ़े पीएम 2.5 के स्तर ने प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना दिया है। मौसम परिवर्तनशील बना हुआ है। इस परिवर्तनशील मौसम में उत्तर पश्चिमी हवाओं ने बदलाव लाकर एक बार फिर लोगों को प्रदूषण से जूझने के लिए विवश कर दिया है। उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने से रात के तापमान में गिरावट आने के साथ नमी की मात्रा भी बढ़ी है। इस नमी के संपर्क में आकर धूल के सूक्ष्म कण से (पीएम 2.5) स्मॉग की चादर गहराते जा रहे हैं। इस कारण वीरवार को दिन भर सूर्य की रोशनी नहीं पहुंच सकी। एक्यूआई का स्तर भी अधिकतम 404 पर पहुंच गया। यह औसत 344 रहा। पीएम 2.5 का स्तर भी 303 दर्ज किया गया। प्रदूषण का स्तर ढलती शाम के साथ लगातार बढ़ता गया।
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आज खुश्क रहेगा मौसम
एचएयू के कृषि एवं मौसम विज्ञान विभाग के अध्यक्ष डॉ. एमएल खीचड़ ने बताया कि मौसम 12 नवंबर तक खुश्क रहेगा। वहीं, बादल छाए रहने की भी संभावना है। इस दौरान मध्यम गति से उत्तर पश्चिमी हवाएं चलने से दिन के तापमान में हल्की वृद्धि व रात के तापमान में गिरावट आएगी। वीरवार को अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 12.4 डिग्री सेल्सियस रहा। आने वाले तीन-चार दिनों में रात का तापमान और गिरेगा।
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पीजीआई में बढ़ने लगे आंखों के मरीज
वायु प्रदूषण का असर पीजीआई व सिविल अस्पताल की ओपीडी पर भी पड़ रहा है। यहां आंखों में जलन, लाली, दर्द व सूजन के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। पीजीआई की ओपीडी में रोजाना आने वाले करीब 400 में से 150 से ज्यादा मरीज इन्हीं समस्याओं से पीड़ित होते हैं। सिविल अस्पताल में भी 50 से ज्यादा मरीज आ रहे हैं।
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अस्पताल में आंखों के मरीज आ रहे हैं। प्रदूषण के कारण आंखों में लाली, जलन, दर्द व सूजन की शिकायत आम है। कुछ केस संक्रमण के भी आ रहे हैं। इस मौसम में बचाव ही बेहतर उपाय है। एलर्जी भी आंखों में समस्या की एक बड़ी वजह है।

- डॉ. दिनेश शर्मा, नेत्र चिकित्सक, सिविल अस्पताल
दिवाली के बाद से ही हवा में धूल कणों की अधिकता बनी हुई है। प्रदूषण का स्तर पर भी 400 से ऊपर ही बना हुआ है। रोहतक ग्रीन जोन में होने के बावजूद सेफ नहीं है। पराली, पटाखों का धुआं व अन्य कारण मिलकर प्रदूषण बढ़ा रहे हैं। नमी के कारण हवा में ऊपर उड़ रहे धूल कण नीचे आ गए हैं। इसमें बारूद के महीन कण कॉर्निया में घुस जाते हैं। इससे धुंधलापन आ सकता है। हवा में जहरीले तत्वों की अधिकता संक्रमण का खतरा बढ़ रही है।
- डॉ. आरएस चौहान, अध्यक्ष, नेत्र रोग विभाग, पीजीआई
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