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Sports: कुश्ती में बगैर ट्रायल दो पहलवानों का चयन, उभरा विवाद, योगेश्वर दत्त ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए

Tue, 18 Jul 2023 10:22 PM IST
भूपेंद्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा)
अमर उजाला ब्यूरो, रोहतक (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Tue, 18 Jul 2023 10:22 PM IST
सार

योगेश्वर दत्त ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर टिप्पणी करते हुए भारतीय ओलंपिक संघ की चयन प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है। अंतरराष्ट्रीय पहलवान योगेश्वर दत्त ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। 

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Selection of two wrestlers without trial in wrestling, Yogeshwar Dutt questions the process
पहलवान योगेश्वर दत्त। - फोटो : twitter

विस्तार

बॉक्सिंग के बाद अब कुश्ती में बगैर ट्रायल सीधे ही दो पहलवानों के चयन को लेकर विवाद उभर आया है। ऐसे में सोशल मीडिया पर पुरुष वर्ग में 65 किलोग्राम व महिला वर्ग में 53 किलोग्राम में खास खिलाड़ियों के चयन को लेकर विरोध के स्वर भी उठने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय पहलवान योगेश्वर दत्त ने भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर टिप्पणी करते हुए भारतीय ओलंपिक संघ की चयन प्रक्रिया पर सवालिया निशान लगा दिया है। इसे पहलवान दबे स्वर में धरना देने वालों का सीधे चयन होना बताया जा रहे हैं।

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योगेश्वर दत्त ने अपने अकाउंट में कहा है कि भारतीय ओलंपिक संघ ने एडहॉक कमेटी का गठन किया था। कुश्ती संघ के खेल और विकास संबंधी कामों को पारदर्शी तरीके से करने के लिए यह कदम उठाया गया था।
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मंगलवार को निर्वाचित एडहॉक कमेटी ने अक्तूबर महीने में चीन में होने वाले एशियन खेलों के लिए चयन नियम घोषित किए हैं। इसमें पुरुषों के 65 किग्रा और महिलाओं के 53 किग्रा भार वर्ग में खिलाड़ियों का चयन पहले ही कर लिए जाने की पुष्टि की गई है। ऐसे में चयन पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। इसमें केवल दो भार वर्ग में चयन पहले करने व शेष का ट्रायल होना विवाद की वजह बनता जा रहा है।
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साथ ही सवाल भी उठा है कि किस नियम के तहत यह चयन किया गया है। क्या यह नियम सिर्फ 65 किग्रा पुरुष और 53 किग्रा महिला भार वर्ग में ही लागू हैं। यदि है तो कैसे? यही नहीं, चयन होने के बावजूद खिलाड़ियों के नाम गुप्त रखे गए हैं। यह अपने आपमें संदेह पैदा करता है।


योगेश्वर का कहना है कि एडहॉक कमेटी का यह निर्णय पारदर्शी नहीं है। यह कुश्ती हित में भी नहीं है। यह भारत की कुश्ती और युवा खिलाड़ियों के भविष्य को अंधकार में धकेलने की राह है। अंतरराष्ट्रीय पहलवान ने अपनी टिप्पणी में सवाल उठाया है कि आखिर किस दबाव में यह निर्णय किया गया है। यह हर उभरते और यहां तक कि मौजूदा ओलंपिक विजेता पहलवानों के साथ तक भेदभाव कर रहा है। इसे लेकर विरोध तेज होना तय है।

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